भोपाल में ‘जय जोहार’ का नारा लगाने वाले आदिवासी छात्रों से कथित बदसलूकी, थाना प्रभारी निलंबित
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे आदिवासी छात्रों के साथ पुलिस के कथित अभद्र व्यवहार का मामला सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। छात्रों के ‘जय जोहार’ के नारे लगाने और मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने के दौरान पुलिस से उनकी कहासुनी होने की जानकारी सामने आई है। घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया।
मामले में भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने मिसरोद थाने के प्रभारी रतन सिंह परिहार को निलंबित कर दिया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, वीडियो सामने आने और मामले की गंभीरता को देखते हुए यह कार्रवाई की गई।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की युवा इकाई ने किया था प्रदर्शन
जानकारी के मुताबिक, यह घटना 13 अक्टूबर को हुई, जब गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की युवा इकाई ने आदिवासी विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर प्रदर्शन आयोजित किया था। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे थे और मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे।
इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में मिसरोद थाना प्रभारी छात्रों के ‘जय जोहार’ के नारे पर आपत्ति जताते और कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते दिखाई दे रहे हैं।
‘जय जोहार’ आदिवासी समुदाय में प्रचलित पारंपरिक अभिवादन है, जो सम्मान, आत्मीयता और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस अधिकारी के व्यवहार पर सवाल उठने लगे और कार्रवाई की मांग तेज हो गई।
पुलिस कमिश्नर ने दिए विभागीय जांच के आदेश
मामले को गंभीरता से लेते हुए भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार को निलंबित कर दिया। उनके खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दिए गए हैं।
जांच का उद्देश्य घटना से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों का पता लगाना है। अधिकारियों के मुताबिक, जांच में सामने आने वाले निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यानी निलंबन के साथ मामले की विभागीय प्रक्रिया भी जारी रहेगी।
उमंग सिंघार ने कहा—‘जोहार’ आदिवासी संस्कृति का प्रतीक
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने घटना पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ‘जोहार’ कोई अपशब्द नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, पहचान, स्वाभिमान और सम्मान का प्रतीक है।
सिंघार ने कहा कि पुलिस की वर्दी का इस्तेमाल नागरिकों को अपमानित करने के बजाय उनके अधिकारों की रक्षा के लिए होना चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की।
कांग्रेस ने भी उठाए सवाल
घटना का वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं और विभिन्न आदिवासी संगठनों ने भी कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मामले में संबंधित अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रखना नागरिकों का अधिकार है और प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों से मर्यादित व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि आदिवासी विद्यार्थियों की शिकायतों पर उचित कार्रवाई हो।
जांच के नतीजों पर टिकी नजरें
भोपाल में ‘जय जोहार’ के नारे को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब पुलिस विभाग की कार्रवाई और जांच तक पहुंच गया है। एक तरफ आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्र व्यवहार को लेकर नाराजगी है, वहीं पुलिस ने संबंधित थाना प्रभारी को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी है।
अब जांच में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि घटना के दौरान क्या हुआ और संबंधित अधिकारी की भूमिका क्या थी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

