CM देवेंद्र फडणवीस का बड़ा प्लान, अगले 5 साल में महाराष्ट्र का ‘ग्रोथ इंजन’ बनेगा नासिक
नासिक, 28 अगस्त 2026। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नासिक के औद्योगिक और शैक्षणिक विकास को लेकर बड़ा विजन सामने रखा है। उन्होंने कहा कि नासिक में औद्योगिक गतिविधियों में फिर से तेजी आ रही है और आने वाले पांच वर्षों में नासिक महाराष्ट्र के महत्वपूर्ण ‘ग्रोथ इंजन’ के रूप में उभर सकता है।
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को दिंडोरी तालुका के शिवनई में सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (SPPU) के नासिक उपकेंद्र की नई प्रशासनिक इमारत का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, उद्योग, तकनीक और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने पर जोर दिया।
नासिक के औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति
CM फडणवीस ने कहा कि नासिक के औद्योगिक विकास में पिछले कुछ वर्षों में कुछ सुस्ती आई थी, लेकिन अब क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां दोबारा गति पकड़ रही हैं। उन्होंने नासिक को महाराष्ट्र के संतुलित क्षेत्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
मुख्यमंत्री के अनुसार, नासिक में कृषि, अंगूर उत्पादन और निर्यात, खाद्य प्रसंस्करण, इंजीनियरिंग, एयरोनॉटिक्स, फार्मास्युटिकल्स, लाइफ साइंसेज और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में नासिक में विभिन्न औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्रों में करीब ₹30,000 करोड़ का निवेश हुआ है। सरकार का प्रयास है कि इस औद्योगिक आधार को और मजबूत किया जाए और इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ें।
अगले पांच साल में ‘ग्रोथ इंजन’ बनने का लक्ष्य
फडणवीस ने कहा कि मुंबई-पुणे-नासिक महाराष्ट्र के विकास का एक महत्वपूर्ण त्रिकोण है। उनका विश्वास है कि अगले पांच वर्षों में नासिक राज्य के प्रमुख विकास केंद्रों में शामिल होगा।
नासिक की भौगोलिक स्थिति, औद्योगिक क्षमता और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को देखते हुए सरकार इसे क्षेत्रीय आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है।
विश्वविद्यालयों को केवल डिग्री देने तक सीमित न रहने की सलाह
मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालयों की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को केवल डिग्री देने वाले केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि इनोवेशन, स्टार्टअप, रिसर्च और रोजगार आधारित शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
उन्होंने विश्वविद्यालयों में ऐसे इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित करने की आवश्यकता बताई, जहां विद्यार्थियों के नए विचारों को स्टार्टअप और उद्योगों में बदला जा सके। उनका लक्ष्य विश्वविद्यालयों से भविष्य के उद्यम, नवाचार और वैश्विक स्तर की कंपनियां तैयार करने का है।
AI और डेटा साइंस जैसे विषयों पर फोकस
CM फडणवीस ने बदलती तकनीक के दौर में विद्यार्थियों को भविष्य के रोजगार के लिए तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा साइंस रोजगार की प्रकृति को तेजी से बदल रहे हैं।
उन्होंने SPPU के नासिक उपकेंद्र में डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हेल्थकेयर और क्लिनिकल डेटा मैनेजमेंट जैसे आधुनिक विषयों पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
मुख्यमंत्री के अनुसार, शिक्षा व्यवस्था को उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों को पढ़ाई पूरी करने के बाद बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकें।
SPPU नासिक उपकेंद्र से हजारों विद्यार्थियों को लाभ
SPPU के नासिक उपकेंद्र की नई प्रशासनिक इमारत का उद्घाटन क्षेत्र में उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उपकेंद्र के कार्यक्षेत्र में 196 संबद्ध कॉलेज और मान्यता प्राप्त संस्थान, करीब 2,600 शिक्षक और 2.5 लाख से अधिक विद्यार्थी शामिल हैं।
उपकेंद्र में MBA, BBA, मंदिर प्रबंधन और Executive MBA जैसे पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। भविष्य में तकनीक और कानून से जुड़े स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम, अनुसंधान केंद्र और रोजगारोन्मुखी कार्यक्रम शुरू करने की योजना है।
वधावन पोर्ट से बढ़ेगी कनेक्टिविटी
नासिक के औद्योगिक विकास की संभावनाओं को राज्य के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से भी जोड़कर देखा जा रहा है। वधावन पोर्ट के विकास से नासिक को लॉजिस्टिक्स, इंजीनियरिंग और निर्यात के क्षेत्र में नई संभावनाएं मिलने की उम्मीद जताई गई है।
बेहतर कनेक्टिविटी से स्थानीय उद्योगों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। इससे क्षेत्र में निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
सिंहस्थ कुंभ के लिए ₹34,000 करोड़ के काम
नासिक में 2027 सिंहस्थ कुंभ की तैयारियां भी महाराष्ट्र सरकार के प्रमुख एजेंडे में हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कुंभ से जुड़े करीब ₹34,000 करोड़ के खर्च का बचाव करते हुए कहा कि इसका बड़ा हिस्सा स्थायी बुनियादी ढांचे पर खर्च किया जा रहा है। उनके अनुसार करीब 93 प्रतिशत आवंटन स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए है, जिसका लाभ नासिक को लंबे समय तक मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सड़कें, नदी पुनर्जीवन और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े काम केवल कुंभ आयोजन तक सीमित नहीं रहेंगे। करीब ₹2,500 करोड़ भूमि अधिग्रहण पर स्थायी साधुग्राम के लिए खर्च किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
कुंभ के सभी प्रमुख काम समय पर पूरे करने का दावा
मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि सिंहस्थ कुंभ से जुड़े सभी जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य कार्य पहले पर्वणी से पहले पूरे कर लिए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सड़क, यातायात, स्वच्छता और अन्य नागरिक सुविधाएं तैयार करना है।
कुंभ से जुड़े स्थायी प्रोजेक्ट पूरे होने के बाद नासिक को लंबे समय तक बेहतर शहरी और नागरिक बुनियादी ढांचे का लाभ मिलने की उम्मीद है।
शिक्षा, उद्योग और रोजगार को जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री के विजन में शिक्षा और उद्योग को एक-दूसरे से जोड़ना महत्वपूर्ण है। सरकार चाहती है कि विश्वविद्यालयों में तैयार होने वाला मानव संसाधन स्थानीय उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप हो।
AI, डेटा साइंस, हेल्थकेयर और अन्य आधुनिक क्षेत्रों में रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम शुरू होने से युवाओं को स्थानीय स्तर पर नए अवसर मिल सकते हैं। वहीं उद्योगों के विस्तार से प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार की मांग भी बढ़ सकती है।
नासिक के सामने बड़ी संभावनाएं
नासिक पहले से ही कृषि और अंगूर उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है। अब सरकार औद्योगिक विकास, खाद्य प्रसंस्करण, फार्मास्युटिकल्स, इंजीनियरिंग और आधुनिक तकनीक के क्षेत्रों में इसकी क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है।
यदि निवेश, शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट समय पर जमीन पर उतरते हैं तो नासिक उत्तर महाराष्ट्र के प्रमुख आर्थिक केंद्रों में और मजबूत भूमिका निभा सकता है।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नासिक को अगले पांच वर्षों में महाराष्ट्र के प्रमुख ‘ग्रोथ इंजन’ के रूप में विकसित करने का विजन सामने रखा है। औद्योगिक निवेश, उच्च शिक्षा, AI, डेटा साइंस, स्टार्टअप, कृषि-आधारित उद्योग और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर को इस विकास रणनीति का आधार बनाया जा रहा है।
SPPU के नासिक उपकेंद्र का विस्तार और सिंहस्थ कुंभ के लिए बड़े पैमाने पर स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण इस रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती इन योजनाओं को समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारना और उनसे स्थानीय युवाओं, किसानों, कारोबारियों तथा उद्योगों को वास्तविक लाभ पहुंचाना होगी।
रिपोर्टर; चरणप्रीत सिंह, मुख्य संवाददता देहरादून

