CM Jammu Kashmir Omar Abdullah: 1 अक्टूबर की 5 बड़ी ट्रेंडिंग खबरें, स्टेटहुड से विधानसभा विवाद तक
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से जुड़ी 1 अक्टूबर 2026 की प्रमुख खबरों में विधानसभा में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव, वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विवाद, बीजेपी का विरोध और जल जीवन मिशन की रुकी योजनाओं का मुद्दा प्रमुख है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा का सात दिन चला शरद सत्र 30 सितंबर को समाप्त हुआ, जिसमें राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव के साथ कई प्रशासनिक और जनहित के मुद्दों पर चर्चा हुई।
1. पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव विधानसभा में पारित
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया था। सदन ने इसे पारित कर दिया। प्रस्ताव को लेकर विधानसभा में सत्ता पक्ष और बीजेपी के बीच तीखी बहस हुई।
प्रस्ताव में राज्य का दर्जा बहाल करने के साथ 2000 में तत्कालीन जम्मू-कश्मीर विधानसभा द्वारा पारित स्वायत्तता प्रस्ताव का संदर्भ भी शामिल था। इसी संदर्भ को लेकर बीजेपी ने आपत्ति जताई।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकार और न्याय से जुड़ा विषय बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र से राज्य का दर्जा बहाल करना किसी तरह की रियायत का मामला नहीं है।
2. राज्य का दर्जा और स्वायत्तता के संदर्भ पर BJP का विरोध
बीजेपी ने विधानसभा से पारित प्रस्ताव में स्वायत्तता और पुराने संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ पर सवाल उठाए हैं। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा अनुच्छेद 370 और 35A या 1953 से पहले की स्थिति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
बीजेपी का कहना है कि 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में भारतीय संविधान पूरी तरह लागू है और राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को पुराने प्रावधानों से जोड़ने से प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ये बीजेपी की ओर से व्यक्त राजनीतिक आपत्तियां हैं।
30 सितंबर को विधानसभा सत्र समाप्त होने के बाद बीजेपी ने जम्मू और श्रीनगर में प्रस्ताव के खिलाफ प्रदर्शन भी किया।
3. मुख्य सचिव और कानून सचिव के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव
राज्य का दर्जा बहाल करने वाले प्रस्ताव को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच विवाद भी सामने आया है।
जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल दुल्लू और कानून सचिव अचल सेठी ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर प्रस्ताव की भाषा और उसे सदन में पेश किए जाने को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
इसके बाद PDP विधायक वहीद पारा ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया। उन्होंने तर्क दिया कि अधिकारियों की कानूनी या प्रशासनिक राय विधानसभा के विधायी अधिकारों को सीमित करने का माध्यम नहीं बननी चाहिए।
इस मामले में बीजेपी ने अधिकारियों के रुख का समर्थन किया है, जबकि अन्य दलों के नेताओं ने विधानसभा के अधिकारों में हस्तक्षेप का आरोप लगाया है। दोनों पक्षों की ये राजनीतिक और संवैधानिक व्याख्याएं हैं।
4. जल जीवन मिशन की रुकी योजनाओं पर विधानसभा में चिंता
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के हालिया सत्र में जल जीवन मिशन के तहत चल रही पेयजल योजनाओं की धीमी प्रगति का मुद्दा भी उठा।
विभिन्न दलों के विधायकों ने कई योजनाओं के रुकने, फंड की कमी और कार्यान्वयन में देरी को लेकर चिंता जताई। विधायकों ने ग्रामीण इलाकों में पाइप से पेयजल पहुंचाने वाली परियोजनाओं की निगरानी बढ़ाने और लंबित कार्यों को पूरा करने की जरूरत बताई।
जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक पाइप के जरिए पेयजल पहुंचाना है। विधानसभा में इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के सदस्यों ने समस्याओं को उठाया।
5. विधानसभा का सात दिन का सत्र हंगामेदार रहा
जम्मू-कश्मीर विधानसभा का शरद सत्र 21 से 30 सितंबर तक चला। सत्र में सात बैठकें हुईं और करीब 25 घंटे कार्यवाही चली। विधानसभा को कुल 646 सवाल मिले, जिनमें 328 तारांकित सवाल थे। इनमें से 625 सवाल सूचीबद्ध किए गए।
सत्र में राज्य का दर्जा, नौकरियों, बिजली, राशन, कर्मचारियों, सार्वजनिक धन, सोशल मीडिया पत्रकारिता और विधायकों के वेतन जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
सत्र के दौरान सरकार की ओर से दो प्रमुख प्रस्ताव पारित किए गए। इनमें जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने वाला प्रस्ताव और शिक्षा के अधिकार कानून में संशोधन से संबंधित प्रस्ताव शामिल था।
विधायकों के वेतन बढ़ोतरी वाले बिल भी चर्चा में रहे
विधानसभा में विधायकों और मंत्रियों के वेतन एवं भत्तों में बढ़ोतरी से संबंधित विधेयक भी चर्चा में रहे। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इन विधेयकों को वापस लेने का फैसला किया, क्योंकि सदन में इस मुद्दे पर सर्वसम्मति नहीं बन पाई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी विधायकों की आपत्ति के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि विधेयक सर्वसम्मति से पारित नहीं होते हैं तो उन्हें वापस ले लिया जाएगा। इसके बाद बिल वापस ले लिए गए।
पंचायत चुनाव और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी चर्चा
विधानसभा सत्र के दौरान पंचायत चुनाव और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े सवाल भी उठे। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पंचायत चुनावों में देरी को लेकर विपक्ष के तर्कों पर सवाल उठाए और चुनाव कराने के मुद्दे पर चर्चा की।
जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित सरकार और केंद्र के अधीन प्रशासनिक व्यवस्था के बीच अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर भी विधानसभा में बहस होती रही है।
1 अक्टूबर को CM Jammu Kashmir Omar Abdullah से जुड़ी खबरों में क्या खास?
CM Jammu Kashmir Omar Abdullah से जुड़ी 1 अक्टूबर 2026 की सबसे प्रमुख खबर जम्मू-कश्मीर विधानसभा द्वारा पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव का पारित होना है। इस प्रस्ताव में स्वायत्तता के 2000 के प्रस्ताव का संदर्भ शामिल होने के कारण बीजेपी ने आपत्ति जताई है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री और उनकी सरकार राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को विधानसभा के प्रमुख राजनीतिक मुद्दे के रूप में उठा रही है।
इसी मुद्दे को लेकर मुख्य सचिव अटल दुल्लू और कानून सचिव अचल सेठी की आपत्तियां तथा उनके खिलाफ PDP विधायक द्वारा विशेषाधिकार प्रस्ताव का नोटिस भी चर्चा में है। साथ ही जल जीवन मिशन की रुकी परियोजनाएं और ग्रामीण पेयजल व्यवस्था जैसे मुद्दे विधानसभा सत्र में प्रमुख जनहित विषय रहे।
आगे इस पूरे मामले में विधानसभा के विशेषाधिकार प्रस्ताव पर कार्रवाई और केंद्र के स्तर पर जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे को लेकर होने वाले घटनाक्रम पर नजर रहेगी।
रिपोर्टर; सतविंदर, कौर मुख्य संवाददाता हरियाणा
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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