CM Rekha Gupta का बड़ा एक्शन, सत्य निकेतन PG हादसे के बाद खतरनाक इमारतों पर कार्रवाई
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला PG इमारत गिरने के बाद मुख्यमंत्री CM Rekha Gupta ने सख्त रुख अपनाया है। इस दर्दनाक हादसे में सात लोगों की मौत हुई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। हादसे के बाद दिल्ली सरकार और नगर निगम ने आसपास की असुरक्षित इमारतों की जांच और कार्रवाई तेज कर दी है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे के बाद मौके का जायजा लिया और अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। सरकार ने घटना की जिम्मेदारी तय करने और लापरवाही सामने आने पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है।
सत्य निकेतन में कैसे हुआ हादसा?
सत्य निकेतन में गिरने वाली इमारत का इस्तेमाल छात्रों के लिए PG के तौर पर किया जा रहा था। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, पुरानी इमारत में निर्माण और मरम्मत का काम चल रहा था। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा था कि बेसमेंट में पानी जमा होने और चल रहे निर्माण कार्य के कारण इमारत के पिलर कमजोर हुए और पूरी संरचना ढह गई।
हादसे के बाद NDRF, पुलिस, दमकल विभाग और अन्य बचाव दलों ने मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू की। राहत एवं बचाव अभियान के दौरान कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।
CM Rekha Gupta ने AIIMS पहुंचकर घायलों का जाना हाल
मुख्यमंत्री CM Rekha Gupta ने AIIMS ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर हादसे में घायल छात्रों और उनके परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने डॉक्टरों से घायलों की स्थिति की जानकारी ली और बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों को सरकार की ओर से हर संभव सहायता देने का भरोसा भी दिलाया।
सरकार ने घायलों के इलाज का पूरा खर्च उठाने की घोषणा की है। इसके अलावा हादसे में घायल प्रत्येक व्यक्ति को ₹5 लाख की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया गया है।
पास की इमारत पर भी चला बुलडोजर
हादसे के बाद प्रशासन ने आसपास की इमारतों की सुरक्षा जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने पास की एक इमारत को असुरक्षित घोषित किया, जिसके बाद MCD ने उसे नियंत्रित तरीके से गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी। प्रशासन का कहना है कि किसी अन्य संभावित हादसे को रोकने के लिए जोखिम वाली इमारतों पर कार्रवाई जरूरी है।
सत्य निकेतन जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में छात्र PG और किराए के कमरों में रहते हैं। हादसे के बाद इन भवनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
PG और सार्वजनिक इमारतों का होगा स्ट्रक्चरल ऑडिट
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने PG और अन्य सार्वजनिक उपयोग वाली इमारतों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। PG हब में मौजूद इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की योजना बनाई गई है। साथ ही सार्वजनिक इस्तेमाल वाली इमारतों के लिए नई सुरक्षा नीति पर भी काम किया जा रहा है।
इसका मकसद कमजोर और जर्जर इमारतों की पहचान समय रहते करना है, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले जरूरी कार्रवाई की जा सके।
लापरवाही करने वालों पर होगी कार्रवाई
मुख्यमंत्री CM Rekha Gupta ने साफ किया है कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने मामले में भवन मालिक के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है और घटना की जांच की जा रही है। सरकार ने यह भी कहा है कि जांच में जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
सरकार ने मामले की जांच के लिए मजिस्ट्रियल इंक्वायरी के भी आदेश दिए हैं। जांच में निर्माण कार्य, भवन की स्थिति और सुरक्षा मानकों के पालन समेत कई पहलुओं को देखा जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में भी उठा PG सुरक्षा का मुद्दा
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में PG, निजी हॉस्टल और छात्र आवासों की सुरक्षा का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। अदालत PG और छात्र आवासों के सुरक्षा ऑडिट से जुड़ी याचिका पर विचार कर रही है। अदालत ने देशभर में ऐसे आवासों की सुरक्षा के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी करने की संभावना भी जताई है।
इससे दिल्ली समेत देश के दूसरे शहरों में भी छात्रों के लिए उपलब्ध PG और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर नए सिरे से ध्यान जाने की उम्मीद है।
दिल्ली में जर्जर इमारतों पर बढ़ेगी सख्ती
सत्य निकेतन की घटना ने दिल्ली में पुराने भवनों और अनधिकृत निर्माण को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय नियमित सुरक्षा जांच और समय पर मरम्मत जरूरी है।
दिल्ली सरकार अब ऐसी इमारतों की पहचान करने पर जोर दे रही है, जहां संरचनात्मक कमजोरी, अनधिकृत निर्माण या सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का खतरा है।
छात्रों की सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चिंता
सत्य निकेतन, मुखर्जी नगर, राजेंद्र नगर और दिल्ली के दूसरे छात्र इलाकों में बड़ी संख्या में युवा PG और निजी हॉस्टल में रहते हैं। ऐसे में भवन सुरक्षा का मुद्दा सीधे हजारों छात्रों की जिंदगी से जुड़ा है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राजधानी में सभी छात्र आवासों की समय पर जांच हो रही थी और क्या सुरक्षा मानकों का पालन कराया जा रहा था। अब सरकार की ओर से होने वाले स्ट्रक्चरल ऑडिट और कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि कितनी इमारतें वास्तव में सुरक्षित हैं।
क्या है सरकार का अगला कदम?
CM Rekha Gupta सरकार के सामने अब तीन बड़ी प्राथमिकताएं हैं—पहली, हादसे की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करना; दूसरी, खतरनाक इमारतों की पहचान कर उन्हें खाली या ध्वस्त करना; और तीसरी, PG और छात्र आवासों के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था लागू करना।
सरकार की कार्रवाई से साफ है कि सत्य निकेतन हादसे के बाद राजधानी में भवन सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ाई जा रही है। हालांकि, असली चुनौती यह सुनिश्चित करना होगी कि ये कदम केवल हादसे के बाद की कार्रवाई तक सीमित न रहें, बल्कि दिल्ली में नियमित भवन सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनें।
रिपोर्टर; गरिमा छाबड़ा, विशेष रिपोर्टर, विपणन प्रबंधक, जनसंपर्क प्रबंधक
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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