CM Rekha Gupta Yamuna Safai Abhiyan: दिल्ली के 31 घाटों पर महा-सफाई अभियान, मुख्यमंत्री ने किया श्रमदान
नई दिल्ली। दिल्ली में यमुना नदी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के उद्देश्य से 18 अक्टूबर 2026 को ‘चलो यमुना अभियान’ के तहत सफाई अभियान चलाया गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आईटीओ स्थित हाथी घाट पर पहुंचकर श्रमदान किया। इस अभियान में मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों, युवाओं, स्वयंसेवी संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने हिस्सा लिया। अभियान का उद्देश्य यमुना के घाटों की सफाई के साथ लोगों को नदी संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हाथी घाट पर किया श्रमदान
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आईटीओ स्थित हाथी घाट पर सफाई अभियान में हिस्सा लिया। इस दौरान दिल्ली विधानसभा के मुख्य सचेतक एवं विधायक अभय वर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि और अन्य लोग मौजूद रहे। युवाओं और सामाजिक संगठनों ने भी सफाई कार्य में भागीदारी की।
मुख्यमंत्री ने यमुना की स्वच्छता के लिए जनभागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जब नागरिक स्वयं आगे आकर सफाई अभियान में हिस्सा लेते हैं, तो समाज में स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता बढ़ती है।
अभियान के दौरान घाटों और नदी के आसपास के क्षेत्रों को साफ रखने तथा कचरे का उचित निस्तारण करने पर जोर दिया गया।
दिल्ली के 31 प्रमुख घाटों पर सफाई अभियान
18 अक्टूबर को यमुना के 31 प्रमुख घाटों पर महा-सफाई अभियान चलाने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए जनप्रतिनिधियों को अलग-अलग घाटों की जिम्मेदारी सौंपी गई, ताकि सफाई कार्य को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सके।
सोनिया विहार, रामघाट, वजीराबाद बैराज, कालिंदी कुंज और आईटीओ स्थित हाथी घाट सहित विभिन्न स्थानों पर अभियान से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की गईं। मुख्यमंत्री के साथ कैबिनेट मंत्रियों और अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी इसमें भाग लिया।
अभियान का मुख्य उद्देश्य नदी के किनारों पर जमा कचरे को हटाना, घाटों की सफाई करना और नागरिकों को यमुना को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित करना है।
प्लास्टिक और पूजा सामग्री यमुना में न डालने की अपील
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्लीवासियों से अपील की कि वे यमुना के घाटों और किनारों पर प्लास्टिक, पूजा सामग्री और अन्य कचरा न डालें। उन्होंने स्वच्छता को केवल एक दिन तक सीमित रखने के बजाय इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया।
यमुना के घाटों पर धार्मिक गतिविधियों और पूजा-पाठ के दौरान निकलने वाली सामग्री का उचित निस्तारण भी जरूरी है। प्लास्टिक और दूसरे कचरे को सीधे नदी में डालने से जल प्रदूषण बढ़ सकता है और जलीय जीवों के पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
नागरिकों से अपेक्षा की गई कि वे पूजा सामग्री और प्लास्टिक कचरे को निर्धारित स्थानों पर डालें और नदी के आसपास साफ-सफाई बनाए रखें।
जनभागीदारी से यमुना को स्वच्छ बनाने की पहल
यमुना की सफाई दिल्ली के प्रमुख पर्यावरणीय मुद्दों में शामिल है। नदी में प्रदूषण कम करने के लिए घाटों की सफाई के साथ-साथ गंदगी के स्रोतों पर नियंत्रण और लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है।
‘चलो यमुना अभियान’ के जरिए लोगों को नदी संरक्षण से जोड़ने का प्रयास किया गया। सफाई अभियान में नागरिकों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि नदी की स्वच्छता के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे अभियान जागरूकता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं, लेकिन यमुना को लंबे समय तक स्वच्छ रखने के लिए नियमित सफाई, सीवेज का उचित उपचार, कचरे के निस्तारण और प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण भी आवश्यक है।
सफाई को आदत बनाने पर जोर
दिल्ली में यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए नियमित सफाई, कचरे के उचित निस्तारण और नागरिकों की जिम्मेदारी पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। घाटों पर आयोजित ऐसे अभियान लोगों को नदी के महत्व और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का अवसर देते हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लोगों से यमुना के घाटों को साफ रखने और दूसरों को भी स्वच्छता के लिए प्रेरित करने की अपील की। अभियान का संदेश है कि यमुना की स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का साझा दायित्व है।
नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए जरूरी है कि सफाई अभियान नियमित रूप से चलें और इनके साथ ठोस पर्यावरणीय उपाय भी लागू किए जाएं। जनभागीदारी, प्रशासनिक प्रयास और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार मिलकर यमुना के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

