CM Sukhvinder Singh Sukhu का बड़ा एक्शन, नशा तस्करों की संपत्ति पर शिकंजा
शिमला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने नशा तस्करी के खिलाफ सरकार की कार्रवाई को और सख्त करने का संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के अवैध कारोबार से करोड़ों रुपये की संपत्ति बनाने वालों को अब अपनी अवैध कमाई और संपत्तियों का हिसाब देना होगा। सरकार का लक्ष्य सिर्फ तस्करों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि नशे के पूरे नेटवर्क और उसकी आर्थिक नींव को खत्म करना है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, नशा तस्करी से बनाई गई आलीशान कोठियां, होटल, दुकानें, जमीन, वाहन और अन्य संपत्तियां मेहनतकश लोगों तथा उन परिवारों की कीमत पर बनाई गई हैं, जिनके बच्चे नशे की गिरफ्त में फंस रहे हैं। उन्होंने कहा कि नशे से अर्जित अवैध संपत्ति को अपराधियों के पास किसी भी कीमत पर नहीं रहने दिया जाएगा।
नूरपुर में 3.27 करोड़ की संपत्ति जब्त
मुख्यमंत्री ने नूरपुर पुलिस की कार्रवाई की सराहना की। पुलिस ने नशा तस्करी से जुड़ी करीब 3.27 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। इस कार्रवाई में आलीशान मकान, जमीन, होटल, दुकानें, वाहन और बैंक खातों से जुड़ी संपत्तियां शामिल हैं।
नूरपुर पुलिस के मुताबिक, नशा तस्करी से जुड़े मामलों में वित्तीय जांच के आधार पर संपत्तियों की पहचान की गई। एक मामले में सक्षम प्राधिकारी ने 9 सितंबर 2026 को संपत्ति जब्ती की पुष्टि की। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, इस साल 10 सितंबर तक नूरपुर पुलिस जिले में 17 मामलों में करीब 29.95 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी थी।
नशा माफिया के आर्थिक नेटवर्क पर वार
CM सुक्खू ने कहा कि सरकार की रणनीति केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों को नशा तस्करी के आर्थिक नेटवर्क की पहचान करने और अवैध संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने की पूरी छूट दी गई है।
सरकार का उद्देश्य नशे के कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क को तोड़ना है। इसमें तस्करों के साथ-साथ उनकी आर्थिक व्यवस्था और नशीले पदार्थों से अर्जित संपत्तियों पर भी कार्रवाई शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा माफिया के लिए हिमाचल प्रदेश में कोई जगह नहीं है।
जब्त संपत्ति समाज के काम आएगी
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि नशे से अर्जित अवैध संपत्ति को समाज के हित में वापस लाने की दिशा में सरकार काम कर रही है। ऐसी संपत्तियों से मिलने वाले संसाधनों का इस्तेमाल नशा मुक्ति, पुनर्वास और जागरूकता कार्यक्रमों को मजबूत करने में किया जा सकता है।
सरकार का मानना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई में केवल कार्रवाई जरूरी नहीं, बल्कि नशे की चपेट में आए लोगों के पुनर्वास और युवाओं में जागरूकता बढ़ाने पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।
शिमला में भी आर्थिक नेटवर्क पर कार्रवाई
हिमाचल में नशा तस्करों के खिलाफ संपत्ति से जुड़ी कार्रवाई का दायरा बढ़ रहा है। शिमला पुलिस ने भी सितंबर में एक एनडीपीएस मामले में आरोपी की करीब 1.64 करोड़ रुपये की चल-अचल और वित्तीय संपत्तियां सीज की थीं। पुलिस के अनुसार, वित्तीय जांच में इन संपत्तियों का संबंध प्रथम दृष्टया नशे की अवैध तस्करी से अर्जित आय से पाया गया।
इससे साफ है कि राज्य में नशे के खिलाफ कार्रवाई अब तस्करों की गिरफ्तारी के साथ-साथ उनके आर्थिक आधार को कमजोर करने पर भी केंद्रित हो रही है।
युवाओं को नशे से बचाने पर जोर
CM Sukhvinder Singh Sukhu ने नशे को हिमाचल के युवाओं और परिवारों के लिए गंभीर चुनौती बताया है। सरकार की नीति में नशा तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ नशा मुक्ति और पुनर्वास को भी महत्व दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि नशे के कारोबार से अर्जित संपत्ति को अपराधियों के पास रहने देने के बजाय कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। सरकार का दावा है कि इस अभियान का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश में नशे के नेटवर्क को जड़ से खत्म करना और युवाओं को नशे से दूर रखना है।
कुल मिलाकर, CM Sukhvinder Singh Sukhu का यह रुख नशा तस्करों के खिलाफ सरकार की रणनीति में आर्थिक कार्रवाई को महत्वपूर्ण हिस्सा बनाता है। अब पुलिस की कार्रवाई केवल ड्रग्स की बरामदगी और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं, बल्कि नशे से बनाई गई संपत्तियों और पूरे वित्तीय नेटवर्क तक पहुंचने पर भी केंद्रित है।
CM Sukhvinder Singh Sukhu का बड़ा एक्शन, नशा तस्करों की संपत्ति पर शिकंजा
शिमला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने नशा तस्करी के खिलाफ सरकार की कार्रवाई को और सख्त करने का संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के अवैध कारोबार से करोड़ों रुपये की संपत्ति बनाने वालों को अब अपनी अवैध कमाई और संपत्तियों का हिसाब देना होगा। सरकार का लक्ष्य सिर्फ तस्करों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि नशे के पूरे नेटवर्क और उसकी आर्थिक नींव को खत्म करना है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, नशा तस्करी से बनाई गई आलीशान कोठियां, होटल, दुकानें, जमीन, वाहन और अन्य संपत्तियां मेहनतकश लोगों तथा उन परिवारों की कीमत पर बनाई गई हैं, जिनके बच्चे नशे की गिरफ्त में फंस रहे हैं। उन्होंने कहा कि नशे से अर्जित अवैध संपत्ति को अपराधियों के पास किसी भी कीमत पर नहीं रहने दिया जाएगा।
नूरपुर में 3.27 करोड़ की संपत्ति जब्त
मुख्यमंत्री ने नूरपुर पुलिस की कार्रवाई की सराहना की। पुलिस ने नशा तस्करी से जुड़ी करीब 3.27 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। इस कार्रवाई में आलीशान मकान, जमीन, होटल, दुकानें, वाहन और बैंक खातों से जुड़ी संपत्तियां शामिल हैं।
नूरपुर पुलिस के मुताबिक, नशा तस्करी से जुड़े मामलों में वित्तीय जांच के आधार पर संपत्तियों की पहचान की गई। एक मामले में सक्षम प्राधिकारी ने 9 सितंबर 2026 को संपत्ति जब्ती की पुष्टि की। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, इस साल 10 सितंबर तक नूरपुर पुलिस जिले में 17 मामलों में करीब 29.95 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी थी।
नशा माफिया के आर्थिक नेटवर्क पर वार
CM सुक्खू ने कहा कि सरकार की रणनीति केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों को नशा तस्करी के आर्थिक नेटवर्क की पहचान करने और अवैध संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने की पूरी छूट दी गई है।
सरकार का उद्देश्य नशे के कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क को तोड़ना है। इसमें तस्करों के साथ-साथ उनकी आर्थिक व्यवस्था और नशीले पदार्थों से अर्जित संपत्तियों पर भी कार्रवाई शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा माफिया के लिए हिमाचल प्रदेश में कोई जगह नहीं है।
जब्त संपत्ति समाज के काम आएगी
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि नशे से अर्जित अवैध संपत्ति को समाज के हित में वापस लाने की दिशा में सरकार काम कर रही है। ऐसी संपत्तियों से मिलने वाले संसाधनों का इस्तेमाल नशा मुक्ति, पुनर्वास और जागरूकता कार्यक्रमों को मजबूत करने में किया जा सकता है।
सरकार का मानना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई में केवल कार्रवाई जरूरी नहीं, बल्कि नशे की चपेट में आए लोगों के पुनर्वास और युवाओं में जागरूकता बढ़ाने पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।
शिमला में भी आर्थिक नेटवर्क पर कार्रवाई
हिमाचल में नशा तस्करों के खिलाफ संपत्ति से जुड़ी कार्रवाई का दायरा बढ़ रहा है। शिमला पुलिस ने भी सितंबर में एक एनडीपीएस मामले में आरोपी की करीब 1.64 करोड़ रुपये की चल-अचल और वित्तीय संपत्तियां सीज की थीं। पुलिस के अनुसार, वित्तीय जांच में इन संपत्तियों का संबंध प्रथम दृष्टया नशे की अवैध तस्करी से अर्जित आय से पाया गया।
इससे साफ है कि राज्य में नशे के खिलाफ कार्रवाई अब तस्करों की गिरफ्तारी के साथ-साथ उनके आर्थिक आधार को कमजोर करने पर भी केंद्रित हो रही है।
युवाओं को नशे से बचाने पर जोर
CM Sukhvinder Singh Sukhu ने नशे को हिमाचल के युवाओं और परिवारों के लिए गंभीर चुनौती बताया है। सरकार की नीति में नशा तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ नशा मुक्ति और पुनर्वास को भी महत्व दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि नशे के कारोबार से अर्जित संपत्ति को अपराधियों के पास रहने देने के बजाय कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। सरकार का दावा है कि इस अभियान का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश में नशे के नेटवर्क को जड़ से खत्म करना और युवाओं को नशे से दूर रखना है।
कुल मिलाकर, CM Sukhvinder Singh Sukhu का यह रुख नशा तस्करों के खिलाफ सरकार की रणनीति में आर्थिक कार्रवाई को महत्वपूर्ण हिस्सा बनाता है। अब पुलिस की कार्रवाई केवल ड्रग्स की बरामदगी और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं, बल्कि नशे से बनाई गई संपत्तियों और पूरे वित्तीय नेटवर्क तक पहुंचने पर भी केंद्रित है।
रिपोर्टर; सतविंदर, कौर मुख्य संवाददाता हरियाणा
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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Rustam-E-Hind Hindi Daily Newspaper
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