दलेर मेहंदी और सुबोध उनियाल विवाद ने पकड़ा तूल, CM धामी के खेद जताने के बाद भी अपने बयान पर कायम कैबिनेट मंत्री
उत्तराखंड के टिहरी जिले में आयोजित कुंजापुरी देवी मेले के दौरान मशहूर पंजाबी गायक दलेर मेहंदी और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बीच शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए दलेर मेहंदी और उनके भाई से खेद जताया, लेकिन कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल अपने बयान पर कायम हैं। पंजाबी गायक मीका सिंह ने भी मंत्री से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है।
देहरादून, 24 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड के प्रसिद्ध कुंजापुरी देवी मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान पंजाबी गायक दलेर मेहंदी और राज्य के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बीच हुआ विवाद अब राजनीतिक और सांस्कृतिक चर्चा का विषय बन गया है।
इस मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हस्तक्षेप के बाद भी विवाद समाप्त नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री ने दलेर मेहंदी और उनके भाई से बातचीत कर खेद जताया, लेकिन कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने अपने पहले दिए गए बयान से पीछे हटने से इनकार किया है।
मंत्री का कहना है कि उन्होंने विवाद की शुरुआत नहीं की थी। वहीं दलेर मेहंदी के समर्थन में उनके भाई और प्रसिद्ध पंजाबी गायक मीका सिंह भी सामने आए हैं।
कुंजापुरी देवी मेले में कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह पूरा मामला टिहरी जिले में आयोजित प्रसिद्ध कुंजापुरी देवी मेले का है।
बीते सोमवार को मेले में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध पंजाबी गायक दलेर मेहंदी अपनी प्रस्तुति दे रहे थे।
कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और दलेर मेहंदी के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई।
इसके बाद मंत्री की ओर से गायक की प्रस्तुति और व्यवहार को लेकर की गई टिप्पणियां चर्चा में आ गईं।
मामले ने उस समय अधिक तूल पकड़ लिया, जब मंत्री के बयान पर पंजाबी संगीत जगत से प्रतिक्रिया आने लगी।
दलेर मेहंदी पर की गई टिप्पणी से बढ़ा विवाद
कुंजापुरी मेले में हुए घटनाक्रम के बाद सुबोध उनियाल की ओर से दलेर मेहंदी के व्यवहार को लेकर सवाल उठाए गए थे।
गायक की स्थिति को लेकर शराब के सेवन से जुड़ी टिप्पणी भी विवाद का विषय बनी।
हालांकि, किसी व्यक्ति के शराब के प्रभाव में होने की पुष्टि केवल उसके मंचीय व्यवहार या बोलने के अंदाज से नहीं की जा सकती।
इसके लिए संबंधित परिस्थितियों और चिकित्सकीय साक्ष्यों की आवश्यकता होती है।
दलेर मेहंदी के संबंध में इस प्रकार का कोई पुष्ट चिकित्सकीय प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
इसी वजह से मंत्री की टिप्पणी को लेकर सवाल उठे और विवाद बढ़ गया।
मीका सिंह ने की सार्वजनिक माफी की मांग
दलेर मेहंदी के भाई और मशहूर पंजाबी गायक मीका सिंह ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
मीका सिंह की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कलाकारों के सम्मान और सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की टिप्पणियों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा शुरू हो गई।
पंजाबी संगीत जगत में दलेर मेहंदी की पहचान लंबे समय से लोकप्रिय कलाकार के रूप में रही है।
ऐसे में उनके बारे में की गई टिप्पणियों ने संगीत प्रेमियों और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का भी ध्यान आकर्षित किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया हस्तक्षेप
विवाद बढ़ने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले में हस्तक्षेप किया।
मुख्यमंत्री ने दलेर मेहंदी और उनके भाई से बातचीत कर घटनाक्रम पर खेद जताया।
मुख्यमंत्री की इस पहल को विवाद शांत कराने के प्रयास के रूप में देखा गया।
हालांकि, इसके बाद भी कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के रुख में कोई स्पष्ट बदलाव सामने नहीं आया।
मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बावजूद मंत्री अपने पहले दिए गए बयान पर कायम हैं।
अपने बयान पर कायम सुबोध उनियाल
मीडिया से बातचीत के दौरान कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने विवाद को लेकर अपना पक्ष रखा।
उन्होंने कहा कि विवाद की शुरुआत उनकी ओर से नहीं की गई थी।
मंत्री ने दलेर मेहंदी को बड़ा कलाकार मानते हुए कार्यक्रम के लिए प्रस्तावित पारिश्रमिक का भी उल्लेख किया।
सुबोध उनियाल ने सवाल उठाया कि यदि दलेर मेहंदी बड़े कलाकार नहीं होते, तो उन्हें 36 लाख रुपये का प्रस्ताव क्यों दिया जाता।
उनके इस बयान से स्पष्ट है कि वह दलेर मेहंदी की लोकप्रियता को स्वीकार करते हैं, लेकिन विवाद के संबंध में अपनी स्थिति बदलने को तैयार नहीं हैं।
36 लाख रुपये के प्रस्ताव का भी किया उल्लेख
सुबोध उनियाल ने अपने बयान में दलेर मेहंदी को कार्यक्रम के लिए 36 लाख रुपये का प्रस्ताव दिए जाने की बात कही।
हालांकि, यह राशि मंत्री के बयान के आधार पर सामने आई है। कार्यक्रम से संबंधित वास्तविक भुगतान, अनुबंध और अन्य वित्तीय विवरण की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
मंत्री ने इस राशि का उल्लेख करते हुए कहा कि दलेर मेहंदी की पहचान एक बड़े कलाकार के रूप में है।
इसके बावजूद कार्यक्रम के दौरान हुए घटनाक्रम को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
मुख्यमंत्री के खेद जताने के बाद भी क्यों नहीं थमा मामला?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से खेद जताए जाने के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि विवाद शांत हो सकता है।
लेकिन कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के अपने बयान पर कायम रहने से मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
एक ओर मुख्यमंत्री ने कलाकारों से संवाद कर विवाद को शांत करने का प्रयास किया, वहीं दूसरी ओर मंत्री अपने पक्ष का बचाव कर रहे हैं।
इस स्थिति के कारण विवाद को लेकर राजनीतिक और सांस्कृतिक हलकों में चर्चा जारी है।
कलाकारों के सम्मान को लेकर उठे सवाल
कुंजापुरी मेले में हुई घटना ने सार्वजनिक कार्यक्रमों में कलाकारों के सम्मान और आयोजकों की जिम्मेदारी से जुड़े प्रश्न भी सामने रखे हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कलाकारों और आयोजकों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होता है।
कार्यक्रम की शर्तें, प्रस्तुति का समय, मंचीय व्यवस्था और अन्य व्यवस्थाएं पहले से स्पष्ट होने पर विवाद की संभावना कम हो सकती है।
इसी प्रकार किसी कलाकार के व्यवहार को लेकर सार्वजनिक टिप्पणी करते समय तथ्यात्मक सावधानी बरतना आवश्यक है।
विशेष रूप से नशे जैसे आरोपों की पुष्टि के बिना उन्हें तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं माना जा सकता।
कुंजापुरी देवी मेला धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण
उत्तराखंड के टिहरी जिले में आयोजित कुंजापुरी देवी मेला धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है।
इस प्रकार के मेलों में श्रद्धालुओं के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक भी भाग लेते हैं।
धार्मिक आयोजनों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थानीय परंपराओं और कला को प्रोत्साहित करने का माध्यम बनते हैं।
ऐसे आयोजनों में प्रसिद्ध कलाकारों की प्रस्तुतियां दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र होती हैं।
हालांकि, इस बार दलेर मेहंदी की प्रस्तुति से जुड़ा विवाद मेले की सांस्कृतिक गतिविधियों से अधिक चर्चा में आ गया है।
उत्तराखंड की राजनीति में भी चर्चा तेज
सुबोध उनियाल राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। ऐसे में उनके बयान और मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा हो रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा खेद जताए जाने के बाद भी मंत्री का अपने रुख पर कायम रहना इस विवाद का प्रमुख पहलू बन गया है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस मामले में किसी औपचारिक विभागीय कार्रवाई या जांच की पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल विवाद मुख्य रूप से सार्वजनिक बयानों और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाओं के इर्द-गिर्द बना हुआ है।
दलेर मेहंदी की लोकप्रियता और सांस्कृतिक पहचान
दलेर मेहंदी भारतीय पंजाबी संगीत जगत के प्रसिद्ध गायकों में शामिल हैं।
उन्होंने अपने ऊर्जावान गायन और मंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से देश-विदेश में पहचान बनाई है।
उनके लोकप्रिय गीतों ने पंजाबी पॉप संगीत को व्यापक श्रोतावर्ग तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वहीं उनके भाई मीका सिंह भी भारतीय संगीत और मनोरंजन जगत का जाना-पहचाना नाम हैं।
ऐसे में दोनों कलाकारों से जुड़े विवाद पर लोगों की रुचि बनी हुई है।
विवाद के समाधान पर टिकी नजर
कुंजापुरी देवी मेले में शुरू हुए इस विवाद में मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद भी संबंधित पक्षों के बीच मतभेद समाप्त नहीं हुए हैं।
मीका सिंह सार्वजनिक माफी की मांग कर चुके हैं, जबकि सुबोध उनियाल अपने बयान पर कायम हैं।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्षों के बीच आगे कोई संवाद होता है या विवाद सार्वजनिक बयानों तक ही सीमित रहता है।
इस मामले में किसी भी नए घटनाक्रम की पुष्टि संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों से ही हो सकेगी।
CM धामी की पहल के बावजूद जारी है विवाद
उत्तराखंड के कुंजापुरी देवी मेले में दलेर मेहंदी और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बीच हुआ विवाद फिलहाल शांत होता नजर नहीं आ रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दलेर मेहंदी और उनके भाई से खेद जताकर स्थिति संभालने का प्रयास किया, लेकिन मंत्री ने स्पष्ट किया है कि वह अपने बयान पर कायम हैं।
इस घटनाक्रम ने सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की जिम्मेदारी, कलाकारों के सम्मान और सांस्कृतिक आयोजनों में संवाद की आवश्यकता को लेकर बहस छेड़ दी है।
फिलहाल दलेर मेहंदी और सुबोध उनियाल विवाद में मुख्यमंत्री धामी के हस्तक्षेप के बावजूद मतभेद बने हुए हैं। मीका सिंह सार्वजनिक माफी की मांग कर रहे हैं, जबकि सुबोध उनियाल अपने बयान से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।

