Haryana Weather: मानसून पर एक हफ्ते का ब्रेक, सितंबर के पहले सप्ताह में फिर सक्रिय होने के आसार
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हरियाणा में मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ने लगी हैं। मौसम विभाग के अनुसार अगले एक सप्ताह तक प्रदेश में ज्यादा बारिश की संभावना नहीं है। हालांकि सितंबर के पहले सप्ताह में मानसून फिर सक्रिय हो सकता है।
Haryana Weather में अगले कुछ दिनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हरियाणा में मानसूनी गतिविधियां अब कमजोर पड़ने लगी हैं। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आने वाली मानसूनी हवाओं की रफ्तार कम होने के कारण अगले सप्ताह प्रदेश में ज्यादा बारिश के आसार नहीं हैं। करीब एक सप्ताह तक मानसून पर ब्रेक रहने की संभावना है। इसके बाद सितंबर के पहले सप्ताह में मानसून के फिर सक्रिय होने की उम्मीद जताई जा रही है।
अगस्त में सामान्य से 14 फीसदी कम बारिश
हरियाणा में अगस्त के दौरान अब तक 257.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यह सामान्य बारिश के मुकाबले करीब 14 फीसदी कम है।
19 अगस्त को प्रदेश के कई जिलों में बारिश हुई। इनमें कुरुक्षेत्र में सबसे ज्यादा 84.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा पंचकूला में 67.5 मिलीमीटर, यमुनानगर में 60 मिलीमीटर, फतेहाबाद में 32 मिलीमीटर और सोनीपत में 29.5 मिलीमीटर बारिश हुई।
बारिश के बावजूद प्रदेश में अगस्त की कुल बारिश सामान्य से कम बनी हुई है।
अंबाला की 10 कॉलोनियों में घुसा पानी
पहाड़ी इलाकों में हुई भारी बारिश का असर मैदानी क्षेत्रों में भी देखने को मिला। अंबाला कैंट में मंगलवार देर रात टांगरी नदी का जलस्तर अचानक 27,720 क्यूसेक तक पहुंच गया।
नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद आसपास की करीब 10 कॉलोनियों में तीन फीट तक पानी भर गया। रात करीब 11:30 बजे जलभराव की स्थिति गंभीर हो गई। प्रशासन की ओर से पहले ही चेतावनी जारी किए जाने के कारण स्थानीय लोग सतर्क थे।
बुधवार सुबह नदी का जलस्तर कम होने के साथ ही पानी भी धीरे-धीरे उतरना शुरू हो गया। हालांकि जलभराव के कारण स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मोरनी हिल्स में लैंडस्लाइड
पंचकूला के मोरनी हिल्स क्षेत्र में भी भारी बारिश के कारण भूस्खलन की घटना सामने आई। पहाड़ी से मलबा गिरने के कारण आसपास रहने वाले लोगों में चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि भूस्खलन के कारण कई मकानों पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इलाके में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।
वहीं, पंचकूला में घग्गर नदी का जलस्तर भी बढ़ गया और नदी उफान पर बहती नजर आई। प्रशासन की ओर से नदी और आसपास के संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी जा रही है।
पानीपत और फरीदाबाद में जलभराव
तेज बारिश के कारण पानीपत और फरीदाबाद के कई प्रमुख मार्गों और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी।
सुबह के समय सड़कों पर पानी जमा होने से वाहन चालकों को परेशानी हुई। कई जगहों पर लोगों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। जलभराव के कारण यातायात की रफ्तार भी प्रभावित हुई।
स्थानीय प्रशासन की ओर से जल निकासी की व्यवस्था को लेकर काम किया गया, लेकिन निचले इलाकों में बारिश के बाद पानी जमा होने की समस्या बनी रही।
कालका-शिमला रेलखंड पर गिरा मलबा
बारिश का असर कालका-शिमला रेलखंड पर भी देखने को मिला। बुधवार दोपहर करीब 3:15 बजे गुम्मन और कोटी स्टेशन के बीच पहाड़ी से भारी मलबा रेलवे ट्रैक पर आ गिरा।
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रेन संख्या 52458 को कोटी स्टेशन पर रोक दिया गया। ट्रेन में करीब 172 यात्री सवार थे।
यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेलवे ने स्थानीय सेना अधिकारियों से मदद मांगी। मलबे के कारण रेल यातायात प्रभावित हुआ और ट्रैक को सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी कार्रवाई की गई।
हिसार में 37 डिग्री पहुंचा तापमान
बारिश के बीच हरियाणा के कई हिस्सों में तापमान भी सामान्य के आसपास बना हुआ है। प्रदेश के औसत अधिकतम तापमान में 0.4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
हिसार 37.0 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश में सबसे गर्म रहा। इसके बाद नारनौल में 36.5 डिग्री, रोहतक में 36.2 डिग्री और भिवानी में 36.0 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।
वहीं, बारिश वाले कुरुक्षेत्र में अधिकतम तापमान 32.5 डिग्री सेल्सियस रहा।
रात के तापमान में भी बदलाव
हरियाणा में औसत न्यूनतम तापमान में करीब 0.3 डिग्री सेल्सियस की कमी दर्ज की गई।
गुरुग्राम में रात का तापमान 22.0 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से करीब 3.8 डिग्री कम था। चंडीगढ़ में न्यूनतम तापमान 23.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।
इसके अलावा नूंह और नारनौल में 24.5 डिग्री सेल्सियस तथा पंचकूला में 25.1 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रहा।
प्रदेश में सिरसा में रात का तापमान सबसे अधिक 27.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
अगले सप्ताह कैसा रहेगा मौसम?
मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आने वाली मानसूनी हवाओं की गति कमजोर होने के कारण अगले सप्ताह हरियाणा में मानसून की गतिविधियां कम रह सकती हैं।
इस दौरान प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश की संभावना कम है। हालांकि स्थानीय स्तर पर कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है।
मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक करीब एक सप्ताह तक मानसून कमजोर रहने के बाद सितंबर के पहले सप्ताह में फिर से मानसूनी गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
बारिश कम, लेकिन कई इलाकों में जलभराव की चुनौती
हरियाणा में अगस्त की कुल बारिश सामान्य से कम रहने के बावजूद कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश ने स्थानीय स्तर पर मुश्किलें पैदा की हैं। अंबाला में टांगरी नदी का जलस्तर बढ़ने से कॉलोनियों में पानी घुसा, जबकि पंचकूला के मोरनी क्षेत्र में लैंडस्लाइड की घटना सामने आई।
इसी तरह पानीपत और फरीदाबाद में जलभराव तथा कालका-शिमला रेलखंड पर मलबा गिरने से बारिश के असर का अंदाजा लगाया जा सकता है।
प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए आने वाले दिनों में संवेदनशील इलाकों पर नजर रखना जरूरी होगा, खासकर पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले पानी और नदियों के जलस्तर को लेकर।
रिपोर्टर; सतविंदर, कौर मुख्य संवाददाता हरियाणा

