कर्नाटक भूमि सुधार कानून पर कांग्रेस में मतभेद, बीआर पाटिल ने राहुल गांधी को लिखी चिट्ठी
बेंगलुरु: कर्नाटक में भूमि सुधार कानून में किए गए संशोधनों को लेकर कांग्रेस के भीतर असहमति सामने आई है। कांग्रेस विधायक बीआर पाटिल ने अपनी ही सरकार के रुख पर नाराजगी जताते हुए पार्टी नेता राहुल गांधी को पत्र लिखा है। उन्होंने कर्नाटक लैंड रिफॉर्म्स एक्ट की धारा 79A, 79B और 79C को फिर से बहाल करने की मांग की है। पाटिल का कहना है कि कांग्रेस ने चुनावी घोषणा पत्र में इन प्रावधानों को बहाल करने का वादा किया था, लेकिन सरकार बनने के बाद इस दिशा में अब तक कदम नहीं उठाया गया।
राहुल गांधी को लिखी चिट्ठी में उठाए सवाल
बीआर पाटिल ने अपने पत्र में कृषि भूमि की खरीद-बिक्री और किसानों की जमीन से जुड़े मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि पार्टी और सरकार जिस दिशा में आगे बढ़ रही है, वह किसानों के हित में है या नहीं।
पाटिल ने पत्र में सवाल उठाते हुए कहा, “हम कहां जा रहे हैं?” उनका तर्क है कि किसानों को अपनी जमीन बेचने पर भले ही अच्छी कीमत मिल रही हो, लेकिन लगातार कृषि भूमि की बिक्री से किसानों के भूमिहीन होने की स्थिति पैदा हो सकती है।
19.92 लाख एकड़ कृषि भूमि बिकने का दावा
कांग्रेस विधायक ने अपने पत्र में कर्नाटक में कृषि भूमि की बिक्री के आंकड़ों का भी उल्लेख किया है। उनके दावे के मुताबिक, वर्ष 2021 से अब तक राज्य में 19.92 लाख एकड़ कृषि भूमि बेची जा चुकी है।
पाटिल के अनुसार, कृषि भूमि की खरीद-बिक्री के कुल मामलों में करीब 60 फीसदी हिस्सेदारी उत्तर कर्नाटक की है। उन्होंने विजयपुरा और कलबुर्गी को उन जिलों में शामिल बताया है, जहां कृषि भूमि की बिक्री बड़े पैमाने पर हुई है। हालांकि ये आंकड़े बीआर पाटिल द्वारा अपने पत्र में किए गए दावे हैं।
धारा 79A, 79B और 79C क्यों चर्चा में हैं?
कर्नाटक लैंड रिफॉर्म्स एक्ट, 1961 में कृषि भूमि की खरीद, स्वामित्व और भूमि सीमा से जुड़े प्रावधान हैं। 2020 में किए गए संशोधनों ने कृषि भूमि खरीदने और रखने से जुड़े कई पुराने प्रतिबंधों को आसान किया था। PRS Legislative Research के अनुसार, उस समय संशोधनों के जरिए कृषि भूमि खरीदने वालों और भूमि रखने की सीमा से जुड़े नियमों में बदलाव किए गए थे।
इसी व्यापक भूमि सुधार व्यवस्था के पुराने प्रावधानों को लेकर अब बीआर पाटिल ने दोबारा बहाली की मांग उठाई है। उनका कहना है कि इससे कृषि भूमि को किसानों के हाथों में बनाए रखने और भूमि बिक्री से जुड़े सवालों पर नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है।
सरकार का क्या है रुख?
बीआर पाटिल की मांग के विपरीत कर्नाटक सरकार ने विधानसभा में फिलहाल धारा 79A, 79B और 79C को बहाल करने का कोई प्रस्ताव नहीं होने की जानकारी दी है।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने विधानसभा में लिखित जवाब में सरकार की स्थिति स्पष्ट की है। इसी रुख को लेकर पाटिल ने असंतोष जताया है।
इससे कांग्रेस विधायक और राज्य सरकार के बीच भूमि नीति को लेकर मतभेद सामने आए हैं। पाटिल का कहना है कि यदि पार्टी ने चुनाव के दौरान इन प्रावधानों को बहाल करने का वादा किया था, तो सरकार को उस वादे पर आगे बढ़ना चाहिए।
किसानों की जमीन को लेकर चिंता
पाटिल ने अपने पत्र में किसानों की जमीन लगातार बिकने पर चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि जमीन की बिक्री से किसानों को तत्काल आर्थिक लाभ मिल सकता है, लेकिन लंबे समय में कृषि भूमि का मालिकाना हक किसानों से बाहर जाने का सवाल महत्वपूर्ण है।
उन्होंने इस मुद्दे को केवल भूमि कानून तक सीमित न रखते हुए किसानों की आर्थिक स्थिति और कृषि भूमि के भविष्य से भी जोड़ा है। उनके अनुसार, कृषि भूमि का बड़े पैमाने पर दूसरे इस्तेमाल के लिए जाना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
चुनावी वादे का भी किया जिक्र
बीआर पाटिल ने राहुल गांधी को लिखे पत्र में कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र का भी हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने भूमि सुधार कानून के संबंधित प्रावधानों को बहाल करने का वादा किया था।
अब पाटिल ने पार्टी नेतृत्व से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने और सरकार के रुख पर पुनर्विचार की मांग की है। उनका पत्र ऐसे समय आया है जब कर्नाटक में कृषि भूमि के इस्तेमाल, खरीद-बिक्री और भूमि नीति को लेकर बहस जारी है।
भूमि सुधार कानून पर आगे बढ़ सकती है बहस
बीआर पाटिल की चिट्ठी के बाद कर्नाटक कांग्रेस के भीतर भूमि सुधार कानून को लेकर चर्चा तेज होने की संभावना है। फिलहाल सरकार का आधिकारिक रुख यही है कि धारा 79A, 79B और 79C को बहाल करने का कोई प्रस्ताव नहीं है, जबकि पाटिल इन्हें दोबारा लागू करने की मांग कर रहे हैं।
इस पूरे विवाद का केंद्र कृषि भूमि की बिक्री, किसानों के जमीन पर स्वामित्व और भूमि सुधार कानून के पुराने प्रावधानों की बहाली है। आने वाले समय में सरकार और कांग्रेस संगठन इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं, इस पर नजर रहेगी।
रिपोर्टर; सतविंदर, कौर मुख्य संवाददाता हरियाणा
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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