मेरठ ब्लू ड्रम हत्याकांड: 30 सितंबर को फैसला, 22 गवाहों की गवाही के बाद अदालत में अहम दिन
मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र के चर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड में बुधवार, 30 सितंबर 2026 को जिला जज की अदालत फैसला सुनाएगी। यह मामला मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या से जुड़ा है। इस मामले में सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला आरोपी हैं। अदालत पहले यह तय करेगी कि दोनों आरोपी हत्या के मामले में दोषी हैं या नहीं। यदि दोष सिद्ध होता है, तो इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी।
इस मामले में अभियोजन और बचाव पक्ष की अंतिम बहस 17 सितंबर को पूरी हो चुकी है। अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और मामले में सामने आए तथ्यों के आधार पर दोनों आरोपियों के लिए अधिकतम सजा यानी मृत्युदंड की मांग की है। वहीं बचाव पक्ष ने हत्या के आरोपों से इनकार किया है।
13 महीने चली सुनवाई, 126 पेशियां
ब्लू ड्रम हत्याकांड की सुनवाई करीब 13 महीने तक चली। इस दौरान अदालत में 126 पेशियां हुईं और अभियोजन पक्ष की ओर से 22 गवाह पेश किए गए। गवाहों में सौरभ के भाई बबलू, उनकी मां और सौरभ के दोस्त के अलावा उन दुकानदारों को भी शामिल किया गया, जिनसे ड्रम, दवाइयां, चाकू, सीमेंट और अन्य सामान खरीदे जाने से जुड़े साक्ष्य सामने आए।
अभियोजन पक्ष ने हत्या से पहले और उसके बाद की कथित तैयारियों को भी परिस्थितिजन्य साक्ष्य के तौर पर अदालत के सामने रखा। इसमें नशीली दवाओं, चाकू, नीले ड्रम, सीमेंट और रेत की खरीद से संबंधित साक्ष्य शामिल हैं। अभियोजन की ओर से यह तर्क रखा गया कि शव को ड्रम में रखकर सीमेंट से सील करने और बाद में उसे कहीं और ले जाकर ठिकाने लगाने की तैयारी थी।
3 मार्च 2025 को हत्या का आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 3 मार्च 2025 को सौरभ राजपूत की हत्या की गई। आरोप है कि पहले उन्हें नशीली दवा दी गई और इसके बाद साहिल को घर बुलाया गया। अभियोजन के मुताबिक हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में रखकर सीमेंट से ढक दिया गया।
अदालत में इस घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्यों और गवाहों के बयान पेश किए गए। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष 30 सितंबर को अदालत के फैसले से ही सामने आएगा।
4 मार्च को बेटी को मायके छोड़कर शिमला गई थी मुस्कान
मामले की टाइमलाइन के अनुसार, 4 मार्च 2025 को मुस्कान अपनी बेटी को मायके छोड़कर साहिल के साथ शिमला चली गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस दौरान सौरभ के फोन से परिवार को मैसेज भेजे गए, जिससे कुछ समय तक परिवार को उनके बारे में जानकारी होने का भ्रम बना रहा।
इसके बाद दोनों के शिमला और मनाली जाने की बात भी सामने आई। पुलिस जांच में इन यात्राओं से जुड़े साक्ष्यों को भी अदालत के सामने रखा गया।
17 मार्च को सामने आया मामला
17 मार्च 2025 को शिमला से लौटने के बाद मामले का खुलासा हुआ। पुलिस जांच के दौरान घर में रखे नीले ड्रम से सौरभ के शव के टुकड़े बरामद होने की बात सामने आई। इसके बाद मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया गया।
इसके बाद मामला अदालत पहुंचा और जुलाई 2025 में जिला जज की अदालत में ट्रायल की प्रक्रिया शुरू हुई। करीब 13 महीने तक चली सुनवाई में अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं।
अभियोजन ने मांगी मृत्युदंड की सजा
मृतक सौरभ के परिवार की ओर से मुकदमे की पैरवी कर रहे अधिवक्ता विजय बहादुर के अनुसार, अभियोजन पक्ष ने संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए दोनों आरोपियों के लिए अधिकतम सजा की मांग की है। उनके मुताबिक हत्या के मामले में आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक का प्रावधान है और अभियोजन ने अधिकतम सजा की मांग रखी है।
दूसरी ओर, बचाव पक्ष की ओर से आरोपों का विरोध किया गया है। इसलिए 30 सितंबर को अदालत के सामने सबसे पहले यह सवाल होगा कि अभियोजन द्वारा पेश किए गए साक्ष्य आरोपों को कानूनी रूप से साबित करते हैं या नहीं।
आज तय होगी मामले की अगली दिशा
मेरठ जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने 30 सितंबर को निर्णय की तारीख तय की थी। अब करीब 13 महीने की सुनवाई, 126 पेशियों और 22 गवाहों के बयान के बाद अदालत अपना निर्णय सुनाएगी।
अदालत पहले दोषसिद्धि या बरी किए जाने पर फैसला करेगी। यदि आरोपी दोषी पाए जाते हैं, तो उसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी। फिलहाल अभियोजन पक्ष ने दोनों आरोपियों के लिए मृत्युदंड की मांग की है, जबकि बचाव पक्ष ने हत्या के आरोपों से इनकार किया है।
रिपोर्टर; सतविंदर, कौर मुख्य संवाददाता हरियाणा
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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