मुंबई बुजुर्ग शव फ्रीजर में: 4 साल से रखा था शव, परिवार को थी भविष्य में जिंदा होने की उम्मीद
मुंबई: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के मलाड पूर्व के कुरार इलाके से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने एक स्थानीय क्लिनिक/डे-केयर सेंटर के फ्रीजर से करीब चार साल से रखा हुआ एक बुजुर्ग का शव बरामद किया है। पुलिस के मुताबिक, बुजुर्ग की मौत वर्ष 2022 में हुई थी, लेकिन परिवार ने उनका अंतिम संस्कार कराने के बजाय शव को सुरक्षित रखने का फैसला किया था। परिवार की उम्मीद थी कि भविष्य में क्रायोनिक्स तकनीक के जरिए उन्हें दोबारा जीवित किया जा सकेगा।
क्लिनिक के फ्रीजर में मिला शव
कुरार पुलिस को स्थानीय स्तर पर मिली सूचना के बाद मामले का पता चला। पुलिस जब मलाड पूर्व के एक स्थानीय क्लिनिक पहुंची तो वहां एक फ्रीजर में बुजुर्ग का शव रखा मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, क्लिनिक पिछले कुछ समय से बंद था और वहां मरम्मत का काम भी चल रहा था। पुलिस ने शव बरामद करने के बाद परिवार से संपर्क किया और पूरे मामले की जानकारी जुटाई।
पुलिस ने फिलहाल मृतक और परिवार के सदस्यों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। परिवार ने पुलिस को बुजुर्ग की मौत से जुड़े दस्तावेज भी उपलब्ध कराए हैं। पुलिस को शुरुआती जांच में किसी आपराधिक घटना के संकेत नहीं मिले हैं और मौत को प्राकृतिक बताया गया है।
2022 में हुई थी बुजुर्ग की मौत
पुलिस के मुताबिक, बुजुर्ग की मौत वर्ष 2022 में हुई थी। अन्य रिपोर्टों में उनकी उम्र करीब 78 वर्ष बताई गई है, जबकि शुरुआती रिपोर्टों में उन्हें 80 वर्षीय बताया गया है। परिवार के मुताबिक, उनकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई थी।
मौत के बाद परिवार ने अंतिम संस्कार कराने के बजाय शव को संरक्षित रखने का फैसला किया। परिवार के सदस्यों ने पुलिस को बताया कि वे बुजुर्ग की मौत से बेहद दुखी थे और उन्हें हमेशा के लिए खोना नहीं चाहते थे।
अमेरिका के क्रायोनिक्स सेंटर ले जाने की योजना
पुलिस पूछताछ में परिवार ने बताया कि उन्होंने शव को भविष्य में अमेरिका के किसी क्रायोनिक्स सेंटर ले जाने के बारे में जानकारी जुटाई थी। परिवार का उद्देश्य शव को लंबे समय तक संरक्षित रखना था, ताकि भविष्य में तकनीक विकसित होने पर उन्हें फिर से जीवित करने की संभावना का इस्तेमाल किया जा सके।
रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार ने अमेरिका में क्रायोनिक्स सेवाएं देने वाले संगठनों से संपर्क भी किया था। इसके साथ ही भारत में शव को संरक्षित रखने की कानूनी स्थिति को लेकर कानूनी सलाह लेने की बात भी सामने आई है।
क्रायोनिक्स क्या है?
क्रायोनिक्स में किसी मृत व्यक्ति के शरीर को बेहद कम तापमान पर संरक्षित रखने की कोशिश की जाती है, इस उम्मीद के साथ कि भविष्य में चिकित्सा विज्ञान इतनी प्रगति कर सके कि गंभीर बीमारी या मृत्यु के कारणों का इलाज संभव हो और शरीर को फिर से जीवित करने की कोई तकनीक विकसित हो।
हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार मानव शरीर को इस तरह संरक्षित करके भविष्य में दोबारा जीवित करना अभी स्थापित चिकित्सा प्रक्रिया नहीं है। कोशिकाओं, ऊतकों और भ्रूण के क्रायोप्रिजर्वेशन का इस्तेमाल चिकित्सा विज्ञान में होता है, लेकिन पूरे मानव शरीर की क्रायोनिक्स अभी प्रयोगात्मक अवधारणा है।
क्लिनिक संचालक को भी नहीं थी जानकारी
जांच में यह पहलू भी सामने आया कि शव को फ्रीजर में रखने की जानकारी स्थानीय क्लिनिक प्रबंधन और संपत्ति मालिक तक भी कथित तौर पर नहीं पहुंची थी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने परिवार, क्लिनिक प्रबंधन और संपत्ति मालिक के बयान दर्ज किए हैं।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, जिस जगह शव रखा गया था, वह डे-केयर सेंटर के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी और संपत्ति के पुनर्विकास से जुड़ी गतिविधियों के दौरान यह मामला सामने आया। पुलिस ने शुरुआती जांच में किसी तरह की गड़बड़ी या हत्या के संकेत नहीं पाए।
पुलिस जांच में जुटी
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शव को इतने लंबे समय तक फ्रीजर में रखने की प्रक्रिया कैसे हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका थी। साथ ही शव को इस तरह संरक्षित रखने की कानूनी स्थिति को लेकर भी विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है।
पुलिस ने क्लिनिक परिसर में सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। परिवार और प्रशासन के बीच इस बात पर भी प्रक्रिया चल रही है कि शव का अंतिम संस्कार कब और किस कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।
परिवार की उम्मीद ने खींचा ध्यान
चार साल तक शव को सुरक्षित रखने के पीछे परिवार की भावनात्मक स्थिति और भविष्य की चिकित्सा तकनीक को लेकर उनकी उम्मीद प्रमुख कारण बताई जा रही है। हालांकि, क्रायोनिक्स के जरिए किसी मृत व्यक्ति को भविष्य में दोबारा जीवित किया जा सकेगा या नहीं, यह अभी वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है।
मुंबई का यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि परिवार ने सामान्य अंतिम संस्कार के बजाय कई वर्षों तक शव को फ्रीजर में सुरक्षित रखने का फैसला किया। पुलिस अब इस पूरे मामले के कानूनी और चिकित्सकीय पहलुओं की जांच कर रही है।
रिपोर्टर; सतविंदर, कौर मुख्य संवाददाता हरियाणा
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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