मुंबई गणेश विसर्जन 2026: गिरगांव चौपाटी पर उमड़ा जनसैलाब, लालबागचा राजा और चिंचपोकलीचा चिंतामणि को विदाई
रिपोर्टर: ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
मुंबई। 12 दिवसीय गणेश उत्सव के समापन के बाद मुंबई में गणपति बप्पा की विदाई का सिलसिला लगातार जारी है। अनंत चतुर्दशी के अवसर पर शुरू हुई विसर्जन यात्राओं के बाद गिरगांव चौपाटी, दादर चौपाटी, जुहू चौपाटी और शहर के अन्य प्रमुख विसर्जन स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। ढोल-ताशों की गूंज, गुलाल और ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष के बीच श्रद्धालुओं ने गणेश प्रतिमाओं को विदाई दी।
गिरगांव चौपाटी पर भारी भीड़
मुंबई के सबसे प्रमुख विसर्जन स्थलों में शामिल गिरगांव चौपाटी पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ देखी गई। यहां बड़ी सार्वजनिक गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। गणेश मंडलों के कार्यकर्ता अपनी-अपनी प्रतिमाओं के साथ विसर्जन स्थल तक पहुंचे।
गिरगांव चौपाटी पर लालबागचा राजा के अंतिम दर्शन के लिए भी बड़ी संख्या में लोग जमा हुए। सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस की तैनाती की गई थी और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन की ओर से व्यवस्था की गई।
करीब 20 घंटे बाद गिरगांव पहुंचा लालबागचा राजा
मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा की विसर्जन यात्रा शुक्रवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे मंडप से शुरू हुई थी। लालबाग, भायखला और गिरगांव होते हुए प्रतिमा शनिवार सुबह करीब साढ़े छह बजे गिरगांव चौपाटी के आसपास पहुंची। यानी विसर्जन यात्रा को चौपाटी तक पहुंचने में लगभग 20 घंटे लगे।
लालबागचा राजा के गिरगांव पहुंचने की खबर के साथ ही बड़ी संख्या में गणेश भक्त चौपाटी पर जुट गए। भक्तों ने दर्शन किए और आरती के बाद बप्पा को अंतिम विदाई देने की तैयारी शुरू की।
समुद्र में ओहोटी के कारण विसर्जन में देरी
लालबागचा राजा के गिरगांव चौपाटी पहुंचने के बाद समुद्र में ओहोटी के कारण विसर्जन में कुछ समय की देरी हुई। रिपोर्टों के अनुसार, सुबह करीब 5:22 बजे समुद्र में ओहोटी थी और पानी का स्तर करीब 0.97 मीटर बताया गया।
समुद्र का जलस्तर कम होने के कारण बड़ी प्रतिमा को विसर्जन के लिए इस्तेमाल होने वाले तराफे तक ले जाना मुश्किल हो रहा था। प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से समुद्र में ले जाने के लिए पर्याप्त जलस्तर का इंतजार किया जा रहा था।
चिंचपोकलीचा चिंतामणि भी पहुंचा
गिरगांव चौपाटी पर लालबागचा राजा के साथ चिंचपोकलीचा चिंतामणि भी विसर्जन के लिए पहुंचा। इस प्रतिमा को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने विदाई दी।
रिपोर्टों के मुताबिक इस वर्ष चिंचपोकलीचा चिंतामणि की प्रतिमा करीब 24 फीट ऊंची थी और इसे तिरुपति बालाजी के स्वरूप से प्रेरित होकर दक्षिण भारतीय मंदिर शैली के प्रभाव के साथ तैयार किया गया था। विसर्जन स्थल पर ढोल-ताशों और जयघोष के बीच श्रद्धालुओं ने प्रतिमा को अंतिम विदाई दी।
सुबह से शुरू हुआ विसर्जन का सिलसिला
अनंत चतुर्दशी के दिन शुक्रवार सुबह से ही मुंबई के अलग-अलग हिस्सों में गणेश प्रतिमाओं की विसर्जन यात्राएं शुरू हो गई थीं। बड़ी प्रतिमाओं के साथ छोटी और घरेलू प्रतिमाओं को भी श्रद्धालु विभिन्न विसर्जन स्थलों तक लेकर पहुंचे।
गिरगांव चौपाटी के अलावा दादर चौपाटी, जुहू चौपाटी और मुंबई के विभिन्न कृत्रिम तालाबों एवं अन्य विसर्जन स्थलों पर भी प्रतिमाओं का विसर्जन जारी रहा।
भावुक माहौल में दी गई बप्पा को विदाई
गणेश विसर्जन के दौरान मुंबई की सड़कों पर उत्सव और भावुकता दोनों का माहौल दिखाई दिया। भक्त ढोल-ताशों के साथ प्रतिमाओं को लेकर निकले और रास्ते भर गणपति बप्पा के जयकारे लगाए।
गिरगांव चौपाटी पर भी श्रद्धालुओं ने फूलों और गुलाल के साथ गणेश प्रतिमाओं को विदाई दी। कई स्थानों पर श्रद्धालु विसर्जन से पहले आरती करते नजर आए।
सुरक्षा के भी किए गए इंतजाम
गिरगांव चौपाटी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई। पुलिस और प्रशासन की टीमें भीड़ प्रबंधन और विसर्जन प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में जुटी रहीं।
समुद्र में जलस्तर और ज्वार-भाटा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बड़े गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन में भी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया। लालबागचा राजा के विसर्जन के लिए भी समुद्र में उपयुक्त जलस्तर का इंतजार किया गया।
मुंबई में दूसरे दिन भी जारी रहा विसर्जन
मुंबई में गणेश विसर्जन की प्रक्रिया एक दिन में पूरी नहीं हुई। अनंत चतुर्दशी के बाद शनिवार को भी कई प्रमुख स्थानों पर बड़ी गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन जारी रहा। गिरगांव चौपाटी पर बड़े गणेश मंडलों की प्रतिमाओं के पहुंचने का सिलसिला चलता रहा।
लालबागचा राजा और चिंचपोकलीचा चिंतामणि के विसर्जन को देखने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग गिरगांव पहुंचे।
मुंबई में गणेश उत्सव के समापन के साथ ही भक्तों ने बप्पा को अगले वर्ष फिर आने का निमंत्रण देते हुए विदाई दी। शहर के प्रमुख विसर्जन स्थलों पर देर तक धार्मिक उत्सव और भीड़ का माहौल बना रहा।
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब
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