पेट्रोल पंप पर 10 लीटर पेट्रोल या डीजल भरवाते समय मशीन और डिस्प्ले पर 10 लीटर देखकर ज्यादातर ग्राहक मान लेते हैं कि उन्हें पूरी मात्रा मिल गई। लेकिन डिस्प्ले पर दिखाई गई मात्रा और वास्तव में वाहन की टंकी में पहुंचे ईंधन की मात्रा में अंतर हो सकता है। इसी तरह की गड़बड़ियों की जांच के लिए पेट्रोल पंपों पर कैलिब्रेशन और माप की जांच की जाती है।
कर्नाटक में हाल ही में हुई जांच में पेट्रोल और डीजल की मात्रा से जुड़ी ऐसी गड़बड़ियां सामने आई हैं। लीगल मेट्रोलॉजी विभाग ने राज्य के 5,946 पेट्रोल पंपों में से 805 पंपों की जांच की। इनमें 768 पंपों को दोबारा कैलिब्रेशन की जरूरत पाई गई, जबकि 101 पंपों पर अनुमत सीमा से अधिक गड़बड़ी मिलने के बाद मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में कुल 6.66 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
क्या होता है पेट्रोल पंप कैलिब्रेशन?
कैलिब्रेशन का मतलब यह जांचना है कि डिस्पेंसिंग मशीन जितनी मात्रा दिखा रही है, वास्तव में उतना ही ईंधन ग्राहक को मिल रहा है या नहीं।
उदाहरण के लिए, अगर मशीन पर 10 लीटर पेट्रोल दिख रहा है तो माप की जांच यह सुनिश्चित करने के लिए होती है कि वास्तविक मात्रा निर्धारित मानक के अनुरूप है। समय के साथ मशीन के तकनीकी हिस्सों में बदलाव या खराबी के कारण माप में अंतर आ सकता है। इसलिए पेट्रोल पंप की डिस्पेंसिंग यूनिट की नियमित जांच जरूरी होती है।
10 लीटर में कितनी कमी को गड़बड़ी माना जाता है?
हर छोटा अंतर अपने आप में कानूनी कार्रवाई का आधार नहीं बनता। माप में एक निर्धारित अनुमत सीमा होती है।
कर्नाटक की हालिया जांच में अधिकारियों ने बताया कि 10 लीटर पर 50 मिलीलीटर से ज्यादा की त्रुटि को अनुमत सीमा से बाहर माना गया। ऐसी स्थिति में संबंधित पंप के खिलाफ कार्रवाई की गई।
इसका मतलब यह है कि अगर जांच में डिस्पेंसिंग यूनिट निर्धारित सहनशीलता सीमा से ज्यादा कम या ज्यादा ईंधन देती पाई जाती है, तो मामला नियमों के तहत कार्रवाई योग्य हो सकता है।
कर्नाटक में क्या मिला?
‘मिशन निखरा’ के तहत लीगल मेट्रोलॉजी विभाग ने आठ दिनों में राज्य के अलग-अलग जिलों में 805 पेट्रोल और डीजल पंपों की जांच की। इनमें 768 पंपों में कैलिब्रेशन की समस्या पाई गई।
वहीं 101 पंप ऐसे मिले जहां ईंधन की मात्रा में अंतर अनुमत सीमा से ज्यादा था। इन पंपों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए और कुल 6.66 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
अधिकारियों के मुताबिक जांच का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहक को न कम ईंधन मिले और न ही माप में ऐसी गड़बड़ी हो जिससे वितरण की सटीकता प्रभावित हो।
बार-बार गड़बड़ी मिली तो पंप बंद हो सकता है
कर्नाटक के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रिजवान अरशद ने कहा है कि जिन पेट्रोल पंपों पर बार-बार नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। बार-बार सटीक मात्रा देने में विफल रहने वाले पंपों को बंद करने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।
राज्य सरकार ने पेट्रोल पंपों की जांच और सत्यापन प्रक्रिया को भी मजबूत करने की बात कही है। विभाग हर पंप की सत्यापन और स्टांपिंग से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए ऑनलाइन डैशबोर्ड शुरू करने की तैयारी कर रहा है।
पेट्रोल पंप पर शक हो तो ग्राहक क्या करे?
अगर आपको लगता है कि पेट्रोल या डीजल की मात्रा कम दी गई है, तो आप तुरंत पेट्रोल पंप पर ही इसकी जांच की मांग कर सकते हैं।
इसके लिए पेट्रोल पंप पर उपलब्ध निर्धारित माप उपकरण से ईंधन की मात्रा की जांच कराई जा सकती है। कर्नाटक सरकार के मुताबिक, उपभोक्ताओं को संदेह होने पर पंप पर निर्धारित माप उपकरण से मात्रा सत्यापित कराने की सुविधा दी जानी चाहिए।
किसी तरह की शिकायत होने पर ग्राहक संबंधित लीगल मेट्रोलॉजी विभाग से भी संपर्क कर सकता है। कर्नाटक में इसके लिए 1800 599 1100 टोल-फ्री हेल्पलाइन और विभागीय ईमेल के जरिए शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था बताई गई है।
पेट्रोल भरवाते समय इन बातों का रखें ध्यान
ईंधन भरवाने से पहले मीटर को शून्य पर देखना जरूरी है। ग्राहक को यह भी देखना चाहिए कि मशीन पर दिखाई जा रही मात्रा और कीमत उसके अनुरोध के मुताबिक है।
अगर मात्रा को लेकर संदेह हो तो मौके पर ही माप की जांच कराने को कहें। विवाद की स्थिति में पेट्रोल पंप की रसीद संभालकर रखना और शिकायत के लिए पंप का नाम, स्थान तथा संबंधित डिस्पेंसिंग मशीन की जानकारी नोट करना उपयोगी हो सकता है।
कर्नाटक में सामने आए मामलों ने यह सवाल फिर सामने ला दिया है कि पेट्रोल पंपों पर डिस्पेंसिंग मशीनों की नियमित जांच और सही कैलिब्रेशन क्यों जरूरी है। अधिकारियों के मुताबिक, सटीक माप सुनिश्चित करना उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए जरूरी है।
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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