प्रशांत किशोर का बिहार सरकार पर निशाना, बोले- जनता के पास व्यवस्था को जवाबदेह बनाने का मौका
पटना। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार में सरकार और मौजूदा व्यवस्था की जवाबदेही को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हर छह महीने या हर साल जनता के पास ऐसा मौका आता है, जब वह सरकार और व्यवस्था को जवाबदेह ठहरा सकती है। भले ही इस प्रक्रिया से तुरंत सरकार न गिरे या व्यवस्था में तत्काल बदलाव न हो, लेकिन जनता की ओर से दिया गया मजबूत संदेश सत्ता में बैठे लोगों पर दबाव बना सकता है।
प्रशांत किशोर ने कहा कि लोकतंत्र में जनता की भूमिका केवल मतदान करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। लोगों को अपने अधिकारों, समस्याओं और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर जागरूक रहना चाहिए। जब जनता सवाल पूछती है और अपनी अपेक्षाएं स्पष्ट करती है, तो सरकार और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही बढ़ती है।
रोजगार और रेत खनन के मुद्दे पर जताई चिंता
प्रशांत किशोर ने बिहार में रोजगार की कमी और रेत खनन से जुड़े संकट जैसे मुद्दों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। उनके मुताबिक, राज्य के विकास और आम लोगों के जीवन में सुधार के लिए इन मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे चुनाव के समय केवल जाति और धर्म के आधार पर फैसला न करें। लोगों को रोजगार, शिक्षा, विकास और स्थानीय समस्याओं को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने मुफ्त राशन जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि मतदाताओं को तात्कालिक लाभ के साथ-साथ अपने बच्चों के भविष्य और राज्य की आर्थिक स्थिति पर भी विचार करना चाहिए।
OBC और EBC युवाओं की शिक्षा पर उठाए सवाल
प्रशांत किशोर ने बिहार में शिक्षा की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के केवल 9 प्रतिशत युवा 12वीं कक्षा तक पढ़ाई पूरी कर पाते हैं। उन्होंने अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के युवाओं की शिक्षा से जुड़ी स्थिति का भी उल्लेख किया।
उनके बयान के अनुसार, शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े वर्गों के सामने मौजूद चुनौतियों पर ध्यान देना जरूरी है। बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, उनके द्वारा बताए गए आंकड़ों के स्रोत और अध्ययन का आधार स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जाना जरूरी है।
जाति-धर्म से ऊपर उठकर मतदान करने की अपील
प्रशांत किशोर ने कहा कि मतदाताओं को चुनाव के समय ऐसे मुद्दों पर विचार करना चाहिए, जिनका सीधा संबंध उनके जीवन और भविष्य से है। रोजगार, शिक्षा, विकास और सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचना जैसे सवाल चुनावी चर्चा का हिस्सा होने चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की जागरूकता महत्वपूर्ण है। यदि मतदाता अपने अधिकारों को समझकर सवाल पूछते हैं, तो सरकार और जनप्रतिनिधियों पर जनता के प्रति जवाबदेह बने रहने का दबाव बढ़ता है।
सरकार को जवाबदेह बनाने पर जोर
प्रशांत किशोर के बयान का मुख्य संदेश यह है कि जनता को सरकार के कामकाज पर नजर रखनी चाहिए और अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठानी चाहिए। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में जनता की भागीदारी व्यवस्था को जवाबदेह बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
रोजगार की कमी, रेत खनन और शिक्षा जैसे मुद्दों को उठाते हुए उन्होंने लोगों से जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनता की ओर से दिया गया मजबूत संदेश भले ही तत्काल राजनीतिक बदलाव न लाए, लेकिन इससे सत्ता में बैठे लोगों को जनता की अपेक्षाओं का एहसास कराया जा सकता है।
निष्कर्ष: प्रशांत किशोर ने बिहार में शिक्षा, रोजगार और सरकारी जवाबदेही को प्रमुख मुद्दा बताते हुए मतदाताओं से जागरूक रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जनता को जाति और धर्म से आगे बढ़कर अपने भविष्य और विकास से जुड़े सवालों को महत्व देना चाहिए।

