संभल हिंसा के आरोपी मुल्ला अफरोज 20 महीने बाद जेल से रिहा, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया NSA
संभल। संभल हिंसा के आरोपी मोहम्मद अफरोज उर्फ मुल्ला अफरोज करीब 20 महीने 10 दिन जेल में बिताने के बाद मंगलवार देर रात मुरादाबाद जेल से रिहा होकर अपने घर पहुंच गए। उनकी रिहाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत की गई हिरासत को रद्द किए जाने के बाद हुई। शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
सुप्रीम कोर्ट ने NSA हिरासत की रद्द
मुल्ला अफरोज को संभल में 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा के मामले में आरोपी बनाया गया था। उन्हें 17 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था। बाद में 13 अक्टूबर 2025 को उनके खिलाफ NSA के तहत निवारक हिरासत का आदेश जारी किया गया था। उस समय वह पहले से न्यायिक हिरासत में थे।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने NSA के तहत उनकी हिरासत को रद्द कर दिया। अदालत ने माना कि पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे को अकेले निवारक हिरासत का आधार नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने हिरासत आदेश को रद्द करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये की लागत भी लगाई।
घर पहुंचने पर परिवार में खुशी का माहौल
जेल से बाहर आने के बाद मुल्ला अफरोज ने मीडिया से बातचीत में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि जेल में बिताए 20 महीने 10 दिन उनके लिए बेहद मुश्किल रहे। उनके मुताबिक, इस दौरान परिवार को आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ा और बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी उनके बड़े भाई ने संभाली।
अफरोज के घर लौटने पर परिवार और आसपास के लोगों में खुशी का माहौल देखने को मिला। उन्होंने कहा कि बच्चों की यादें जेल में उनके लिए सहारा बनी रहीं।
भाई ने निष्पक्ष जांच की मांग की
अफरोज के भाई शहरोज ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जताई। उन्होंने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। परिवार का कहना है कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा था और इसी भरोसे के कारण वे कानूनी लड़ाई लड़ते रहे।
इससे पहले परिवार की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निष्पक्ष बताया गया था।
आपराधिक मामलों में नहीं मिली राहत
हालांकि NSA के तहत हिरासत रद्द होने के बाद मुल्ला अफरोज जेल से बाहर आ गए हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनके खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामले खत्म हो गए हैं।
संभल के जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला NSA की निवारक हिरासत से संबंधित है। आपराधिक मुकदमों में अफरोज को कोई राहत नहीं मिली है। उनके खिलाफ लंबित मामलों की सुनवाई जिला अदालत में जारी है।
जिला शासकीय अधिवक्ता के मुताबिक, हिंसा से जुड़े मामलों में अन्य आरोपी भी हैं और अदालत में गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपियों के बयान दर्ज किए जाने की कार्रवाई होनी है।
पहले हाईकोर्ट ने खारिज की थी याचिका
मुल्ला अफरोज ने NSA की कार्रवाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जून 2026 में हाईकोर्ट ने उनकी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज करते हुए NSA के तहत हिरासत को बरकरार रखा था। इसके बाद अफरोज ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट ने बाद में हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए NSA के तहत हिरासत रद्द कर दी। अदालत के फैसले के बाद ही उनकी जेल से रिहाई का रास्ता साफ हुआ।
2024 की संभल हिंसा से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला नवंबर 2024 में संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है। घटना के दौरान चार लोगों की मौत हुई थी। पुलिस ने हिंसा के मामले में कई लोगों को आरोपी बनाया था।
मुल्ला अफरोज पर भी हिंसा से जुड़े कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस और अभियोजन पक्ष की ओर से उनके खिलाफ अलग-अलग आरोप लगाए गए हैं, जबकि अफरोज की ओर से इन आरोपों को चुनौती दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से फिलहाल उन्हें NSA की निवारक हिरासत से राहत मिली है, जबकि उनके खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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