संजीव बालियान ने योगी से रिश्ते, बुलडोजर मॉडल और पश्चिमी यूपी पर खुलकर की बात, 2024 की हार पर भी बोले
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच पश्चिमी यूपी की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने ‘यूपी तक’ के पॉडकास्ट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ अपने रिश्तों, उत्तर प्रदेश के बुलडोजर मॉडल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की मांग और 2024 के लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर से मिली हार को लेकर विस्तार से बात की।
बालियान ने कहा कि एक समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उनके काफी अच्छे संबंध थे, लेकिन बाद में दोनों के बीच पहले जैसी नजदीकी नहीं रही। उन्होंने इस दूरी पर मशहूर शेर का हवाला देते हुए कहा, “कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, वरना यूं ही कोई बेवफा नहीं होता।”
योगी आदित्यनाथ से रिश्तों पर क्या बोले बालियान?
संजीव बालियान ने बताया कि 2014 से 2017 के बीच संसद में उनकी सीट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सीट के आगे-पीछे थी। इस दौरान दोनों के बीच करीबी संबंध थे और कई मुद्दों पर बातचीत होती थी।
बालियान ने 2015 की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय वह केंद्र में मंत्री थे और योगी आदित्यनाथ सांसद थे। योगी ने उन्हें अपने संसदीय क्षेत्र गोरखपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया था। यह कार्यक्रम गोरखनाथ मठ से जुड़े एक कॉलेज में आयोजित हुआ था।
उन्होंने कहा कि 2017 में जब योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो उन्हें खुशी हुई। हालांकि, बाद में पहले की तरह उनका मुख्यमंत्री से मिलना-जुलना नहीं रहा। बालियान ने कहा कि योगी आदित्यनाथ अब देश के बड़े नेताओं में शामिल हैं और उनके साथ अपनी तुलना करना उचित नहीं है।
बुलडोजर मॉडल पर बालियान की अलग राय
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की पहचान से जुड़े बुलडोजर मॉडल को लेकर भी संजीव बालियान ने अपनी निजी राय रखी। उन्होंने कहा कि कानून को अपना काम करना चाहिए, लेकिन उन्हें बुलडोजर का महिमामंडन पसंद नहीं है।
बालियान ने कहा कि वह व्यक्तिगत तौर पर बुलडोजर को शक्ति प्रदर्शन के तौर पर पेश किए जाने के पक्ष में नहीं हैं। उनके मुताबिक, हर मुद्दे पर लोगों की अलग-अलग राय हो सकती है और यह उनकी व्यक्तिगत राय है।
उन्होंने ‘बुलडोजर बाबा’ जैसे संबोधन का जिक्र करते हुए कहा कि यह तय करना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विषय है कि उन्हें किस नाम से जाना जाए।
पश्चिमी यूपी को अलग राज्य बनाने की मांग
संजीव बालियान ने एक बार फिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि पश्चिमी यूपी के लोगों को प्रशासनिक और न्यायिक सुविधाओं के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
बालियान ने अपने गांव से इलाहाबाद हाईकोर्ट की दूरी का उदाहरण देते हुए कहा कि यह करीब 750 किलोमीटर है। उन्होंने पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच और एम्स जैसी सुविधाओं की जरूरत का भी मुद्दा उठाया।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की मांग बालियान पहले भी उठा चुके हैं। 2023 में उन्होंने मेरठ को प्रस्तावित पश्चिमी राज्य की राजधानी बनाने की बात कही थी।
2027 चुनाव पर क्या बोले?
2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर संजीव बालियान ने कहा कि उनका फिलहाल लखनऊ की राजनीति में जाने का कोई इरादा नहीं है और वह केंद्र की राजनीति में सहज हैं।
उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव को कांटे की टक्कर वाला मुकाबला बताया। बालियान ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता अमित शाह और राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों नेताओं को उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों और जातिगत समीकरणों की गहरी समझ है। उन्होंने कहा कि यदि दोनों नेता चुनाव की कमान संभालते हैं तो पार्टी के लिए चुनावी रणनीति बनाना आसान होगा।
संगीत सोम से रिश्तों पर भी बोले
पश्चिमी यूपी की राजनीति में संजीव बालियान और बीजेपी के पूर्व विधायक संगीत सोम के बीच मतभेद की चर्चा लंबे समय से होती रही है। पॉडकास्ट में बालियान ने इस रिश्ते और 2024 के लोकसभा चुनाव के संदर्भ में भी बात की।
उन्होंने कहा कि अब किसकी कितनी गलती थी, इसका विश्लेषण करने वाले बहुत लोग हैं। बालियान ने कहा कि वह जन्मजात बीजेपी कार्यकर्ता हैं और उन्होंने कभी पार्टी को नुकसान पहुंचाने का काम नहीं किया।
उनके मुताबिक, पार्टी के भीतर नेताओं के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन वह पार्टी के खिलाफ काम नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि बीजेपी जिसे भी चुनाव मैदान में उतारेगी, वह उसके खिलाफ काम नहीं करेंगे।
2022 में संगीत सोम के लिए प्रचार का दावा
संगीत सोम को 2022 के विधानसभा चुनाव में हराने के लिए उनके खिलाफ काम करने के आरोपों पर बालियान ने कहा कि उन्होंने ऐसा नहीं किया था। उनका दावा है कि 2022 के चुनाव में उन्होंने सरधना विधानसभा क्षेत्र में संगीत सोम के पक्ष में काफी समय बिताया था।
बालियान ने कहा कि उनके समाज का ऐसा कोई गांव नहीं था, जहां उन्होंने वोट मांगने के लिए दौरा न किया हो। उन्होंने इसे अपनी ओर से सकारात्मक प्रयास बताया।
2024 में मुजफ्फरनगर से हार पर क्या कहा?
2024 के लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर सीट पर मिली हार को लेकर भी संजीव बालियान ने खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि किसी भी चुनाव में हार का एक ही कारण नहीं होता।
बालियान ने राजपूत समाज की पंचायतों और बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार की मौजूदगी को चुनावी नतीजे को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल बताया। साथ ही उन्होंने अपनी ओर से हुई कमियों को भी स्वीकार किया।
उन्होंने कहा कि वह करीब 24 हजार वोटों के अंतर से चुनाव हारे थे और अगर समय पर राजनीतिक प्रबंधन किया जाता तो नतीजे अलग हो सकते थे। उन्होंने यह भी कहा कि 10 साल मंत्री रहने के बाद उनमें कुछ कमियां रही होंगी और जनता ने उन्हें उसका आईना दिखाया।
पश्चिमी यूपी में चुनावी राजनीति पर बढ़ा फोकस
2027 विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीजेपी और विपक्षी दलों की गतिविधियां तेज हो रही हैं। हाल के दिनों में बीजेपी ने भी पश्चिमी यूपी में संगठनात्मक गतिविधियों पर जोर बढ़ाया है। क्षेत्र में कानून-व्यवस्था, विकास, किसान, जातीय समीकरण और सामाजिक गठजोड़ जैसे मुद्दे राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं।
ऐसे समय में संजीव बालियान के बयान को पश्चिमी यूपी की राजनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने अपने बयानों में कई मुद्दों को अपनी व्यक्तिगत राय के तौर पर रखा है। 2027 के विधानसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुद्दे और स्थानीय राजनीतिक समीकरण किस तरह आकार लेते हैं, यह आने वाले महीनों में और स्पष्ट होगा।

