सपा-कांग्रेस गठबंधन यूपी 2027: सीट शेयरिंग पर फंसा पेंच, बृजभूषण बोले- अखिलेश के बिना सब सूना
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर सीट शेयरिंग का मुद्दा लगातार चर्चा में है। दोनों दलों के नेताओं की ओर से अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं और सीटों की संख्या को लेकर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है। इसी बीच पूर्व बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को लेकर टिप्पणी की है। सीट बंटवारे से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, “अखिलेश के बिना सब सूना है।” उनका यह बयान सामने आने के बाद यूपी की सियासत में इस मुद्दे पर चर्चा और तेज हो गई है।
सीट शेयरिंग को लेकर क्या है विवाद?
यूपी में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं। आगामी चुनाव को लेकर कांग्रेस और सपा के बीच सीटों के बंटवारे पर बातचीत चल रही है। Aaj Tak की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस की ओर से करीब 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग सामने आई है, जबकि सपा की ओर से कम सीटों पर समझौते की चर्चा है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से सपा के करीब 85 से 90 सीटें देने के पक्ष में होने की बात कही गई है। हालांकि, दोनों दलों के बीच अंतिम सीट शेयरिंग फॉर्मूला अभी तय नहीं हुआ है।
कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने भी कहा है कि पार्टी कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। वहीं, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से सीटों की संख्या के बजाय उम्मीदवार की जीतने की क्षमता को महत्व देने की बात सामने आई है।
अखिलेश यादव का क्या रुख है?
सीट शेयरिंग को लेकर अखिलेश यादव का रुख यह बताया गया है कि केवल सीटों की संख्या मांगने के बजाय कांग्रेस को अपने संभावित उम्मीदवारों की जानकारी देनी चाहिए। Aaj Tak की रिपोर्ट के अनुसार, अखिलेश का संदेश है कि उम्मीदवार की जीतने की क्षमता के आधार पर सीटों पर फैसला होना चाहिए।
इससे संकेत मिलता है कि सपा सीटों के बंटवारे में उम्मीदवारों की स्थानीय स्थिति और चुनावी क्षमता को भी आधार बनाना चाहती है। दूसरी तरफ कांग्रेस अपनी संगठनात्मक मौजूदगी और चुनावी तैयारी के आधार पर अधिक सीटों पर दावेदारी कर रही है।
रायबरेली-अमेठी की सीटों पर भी खींचतान
सीट शेयरिंग को लेकर रायबरेली और अमेठी क्षेत्र की कुछ विधानसभा सीटों का मुद्दा भी चर्चा में है। Aaj Tak के मुताबिक, ऊंचाहार और हरचंदपुर जैसी सीटों को लेकर दोनों दलों के बीच खींचतान की स्थिति है।
इन सीटों को लेकर दोनों पार्टियों की स्थानीय राजनीतिक स्थिति और संभावित उम्मीदवारों पर बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, अंतिम फॉर्मूला तय होने तक सीटों को लेकर किए जा रहे दावों में बदलाव संभव है।
बृजभूषण शरण सिंह ने क्या कहा?
दिल्ली में पत्रकारों ने जब बृजभूषण शरण सिंह से यूपी में सपा-कांग्रेस गठबंधन और सीट शेयरिंग को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने अखिलेश यादव का जिक्र करते हुए कहा, “अखिलेश के बिना सब सूना है।” Aaj Tak के मुताबिक, उन्होंने सीट शेयरिंग का कोई विस्तृत फॉर्मूला नहीं बताया। उनकी टिप्पणी को रिपोर्ट में राजनीतिक तंज के तौर पर पेश किया गया है।
बृजभूषण शरण सिंह भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद हैं और उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब सपा और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है।
कांग्रेस का 150 सीटों पर दावा
कांग्रेस की ओर से उत्तर प्रदेश में 150 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की बात सार्वजनिक रूप से कही गई है। यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा है कि पार्टी अक्टूबर के भीतर सीट शेयरिंग की बातचीत पूरी करने की कोशिश करेगी।
कांग्रेस की ओर से पूरे प्रदेश में संगठन मजबूत करने और संभावित उम्मीदवारों की तैयारी पर भी जोर दिया जा रहा है। पार्टी की ओर से यह भी कहा गया है कि वह सभी 403 विधानसभा सीटों पर संगठनात्मक तैयारी कर रही है, हालांकि गठबंधन की स्थिति में सीटों का अंतिम बंटवारा अलग विषय होगा।
सपा ने 350 सीटों पर तैयारी की बात कही
दूसरी तरफ, टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अखिलेश यादव ने पार्टी की एक बैठक में उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से करीब 350 सीटों पर तैयारी बढ़ाने की बात कही। यह बयान कांग्रेस के 150 सीटों पर चुनाव लड़ने के दावे के बाद सामने आया।
हालांकि, किसी पार्टी द्वारा अधिक सीटों पर संगठनात्मक तैयारी करने का मतलब अपने आप यह नहीं है कि गठबंधन में उसे उतनी ही सीटें मिलेंगी। सीट शेयरिंग का अंतिम फैसला दोनों दलों के बीच बातचीत के बाद ही स्पष्ट होगा।
अखिलेश आज INDIA गठबंधन की बैठक में नहीं
30 सितंबर को दिल्ली में विपक्षी INDIA गठबंधन की बैठक भी प्रस्तावित थी। अखिलेश यादव ने इसमें शामिल नहीं होने की जानकारी दी थी और उनकी जगह सपा के वरिष्ठ नेताओं के प्रतिनिधिमंडल के शामिल होने की बात सामने आई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अखिलेश ने अपनी अनुपस्थिति की वजह अन्य व्यस्तता बताई थी।
ऐसे समय में जब सपा-कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर बातचीत चल रही है, दोनों दलों के नेताओं की बयानबाजी पर भी राजनीतिक नजरें बनी हुई हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सपा और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग का अंतिम फॉर्मूला सार्वजनिक नहीं हुआ है। कांग्रेस 150 या उससे अधिक सीटों पर अपनी दावेदारी जता रही है, जबकि सपा की ओर से उम्मीदवार की जीतने की क्षमता और सीट-दर-सीट आकलन को महत्व देने की बात सामने आई है।
आने वाले दौर की बातचीत में यह तय होना है कि दोनों दल कितनी सीटों पर समझौता करते हैं और किन विधानसभा क्षेत्रों में किस पार्टी का उम्मीदवार मैदान में उतरेगा। फिलहाल बृजभूषण शरण सिंह की “अखिलेश के बिना सब सूना है” वाली टिप्पणी ने इस सीट शेयरिंग विवाद के बीच राजनीतिक चर्चा को नया विषय जरूर दे दिया है।
रिपोर्टर; सतविंदर, कौर मुख्य संवाददाता हरियाणा
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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