सपा के तीसरा उम्मीदवार न उतारने पर राजभर का तंज- ‘टांय-टांय फिस्स’, RLD ने भी दिलाई 9 विधायकों की याद
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने के फैसले के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के इस फैसले पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने तंज कसा है। वहीं, जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोकदल (RLD) ने भी सपा को उसके सहयोगियों और अपने 9 विधायकों की ताकत की याद दिलाई है।
राजभर बोले- ‘अखिलेश जी, टांय-टांय फिस्स’
ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अब मामला ‘टांय-टांय फिस्स’ हो गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कभी-कभी ही सही, अखिलेश यादव समझदारी का काम कर लेते हैं और आज उन्होंने ऐसा ही किया है।
राजभर ने अखिलेश यादव के उस बयान पर भी चुटकी ली, जिसमें सपा प्रमुख ने कहा था कि अब उनकी नजर राज्यसभा की तीन सीटों पर नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर है। राजभर ने 403 के लक्ष्य को लेकर कहा कि सपने देखना बुरी बात नहीं है। इस बयान के जरिए उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा की सत्ता में वापसी के दावे पर भी निशाना साधा।
अखिलेश ने कहा- तीन नहीं, 403 पर नजर
दरअसल, राज्यसभा चुनाव में तीसरा उम्मीदवार उतारने को लेकर कई दिनों से सियासी चर्चा चल रही थी। सपा ने नामांकन पत्र भी खरीदे थे और पार्टी की ओर से यह संकेत दिए जा रहे थे कि पर्याप्त संख्या बल जुटने पर तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारा जा सकता है।
हालांकि, नामांकन की अंतिम तारीख तक सपा ने तीसरा प्रत्याशी नहीं उतारा। इसके बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है।’ उनके इस बयान को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
वर्तमान विधानसभा गणित में सपा के पास दो राज्यसभा सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल है, लेकिन तीसरी सीट के लिए जरूरी 111 प्रथम वरीयता वोट जुटाना उसके लिए चुनौतीपूर्ण था। एक राज्यसभा सीट के लिए 37 विधायकों के वोट की जरूरत है। सपा के पास दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या है, लेकिन तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना जरूरी था।
RLD ने भी सपा पर साधा निशाना
राज्यसभा चुनाव में सपा के तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने के फैसले पर राष्ट्रीय लोकदल ने भी प्रतिक्रिया दी। RLD ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में अपने 9 विधायकों की संख्या का जिक्र करते हुए सपा पर तंज कसा। पार्टी की ओर से कहा गया कि राजनीति में केवल विधायकों की संख्या ही नहीं, बल्कि मुश्किल समय में साथ खड़े रहने वाले सहयोगियों की ताकत भी महत्वपूर्ण होती है।
RLD की ओर से यह भी दावा किया गया कि उसके समर्थन के बिना सपा राज्यसभा में अपना एक और उम्मीदवार भेजने की स्थिति में नहीं पहुंच सकी। पार्टी ने कहा कि अब सपा कार्यकर्ताओं को भी समझ आ गया होगा कि राष्ट्रीय लोकदल चौधरी चरण सिंह की विचारधारा पर चलने वाला दल है।
RLD का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सहयोगी दलों की भूमिका को लेकर राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। राज्यसभा चुनाव के बहाने सहयोगी दलों के बीच शक्ति प्रदर्शन भी देखने को मिल रहा है।
तीसरे उम्मीदवार के लिए नहीं जुट पाया जरूरी समर्थन
सपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए जरूरी संख्या बल जुटाने की थी। रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी ने संभावित तीसरे उम्मीदवार के लिए तैयारी भी की थी, लेकिन बीजेपी के भीतर से पर्याप्त विधायकों के समर्थन की संभावना नहीं बन सकी। पिछली बार सपा से बगावत कर बीजेपी के पक्ष में वोट करने वाले कुछ विधायकों से भी उम्मीदें थीं, लेकिन अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।
इसके अलावा RLD के विधायक भी अपनी पार्टी के साथ बने रहे। ऐसे में सपा के लिए तीसरी सीट का चुनाव लड़ना जोखिम भरा हो सकता था। क्रॉस वोटिंग की स्थिति में पार्टी को राजनीतिक नुकसान होने की आशंका भी थी। यही वजह है कि अखिलेश यादव ने तीसरे उम्मीदवार के बजाय 2027 के विधानसभा चुनाव पर फोकस करने का फैसला किया।
बीजेपी के 8 और सपा के 2 उम्मीदवार
सपा के तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने के बाद उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर बीजेपी के आठ और सपा के दो उम्मीदवार मैदान में हैं। ऐसे में सभी उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की स्थिति बन गई है, बशर्ते नामांकन पत्र जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया में कोई बदलाव न हो। राज्यसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में मतदान 16 अक्टूबर को निर्धारित है।
सपा की ओर से प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी उम्मीदवार हैं। बीजेपी ने आठ उम्मीदवार उतारे हैं। तीसरे उम्मीदवार से पीछे हटने के बाद अब राज्यसभा चुनाव की बजाय 2027 का विधानसभा चुनाव सपा और बीजेपी के बीच अगली बड़ी राजनीतिक लड़ाई के रूप में सामने आ रहा है।
2027 के लिए शुरू हुआ नया सियासी संदेश
अखिलेश यादव का 403 सीटों वाला बयान और उसके बाद ओम प्रकाश राजभर का तंज इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति अब तेजी से 2027 विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रही है। एक तरफ सपा अपने संगठन और सहयोगियों को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी के सहयोगी दल सपा के खिलाफ राजनीतिक हमले तेज कर रहे हैं।
राज्यसभा की तीसरी सीट का चुनाव न लड़ने का सपा का फैसला फिलहाल संख्या बल के लिहाज से व्यावहारिक कदम माना जा रहा है। लेकिन इस फैसले ने सहयोगी दलों के बीच शक्ति संतुलन और 2027 के चुनावी गठबंधन को लेकर नई राजनीतिक बहस जरूर छेड़ दी है।
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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