Shamli News: 16 बीघा जमीन विवाद में किसान के बेटे आदित्य ने अधिकारियों के सामने खुद को आग लगाई
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शामली के गोहरनी गांव में 16 बीघा जमीन को लेकर 2010 से विवाद चल रहा है। राजस्व अधिकारियों और पुलिस की मौजूदगी में किसान के बेटे आदित्य ने अपने ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली।
Shamli News: उत्तर प्रदेश के शामली जिले से जमीन विवाद से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। गोहरनी गांव निवासी किसान के बेटे आदित्य ने राजस्व अधिकारियों और पुलिस की मौजूदगी में अपने ऊपर मिट्टी का तेल डालकर खुद को आग लगा ली। घटना के बाद मौके पर मौजूद अधिकारियों और पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया।
बताया जा रहा है कि परिवार में 16 बीघा जमीन को लेकर साल 2010 से विवाद चला आ रहा है। लंबे समय से चल रहे इस विवाद को लेकर कई बार प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर कार्रवाई हुई, लेकिन विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।
16 बीघा जमीन को लेकर 2010 से विवाद
गोहरनी गांव में 16 बीघा जमीन को लेकर परिवार के सदस्यों के बीच वर्ष 2010 से विवाद बताया जा रहा है। जमीन के बंटवारे और कब्जे को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था।
मामला आगे बढ़ने के बाद इसे प्रशासन और अदालत तक ले जाया गया। वर्ष 2013 में इस मामले में फैसला भी आया था। इसके बाद जमीन पर कब्जे और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े विवाद को लेकर स्थिति बनी रही।
परिवार की ओर से लगातार जमीन पर अपने अधिकार का दावा किया जाता रहा। इसी विवाद के बीच प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची थी।
राजस्व अधिकारियों और पुलिस की मौजूदगी में उठाया कदम
मामले को लेकर जब राजस्व अधिकारी और पुलिस मौके पर मौजूद थे, उसी दौरान आदित्य ने कथित तौर पर अपने ऊपर मिट्टी का तेल डाल लिया।
मौके पर मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले उसने खुद को आग लगा ली। घटना के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई। अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने तत्काल उसे बचाने की कोशिश की।
इस घटना के बाद आदित्य को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। उसकी हालत और इलाज से जुड़ी विस्तृत जानकारी संबंधित अधिकारियों की ओर से जांच के बाद सामने आने की उम्मीद है।
लंबे विवाद के बाद बढ़ा तनाव
बताया जा रहा है कि जमीन का यह विवाद करीब 16 साल पुराना है। वर्ष 2010 से चले आ रहे विवाद में कई बार दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति बनी।
2013 में फैसला आने के बाद भी जमीन के कब्जे और अन्य राजस्व मामलों को लेकर विवाद जारी रहा। स्थानीय स्तर पर मामले को सुलझाने के प्रयास भी किए गए, लेकिन विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ।
आदित्य के इस कदम को इसी लंबे समय से चले आ रहे जमीन विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, उसने ऐसा कदम क्यों उठाया, इसके पीछे की पूरी वजह प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
प्रशासन कर रहा मामले की जांच
घटना के बाद प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने मामले की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। राजस्व रिकॉर्ड, जमीन से जुड़े पुराने फैसले और दोनों पक्षों के दावों की भी जांच की जा सकती है।
अधिकारियों का फोकस यह पता लगाने पर है कि 16 बीघा जमीन का विवाद इतने वर्षों से क्यों लंबित रहा और 2013 के फैसले के बाद भी स्थिति सामान्य क्यों नहीं हो सकी।
मौके पर मौजूद लोगों से भी घटना के संबंध में जानकारी ली जा रही है।
जमीन विवाद ने खड़े किए सवाल
यह मामला एक बार फिर लंबे समय तक चलने वाले जमीन विवादों को लेकर सवाल खड़े करता है। ग्रामीण इलाकों में जमीन और संपत्ति के विवाद कई बार वर्षों तक चलते रहते हैं। ऐसे मामलों में राजस्व रिकॉर्ड, कब्जे और अदालत के आदेश को लेकर पक्षों के बीच विवाद बना रहता है।
गोहरनी गांव का यह मामला भी करीब डेढ़ दशक से अधिक समय से चल रहा बताया जा रहा है। अब आदित्य द्वारा अधिकारियों की मौजूदगी में उठाए गए कदम के बाद प्रशासन के सामने इस विवाद को लेकर स्थिति और गंभीर हो गई है।
रिपोर्टर; जसलीन कौर, मुख्य प्रबंधक

