MP News: शाजापुर में काले हिरणों को बचाने के लिए दक्षिण अफ्रीका की बोमा तकनीक, कुनो नेशनल पार्क में होगा सुरक्षित स्थानांतरण
शाजापुर, मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के शुजालपुर अंचल में खेतों में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले काले हिरणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए वन विभाग ने विशेष रेस्क्यू अभियान शुरू किया है। इस अभियान में दक्षिण अफ्रीका की आधुनिक ‘बोमा तकनीक’ का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य हिरणों को बिना चोट पहुंचाए पकड़ना और उन्हें सुरक्षित तरीके से कुनो नेशनल पार्क में स्थानांतरित करना है।
इस अभियान में दक्षिण अफ्रीका की विशेषज्ञ संस्था ‘कंजर्वेशन सॉल्यूशंस’ की टीम भारतीय वन अधिकारियों और कर्मचारियों को तकनीक के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दे रही है। वन्यजीवों को सुरक्षित पकड़ने और स्थानांतरित करने के लिए इस अभियान में हेलिकॉप्टर, जमीन पर तैनात वनकर्मियों और विशेष रूप से तैयार किए गए घेरे का समन्वित इस्तेमाल किया जा रहा है।
क्या है दक्षिण अफ्रीका की बोमा तकनीक?
बोमा तकनीक वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से एकत्र करने और उन्हें स्थानांतरित करने की एक विशेष पद्धति है। इसमें जानवरों को धीरे-धीरे निर्धारित दिशा में ले जाकर एक बड़े घेरे या फनलनुमा रास्ते के जरिए सुरक्षित बाड़े तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद उन्हें नियंत्रित परिस्थितियों में पकड़कर आगे ले जाने की तैयारी की जाती है।
इस तकनीक का उद्देश्य जानवरों को अनावश्यक तनाव और चोट से बचाना है। काले हिरणों जैसे तेज दौड़ने वाले वन्यजीवों के मामले में सही दिशा निर्धारण और प्रशिक्षित टीम का समन्वय बेहद महत्वपूर्ण होता है।
हेलिकॉप्टर और वनकर्मियों के तालमेल से हो रहा रेस्क्यू
रेस्क्यू अभियान के पहले चरण में हेलिकॉप्टर और जमीन पर तैनात वनकर्मी मिलकर हिरणों के झुंड की दिशा नियंत्रित करते हैं। हेलिकॉप्टर की मदद से झुंड को निर्धारित मार्ग की ओर बढ़ाया जाता है, जबकि जमीन पर मौजूद कर्मचारी उसकी गतिविधियों पर नजर रखते हैं।
इस प्रक्रिया में जानवरों को अचानक डराने या अनियंत्रित तरीके से दौड़ाने के बजाय उन्हें योजनाबद्ध ढंग से सुरक्षित घेरे की ओर ले जाने पर जोर दिया जाता है। अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि हेलिकॉप्टर और जमीन पर मौजूद टीम के बीच कितना सटीक समन्वय रहता है।
दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञ दे रहे भारतीय टीम को प्रशिक्षण
उज्जैन के सीएफ किरण बिसेन के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका से आई ‘कंजर्वेशन सॉल्यूशंस’ की विशेषज्ञ टीम भारतीय अधिकारियों और वनकर्मियों को बोमा तकनीक के इस्तेमाल की जानकारी दे रही है।
इस सहयोग के जरिए वन विभाग के कर्मचारियों को वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने, उनके व्यवहार को समझने और स्थानांतरण के दौरान जरूरी सावधानियां बरतने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अभियान में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तकनीकी उपाय अपनाए जा रहे हैं।
30 डिग्री तापमान और ‘नो-स्मेल जोन’ का रखा जा रहा ध्यान
रेस्क्यू के दौरान वन्यजीवों के स्वास्थ्य और तनाव को कम रखने के लिए विशेष प्रोटोकॉल अपनाए जाने की जानकारी दी गई है। अभियान में तापमान, हवा की दिशा और आसपास की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, तापमान लगभग 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने पर काम रोकने जैसे नियमों का उल्लेख किया गया है। इसका उद्देश्य गर्मी और अत्यधिक शारीरिक गतिविधि के कारण हिरणों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम करना है।
इसके अलावा ‘नो-स्मेल जोन’ यानी गंध से जुड़े नियंत्रण उपायों पर भी ध्यान दिया जा रहा है, ताकि जानवरों को अनावश्यक परेशानी न हो और वे निर्धारित रास्ते की ओर बढ़ सकें। ऐसे अभियानों में वन्यजीवों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखना महत्वपूर्ण होता है।
किसानों को फसल नुकसान से राहत मिलने की उम्मीद
शुजालपुर क्षेत्र में काले हिरणों के झुंड किसानों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। खेतों में हिरणों की मौजूदगी से फसलों को नुकसान पहुंचने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में वन विभाग का यह अभियान किसानों और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, वन्यजीवों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के साथ उनके प्राकृतिक व्यवहार और संरक्षण का ध्यान रखना भी जरूरी है। यदि अभियान योजनाबद्ध तरीके से पूरा होता है, तो इससे किसानों को राहत मिलने और हिरणों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
कुनो नेशनल पार्क में स्थानांतरण की तैयारी
रेस्क्यू अभियान का प्रमुख उद्देश्य पकड़े गए काले हिरणों को सुरक्षित तरीके से निर्धारित स्थान पर पहुंचाना है। कुनो नेशनल पार्क में स्थानांतरण के दौरान परिवहन, स्वास्थ्य जांच और वन्यजीवों की सुरक्षा से संबंधित प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक होगा।
इस पूरी प्रक्रिया में वन विभाग और विशेषज्ञ टीम की भूमिका महत्वपूर्ण है। अभियान के अंतिम परिणाम, स्थानांतरित किए जाने वाले हिरणों की संख्या और पूरी प्रक्रिया के पूरा होने से संबंधित विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
निष्कर्ष: शाजापुर के शुजालपुर क्षेत्र में काले हिरणों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने के लिए दक्षिण अफ्रीका की बोमा तकनीक का इस्तेमाल वन्यजीव प्रबंधन की एक महत्वपूर्ण पहल है। इस अभियान से किसानों को फसल नुकसान से राहत मिलने और हिरणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की उम्मीद है। इसकी सफलता प्रशिक्षित टीम, वैज्ञानिक प्रोटोकॉल और वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रभावी पालन पर निर्भर करेगी।

