लखनऊ की ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था का कोलकाता नगर निगम ने किया अध्ययन
दीप सिंह, लखनऊ मुख्य संवाददाता, दैनिक रुस्तम-ए-हिंद
लखनऊ, 26 अगस्त 2026। राजधानी लखनऊ में ठोस कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में अपनाई जा रही आधुनिक व्यवस्थाओं और तकनीकों का अध्ययन करने के लिए कोलकाता नगर निगम की टीम बुधवार को लखनऊ पहुंची। टीम ने शहर में कचरा संग्रहण, परिवहन और प्रसंस्करण से जुड़ी विभिन्न व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान शिवरी स्थित प्रोसेसिंग साइट पर पहुंचकर कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और प्रसंस्करण की पूरी प्रक्रिया को समझा गया।
कोलकाता नगर निगम की टीम में प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुश्री सुभाषिनी ई., आईएएस तथा एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (सिविल), SWM विभाग श्री देबाशीष हलदार शामिल रहे। टीम ने विशेष रूप से शिवरी प्रोसेसिंग साइट पर बायोरेमेडिएशन, फ्रेश वेस्ट के प्रसंस्करण और लिगेसी वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण की प्रक्रिया का निरीक्षण किया।
शिवरी प्रोसेसिंग साइट पर आधुनिक तकनीकों की जानकारी
अध्ययन भ्रमण के दौरान कोलकाता नगर निगम के अधिकारियों को लखनऊ में कचरा प्रबंधन के लिए अपनाई जा रही विभिन्न तकनीकों और व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने साइट पर कचरे के प्रसंस्करण से लेकर उससे निकलने वाले बाय-प्रोडक्ट के निस्तारण तक की प्रक्रिया को करीब से देखा।
टीम ने यह भी समझा कि पुराने जमा कचरे यानी लिगेसी वेस्ट को किस तरह वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित किया जा रहा है और बायोरेमेडिएशन प्रक्रिया के माध्यम से पुराने कचरे के ढेर को किस तरह कम किया जा रहा है।
रोजाना 2550 मीट्रिक टन फ्रेश वेस्ट के निस्तारण की क्षमता
नगर निगम के अनुसार लखनऊ शहर में प्रतिदिन निकलने वाले फ्रेश वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए तीन प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित हैं। इन सभी यूनिटों की कुल क्षमता 2550 मीट्रिक टन प्रतिदिन बताई गई है।
इन प्रोसेसिंग यूनिटों में शहर से निकलने वाले फ्रेश वेस्ट का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया जाता है। इसके साथ ही प्रसंस्करण के दौरान निकलने वाले विभिन्न बाय-प्रोडक्ट के निस्तारण की व्यवस्था भी की जा रही है।
नगर निगम अधिकारियों ने कोलकाता की टीम को कचरे के संग्रहण से लेकर प्रोसेसिंग यूनिट तक पहुंचाने और वहां उसके वैज्ञानिक प्रसंस्करण की पूरी कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी।
18.49 लाख मीट्रिक टन लिगेसी वेस्ट का निस्तारण
लखनऊ नगर निगम ने लिगेसी वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रगति का दावा किया है। नगर निगम के मुताबिक, अनुबंधित 18.49 लाख मीट्रिक टन लिगेसी वेस्ट का वैज्ञानिक निस्तारण किया जा चुका है।
इसके अलावा करीब 3 लाख 45 हजार मीट्रिक टन आरडीएफ का भी निस्तारण किए जाने की जानकारी दी गई। टीम ने कचरे से निकलने वाले अन्य बाय-प्रोडक्ट के वैज्ञानिक निस्तारण की प्रक्रिया को भी समझा।
अधिकारियों ने बताया कि लिगेसी वेस्ट के निस्तारण से पुराने कचरे के ढेर को कम करने के साथ-साथ खाली होने वाली जमीन का बेहतर उपयोग करने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
फ्रेश वेस्ट से तैयार किया जा रहा कंपोस्ट
शिवरी प्रोसेसिंग साइट के निरीक्षण के दौरान कोलकाता नगर निगम की टीम को फ्रेश वेस्ट से तैयार होने वाले कंपोस्ट की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई।
नगर निगम के अनुसार तैयार कंपोस्ट को ग्रैन्यूल फॉर्म में तैयार किए जाने की व्यवस्था है। टीम ने इस प्रक्रिया और उससे जुड़े तकनीकी पहलुओं को समझा। अधिकारियों के बीच कचरे से उपयोगी उत्पाद तैयार करने और उसके वैज्ञानिक प्रबंधन को लेकर भी चर्चा हुई।
सीएनडी वेस्ट कलेक्शन पॉइंट्स का निरीक्षण
अध्ययन भ्रमण केवल प्रोसेसिंग साइट तक सीमित नहीं रहा। कोलकाता नगर निगम की टीम ने शहर में बनाए गए सीएनडी वेस्ट कलेक्शन पॉइंट्स का भी निरीक्षण किया।
टीम ने निर्माण एवं विध्वंस से निकलने वाले कचरे के संग्रहण और प्रबंधन की व्यवस्था को देखा। इसके साथ ही शहर के अलग-अलग वार्डों में संचालित कचरा संग्रहण व्यवस्था के बारे में भी जानकारी हासिल की।
अधिकारियों ने कचरे के स्रोत से संग्रहण, परिवहन और प्रसंस्करण तक की पूरी व्यवस्था को समझने का प्रयास किया।
इलेक्ट्रिक वाहनों और चार्जिंग स्टेशनों की भी जानकारी ली
कोलकाता नगर निगम की टीम ने वार्डों में कचरा संग्रहण के लिए संचालित इलेक्ट्रिक वाहनों का भी जायजा लिया। टीम को इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन और उनके उपयोग से जुड़ी व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी गई।
इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बनाए गए चार्जिंग स्टेशनों का भी निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने यह समझा कि कचरा संग्रहण व्यवस्था में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल किस प्रकार किया जा रहा है और उनके संचालन के लिए किस तरह की आधारभूत सुविधाएं विकसित की गई हैं।
दोनों नगर निगमों के अधिकारियों ने साझा किए अनुभव
अध्ययन के दौरान लखनऊ नगर निगम और कोलकाता नगर निगम के अधिकारियों के बीच ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। इसमें बायोरेमेडिएशन, आरडीएफ, कंपोस्ट, आधुनिक कचरा प्रसंस्करण और बाय-प्रोडक्ट के वैज्ञानिक निस्तारण जैसे विषय प्रमुख रहे।
दोनों नगर निगमों के अधिकारियों ने अपने-अपने शहरों में अपनाई जा रही व्यवस्थाओं और अनुभवों को साझा किया। इस दौरान कचरा प्रबंधन को अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनाने के लिए इस्तेमाल की जा रही तकनीकों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
लखनऊ मॉडल को समझने पहुंची कोलकाता की टीम
लखनऊ में अपनाई जा रही ठोस कचरा प्रबंधन की कार्यप्रणाली को कोलकाता नगर निगम के लिए उपयोगी अध्ययन के तौर पर देखा जा रहा है। विशेष रूप से फ्रेश वेस्ट के प्रतिदिन प्रसंस्करण, पुराने लिगेसी वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण, आरडीएफ के प्रबंधन, कंपोस्ट तैयार करने और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल जैसी व्यवस्थाओं की जानकारी टीम ने हासिल की।
इस अध्ययन भ्रमण के जरिए दोनों शहरों के नगर निकायों के बीच तकनीकी और प्रशासनिक अनुभवों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। लखनऊ नगर निगम की ओर से अपनाई जा रही आधुनिक व्यवस्थाओं का अध्ययन करने के बाद कोलकाता नगर निगम अपने शहर में ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उपयोगी पहलुओं पर विचार कर सकता है।
नगर निगम के अनुसार, शहर में कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर लगातार जोर दिया जा रहा है। 2550 मीट्रिक टन प्रतिदिन फ्रेश वेस्ट प्रोसेसिंग क्षमता, लिगेसी वेस्ट के निस्तारण और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल जैसी व्यवस्थाओं को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
रिपोर्टर; दीप सिंह मुख्य, संवाददता लखनऊ

