उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027: बीजेपी का पूर्वांचल मिशन तेज, गोरखपुर में विनोद तावड़े का दो दिवसीय दौरा
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक तैयारियों पर फोकस बढ़ा दिया है। इसी क्रम में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े 17 और 18 सितंबर को गोरखपुर के दो दिवसीय दौरे पर हैं। इस दौरान वह गोरखपुर क्षेत्र की विधानसभा सीटों की राजनीतिक स्थिति, संगठन की तैयारियों और पिछले चुनावों के प्रदर्शन की समीक्षा करेंगे।
बीजेपी की इस कवायद को पूर्वांचल में संगठन को मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए जमीनी स्तर पर तैयारियों को गति देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी की ओर से अलग-अलग क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों और जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद पर जोर दिया जा रहा है।
62 विधानसभा सीटों पर संगठन की समीक्षा
विनोद तावड़े के गोरखपुर प्रवास का प्रमुख फोकस गोरख क्षेत्र की 62 विधानसभा सीटों पर बताया गया है। इस दौरान संगठन के पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ नेताओं से बातचीत के जरिए क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति को समझने की कोशिश की जाएगी।
बैठकों में बूथ स्तर तक संगठन की स्थिति, पार्टी के जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और स्थानीय स्तर पर सामने आने वाले राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होने की बात सामने आई है।
इसके अलावा 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन और उससे सामने आई चुनौतियों को भी समीक्षा के केंद्र में रखा गया है। विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए पार्टी उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही है जहां पिछले चुनावों में उसे अपेक्षित परिणाम नहीं मिले थे।
तावड़े का दो दिवसीय गोरखपुर शेड्यूल
विनोद तावड़े के दौरे में संगठन और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठकें प्रमुख रूप से शामिल हैं। खास बात यह है कि एक ही मंच पर संगठन के पदाधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ नेताओं के साथ संवाद की योजना है।
दौरे के पहले दिन तावड़े सहजनवा विधानसभा क्षेत्र स्थित राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय/अटल आवासीय विद्यालय में आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ और मिष्ठान वितरण कार्यक्रम में भी शामिल होंगे।
इस तरह पार्टी के संगठनात्मक कार्यक्रमों के साथ सामाजिक और जनसंपर्क गतिविधियों को भी दौरे का हिस्सा बनाया गया है।
पूर्वांचल पर बीजेपी का फोकस
उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्वांचल का खास महत्व है। गोरखपुर क्षेत्र में आने वाली सीटों के अलावा बीजेपी की नजर बस्ती और आजमगढ़ मंडल की उन विधानसभा सीटों पर भी है जहां पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा था।
पार्टी की रणनीति में इन सीटों की अलग-अलग समीक्षा और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को समझना महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। संगठन से जुड़े नेताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से फीडबैक लेकर आने वाले समय में चुनावी तैयारियों को उसी आधार पर आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
2022 के समीकरण और बदली राजनीतिक तस्वीर
पूर्वांचल की राजनीति में सहयोगी दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था और चार सीटों पर जीत दर्ज की थी।
इसके बाद राजनीतिक समीकरण बदले और ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा अब एनडीए का हिस्सा है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए पूर्वांचल में सहयोगी दलों के साथ बीजेपी के संबंध और सीटवार राजनीतिक समीकरण भी चर्चा का विषय हैं।
हालांकि किसी सीट पर चुनावी परिणाम का आकलन अभी करना जल्दबाजी होगा। 2027 के चुनाव से पहले उम्मीदवारों, गठबंधनों, स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं के रुझान में बदलाव संभव है।
2024 के प्रदर्शन से सबक लेने की कोशिश
बीजेपी के लिए 2024 का लोकसभा चुनाव भी समीक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। पार्टी के संगठनात्मक स्तर पर इस बात को समझने की कोशिश की जा रही है कि किन क्षेत्रों में पार्टी का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप रहा और किन क्षेत्रों में उसे चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
गोरखपुर प्रवास के दौरान ऐसे ही राजनीतिक और संगठनात्मक फीडबैक पर चर्चा होने की बात सामने आई है। बूथ स्तर की स्थिति से लेकर विधानसभा क्षेत्र के व्यापक राजनीतिक समीकरण तक अलग-अलग स्तरों पर समीक्षा की जा रही है।
2027 के लिए अभी से संगठन पर जोर
उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। चुनाव में अभी समय है, लेकिन प्रमुख राजनीतिक दल संगठन को मजबूत करने और अपने-अपने सामाजिक एवं राजनीतिक समीकरणों को लेकर तैयारियां शुरू कर चुके हैं।
विनोद तावड़े का गोरखपुर दौरा इसी व्यापक संगठनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा है। 62 विधानसभा सीटों वाले गोरख क्षेत्र में पार्टी की स्थिति की समीक्षा के साथ-साथ कमजोर क्षेत्रों की पहचान और स्थानीय स्तर पर संगठन को सक्रिय करने पर जोर दिया जा रहा है।
आने वाले महीनों में इन बैठकों और फीडबैक के आधार पर बीजेपी की क्षेत्रवार रणनीति में और बदलाव देखने को मिल सकता है।
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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