वोट चोरी विवाद: जंतर-मंतर प्रदर्शन, SIR पर सवाल और सुप्रीम कोर्ट में याचिका
नई दिल्ली, 25 सितंबर 2026। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक विवाद शुक्रवार को और तेज हो गया। निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी मुद्दे पर दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन की गतिविधियां भी सामने आईं। वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ SIR से जुड़े कथित निर्णयों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दाखिल की गई है।
इस पूरे विवाद के केंद्र में मतदाता सूची को अपडेट करने और उसमें दर्ज मतदाताओं की जानकारी के सत्यापन की प्रक्रिया है। दिल्ली में SIR के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाने के बाद प्रक्रिया के तरीके को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई है।
दिल्ली SIR में लाखों मतदाताओं को नोटिस
दिल्ली में SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने नोटिस जारी करने के तरीके और उसमें इस्तेमाल किए गए ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ जैसे शब्दों को लेकर निर्वाचन आयोग से सवाल पूछे थे।
रिपोर्टों के मुताबिक, निर्वाचन आयोग ने अदालत को बताया कि इस प्रक्रिया के लिए करीब 14,000 बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और 1,200 इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) लगाए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर प्रक्रिया के लिए समय बढ़ाया जा सकता है और किसी मतदाता का नाम बिना उचित प्रक्रिया के हटाया नहीं जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस में विसंगतियों के कारणों को स्पष्ट तरीके से बताने की जरूरत पर जोर दिया था। अदालत ने निर्वाचन आयोग से इस संबंध में जवाब भी मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका
25 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई। अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दाखिल याचिका में SIR से जुड़े कथित फैसलों और दिशानिर्देशों की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ निर्णय कथित तौर पर अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ता ने ऐसे निर्णयों को असंवैधानिक घोषित करने के साथ-साथ SIR के दौरान मतदाता नाम हटाए जाने के आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की है।
हालांकि, यह स्पष्ट रखना जरूरी है कि याचिका में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन आरोपों पर अंतिम निर्णय भी नहीं दिया गया है।
चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की खबरों से बढ़ी राजनीतिक हलचल
SIR को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर कथित मतभेद की खबरों ने भी राजनीतिक विवाद को बढ़ाया है। प्रकाशित रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े कुछ निर्णयों और आदेशों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल नई याचिका में भी इन रिपोर्टों का उल्लेख किया गया है।
दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश में कुछ कार्यक्रमों के स्थगन को लेकर सामने आई अटकलों को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया है और आंतरिक असंतोष की खबरों को खारिज किया है।
‘वोट चोरी’ को लेकर राहुल गांधी का हमला
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार पर तीखे राजनीतिक आरोप लगाए हैं। 24 सितंबर को उन्होंने ‘वोट चोरी’ को ‘कानून चोरी’ से जोड़ते हुए चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग की।
राहुल गांधी के ये बयान राजनीतिक आरोप और उनका पक्ष हैं। इनके आधार पर चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
विरोध-प्रदर्शनों से बढ़ा राजनीतिक दबाव
SIR को लेकर विपक्षी दलों की गतिविधियां भी तेज हुई हैं। दिल्ली में निर्वाचन आयोग के कार्यालय के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई और दिल्ली कांग्रेस की ओर से विरोध-प्रदर्शन की घोषणा की गई। वाम दलों ने भी SIR के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है।
विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और SIR प्रक्रिया की समीक्षा की मांग की जा रही है। वहीं, निर्वाचन आयोग की ओर से प्रक्रिया को मतदाता सूची को व्यवस्थित और अद्यतन करने की कवायद के रूप में बताया गया है।
अब आगे क्या?
SIR को लेकर विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई महत्वपूर्ण हो गई है। दिल्ली में जारी नोटिसों की प्रक्रिया, ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के आधार और मतदाताओं को अपना पक्ष रखने के अवसर जैसे मुद्दे अदालत के सामने हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ दाखिल नई याचिका में लगाए गए आरोपों और SIT जांच की मांग पर भी आगे न्यायिक कार्यवाही हो सकती है। फिलहाल, ‘वोट चोरी’ से जुड़े राजनीतिक आरोप, SIR प्रक्रिया पर न्यायिक सवाल और निर्वाचन आयोग का पक्ष—तीनों अलग-अलग पहलू हैं, जिन्हें अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आने तक अलग-अलग संदर्भ में देखना होगा।

