Water Secure Haryana: हरियाणा में लागू होगा वाटर सिक्योर कार्यक्रम, किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा
चंडीगढ़: हरियाणा में जल सुरक्षा को मजबूत करने और किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ने के लिए ‘वाटर सिक्योर हरियाणा’ (Water Secure Haryana) कार्यक्रम लागू करने की तैयारी है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में इस प्रस्तावित कार्यक्रम की जानकारी दी। इसका उद्देश्य जल संरक्षण, जलभराव और लवणीय भूमि की समस्या को दूर करने के साथ-साथ ऐसी कृषि तकनीकों को बढ़ावा देना है, जिनमें पानी की खपत कम हो और किसानों की आय बढ़ सके।
क्या है Water Secure Haryana कार्यक्रम?
कृषि मंत्री के अनुसार, कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सब-सरफेस और वर्टिकल ड्रेनेज तकनीकों के जरिए सेम प्रभावित भूमि को दोबारा उपजाऊ बनाना है। इसके साथ ही जल-दक्ष फसलों और आधुनिक कृषि तकनीकों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
कार्यक्रम के तहत किसानों को जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। अधिक पानी की खपत वाली फसलों का क्षेत्र कम करके पानी की बचत और किसानों की आय बढ़ाने पर भी विशेष जोर रहेगा।
क्लस्टर आधारित रणनीति से होगा काम
‘वाटर सिक्योर हरियाणा’ कार्यक्रम को क्लस्टर आधारित रणनीति के तहत लागू किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों को उनकी कृषि और जल संबंधी जरूरतों के आधार पर क्लस्टरों में बांटा गया है।
जलभराव और लवणता की समस्या के समाधान के लिए झज्जर और रोहतक समेत अन्य प्रभावित जिलों के क्लस्टर-13 में 2 लाख एकड़ भूमि को लक्ष्य बनाया गया है। इस क्षेत्र में चरणबद्ध तरीके से ड्रेनेज सिस्टम स्थापित किए जाएंगे, जिससे सेम प्रभावित जमीन को कृषि योग्य बनाने में मदद मिलेगी।
वहीं, पानी की बचत और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर-5 में 5 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की सीधी बिजाई (DSR) का लक्ष्य रखा गया है। इस क्लस्टर में कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और करनाल को शामिल किया गया है।
इसके अलावा क्लस्टर-13 में 1.12 लाख एकड़ क्षेत्र में ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना के तहत वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा।
5,714.80 करोड़ रुपये की परियोजना
प्रस्तावित ‘वाटर सिक्योर हरियाणा’ कार्यक्रम की कुल अनुमानित लागत 5,714.80 करोड़ रुपये है। इसे वर्ष 2026 से 2032 तक छह वर्षों की अवधि में लागू करने का प्रस्ताव है।
परियोजना की फंडिंग में विश्व बैंक की भी बड़ी भूमिका होगी। कुल लागत का 70 प्रतिशत यानी 4,000.36 करोड़ रुपये विश्व बैंक की वित्तीय सहायता के रूप में मिलने का प्रस्ताव है। वहीं, बाकी 30 प्रतिशत यानी 1,714.44 करोड़ रुपये हरियाणा सरकार अपने अंशदान के रूप में वहन करेगी।
इस परियोजना के तहत दोनों क्लस्टरों में मृदा परीक्षण के आधार पर जिप्सम और हरी खाद के इस्तेमाल को भी अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा।
Program-for-Results प्रणाली के तहत फंडिंग
इस परियोजना के लिए विश्व बैंक की ‘प्रोग्राम-फॉर-रिजल्ट्स’ (Program-for-Results) प्रणाली के तहत वित्तपोषण किया जाएगा। इस व्यवस्था में परियोजना के लिए धनराशि का वितरण पहले से तय किए गए लक्ष्यों और सूचकांकों की उपलब्धि के आधार पर किया जाएगा।
राज्य सरकार की ओर से इस प्रस्ताव को लेकर जरूरी प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं। नीति आयोग, केंद्रीय जल आयोग और जल शक्ति मंत्रालय समेत विभिन्न केंद्रीय विभागों और राज्य मंत्रिमंडल से आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त होने के बाद प्रस्ताव को औपचारिक रूप से विश्व बैंक के समक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है।
सरकार का लक्ष्य है कि परियोजना की अंतिम ऋण स्वीकृति अक्टूबर 2026 तक पूरी हो जाए।
कृषि घटक के लिए 886 करोड़ रुपये
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से परियोजना के कृषि घटक के लिए 886 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। यह कुल परियोजना लागत का करीब 16 प्रतिशत है।
इस राशि में से 436 करोड़ रुपये का इस्तेमाल जलभराव और लवणीय यानी सेम प्रभावित भूमि के सुधार के लिए किया जाएगा। वहीं, 450 करोड़ रुपये धान की सीधी बिजाई (DSR), ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ के तहत फसल विविधीकरण, ढैंचा आधारित हरी खाद और जिप्सम के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर खर्च किए जाएंगे।
किसानों को पानी बचाने वाली खेती के लिए किया जाएगा प्रोत्साहित
कार्यक्रम के जरिए सरकार का फोकस ऐसी कृषि व्यवस्था विकसित करने पर है, जिसमें कम पानी में बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सके। धान की सीधी बिजाई जैसी तकनीकों को बढ़ावा देने से सिंचाई के लिए पानी की खपत कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देकर किसानों को धान जैसी अधिक पानी की खपत वाली फसलों पर निर्भरता कम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे भूजल संरक्षण के साथ किसानों की आय में विविधता लाने का प्रयास भी होगा।
अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से लक्ष्य पूरा करने के निर्देश
बैठक के अंत में कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने अधिकारियों को सभी क्लस्टरों में वर्षवार निर्धारित लक्ष्यों को पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए।
सरकार का कहना है कि कार्यक्रम का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचना चाहिए। जलभराव और लवणीय भूमि के सुधार, ड्रेनेज सिस्टम, फसल विविधीकरण, DSR, हरी खाद और जिप्सम के इस्तेमाल के जरिए प्रदेश में जल संरक्षण के साथ टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की योजना है।
‘वाटर सिक्योर हरियाणा’ कार्यक्रम के प्रस्तावित छह साल के क्रियान्वयन से प्रदेश में जल प्रबंधन और कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाने की कोशिश की जा रही है। अब इस परियोजना की अंतिम स्वीकृतियों और आगे के क्रियान्वयन पर नजर रहेगी। रिपोर्टर; सतविंदर, कौर मुख्य संवाददाता हरियाणा

