76 लावारिस शवों का अस्थि विसर्जन श्री कीरतपुर साहिब में, गुरु नानक सेवा फाउंडेशन ने पेश की मानवता की मिसाल
उपशीर्षक: 76 बेसहारा दिवंगतों का अंतिम संस्कार कराने के बाद अस्थियां पंजाब के पवित्र श्री कीरतपुर साहिब में प्रवाहित, संगत ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए की अरदास
नई दिल्ली | दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द | डिजिटल डेस्क
नई दिल्ली। मानवता, करुणा और निस्वार्थ सेवा की भावना को साकार करते हुए गुरु नानक सेवा फाउंडेशन (पंजीकृत), तिलक विहार, शाहपुरा, नई दिल्ली ने समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। संस्था ने 76 लावारिस शवों का विधि-विधान से अंतिम संस्कार कराने के बाद उनकी अस्थियों को पंजाब के पवित्र धार्मिक स्थल श्री कीरतपुर साहिब में प्रवाहित कराया। इस दौरान संगत और सेवादारों ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए अरदास की तथा मानवता की सेवा का संदेश दिया।
यह पहल उन लोगों को सम्मानजनक अंतिम विदाई देने के उद्देश्य से की गई, जिनकी मृत्यु के बाद उनके परिजन सामने नहीं आए या जिनके अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाने वाला कोई नहीं था। संस्था ने ऐसे दिवंगत व्यक्तियों के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए अंतिम संस्कार से लेकर अस्थि-विसर्जन तक की प्रक्रिया पूरी की।
तिलक विहार श्मशान घाट से श्री कीरतपुर साहिब तक पहुंचीं अस्थियां
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरु नानक सेवा फाउंडेशन लंबे समय से दिल्ली के तिलक विहार स्थित श्मशान भूमि में लावारिस शवों के अंतिम संस्कार की सेवा से जुड़ी हुई है। संस्था की ओर से ऐसे दिवंगत लोगों का अंतिम संस्कार कराया जाता है, जिनकी पहचान नहीं हो पाती अथवा जिनके परिजन अंतिम संस्कार के लिए उपलब्ध नहीं होते।
इसी सेवा कार्य के अंतर्गत 76 दिवंगत व्यक्तियों का अंतिम संस्कार कराने के बाद उनकी अस्थियों को सुरक्षित रखा गया था। संस्था ने धार्मिक परंपराओं के अनुसार इन अस्थियों का विसर्जन कराने का निर्णय लिया।
इसके बाद गुरु नानक सेवा फाउंडेशन से जुड़े सेवादारों और संगत का एक दल अस्थियां लेकर पंजाब के श्री कीरतपुर साहिब पहुंचा। वहां धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अस्थि-विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की गई।
76 दिवंगत व्यक्तियों को दी गई सम्मानजनक अंतिम विदाई
किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार होना मानवीय गरिमा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन समाज में अनेक बार ऐसी परिस्थितियां सामने आती हैं, जब किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी पहचान नहीं हो पाती या उसका कोई परिजन सामने नहीं आता।
ऐसी स्थिति में लावारिस शवों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाना केवल सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनशीलता का परिचायक भी है।
गुरु नानक सेवा फाउंडेशन ने 76 दिवंगत व्यक्तियों का अंतिम संस्कार कराने के बाद उनकी अस्थियों को धार्मिक आस्था के अनुरूप प्रवाहित कर यह संदेश दिया कि मृत्यु के बाद भी प्रत्येक व्यक्ति सम्मान और संवेदना का अधिकारी है।
संस्था की इस पहल में मानवता, धार्मिक आस्था और सामाजिक उत्तरदायित्व का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
श्री कीरतपुर साहिब में दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए अरदास
पंजाब का श्री कीरतपुर साहिब सिख धर्म की आस्था और ऐतिहासिक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने दिवंगत परिजनों की अस्थियां प्रवाहित करने पहुंचते हैं।
गुरु नानक सेवा फाउंडेशन की संगत ने भी इसी धार्मिक आस्था के साथ 76 दिवंगत व्यक्तियों की अस्थियों का विसर्जन किया।
इस अवसर पर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए अरदास की गई। सेवादारों ने सेवा कार्य को गुरु साहिबानों की शिक्षाओं से प्रेरित बताया।
संगत के सदस्यों ने अस्थियों को निर्धारित स्थल तक पहुंचाने और विसर्जन की प्रक्रिया पूरी करने में सामूहिक सहयोग दिया। इस सेवा यात्रा में सभी ने मिलकर अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।
गुरु साहिबानों की शिक्षाओं से प्रेरित सेवा कार्य
सिख धर्म में निस्वार्थ सेवा, समानता, करुणा और मानवता को विशेष महत्व दिया गया है। गुरु नानक देव जी की शिक्षाएं समाज में भेदभाव समाप्त कर प्रत्येक व्यक्ति के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना विकसित करने का संदेश देती हैं।
इन्हीं मानवीय मूल्यों से प्रेरणा लेते हुए गुरु नानक सेवा फाउंडेशन ने उन दिवंगत लोगों के लिए अंतिम संस्कार और अस्थि-विसर्जन की व्यवस्था की, जिनका कोई अपना सामने नहीं आया।
संस्था की इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सेवा कार्य में दिवंगत व्यक्तियों की सामाजिक स्थिति, आर्थिक परिस्थिति या पारिवारिक पृष्ठभूमि को आधार नहीं बनाया गया।
सभी दिवंगत व्यक्तियों को समान सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने का प्रयास किया गया।
लावारिस शवों का अंतिम संस्कार एक महत्वपूर्ण सामाजिक जिम्मेदारी
देश के विभिन्न शहरों में समय-समय पर ऐसे शव मिलते हैं, जिनकी पहचान नहीं हो पाती। कुछ मामलों में मृतक के परिवार की जानकारी नहीं मिलती, जबकि कई परिस्थितियों में परिजन उपलब्ध नहीं होते।
ऐसे मामलों में आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अंतिम संस्कार की व्यवस्था की जाती है।
इस कार्य में प्रशासन के साथ सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
गुरु नानक सेवा फाउंडेशन की पहल इसी सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण है। संस्था ने अंतिम संस्कार के बाद अस्थियों के विसर्जन तक की जिम्मेदारी निभाकर यह दिखाया कि मानवीय सेवा केवल किसी एक औपचारिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
अंतिम संस्कार के बाद अस्थि-विसर्जन की जिम्मेदारी भी निभाई
सामान्यतः किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर परिवार के सदस्य अंतिम संस्कार से लेकर अस्थि-विसर्जन तक की धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हैं।
लेकिन जिन लोगों के परिजन उपलब्ध नहीं होते, उनके मामले में यह जिम्मेदारी निभाने वाला कोई नहीं होता।
ऐसे दिवंगत व्यक्तियों के लिए गुरु नानक सेवा फाउंडेशन ने आगे आकर अंतिम संस्कार के साथ अस्थि-विसर्जन की व्यवस्था भी की।
संस्था की इस पहल ने यह संदेश दिया कि किसी व्यक्ति के जीवन की परिस्थितियां चाहे जैसी रही हों, मृत्यु के बाद उसे सम्मानजनक विदाई मिलनी चाहिए।
सामाजिक संगठनों के लिए प्रेरणादायक पहल
गुरु नानक सेवा फाउंडेशन का यह सेवा कार्य अन्य सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं और नागरिकों के लिए प्रेरणा बन सकता है।
समाज में ऐसे अनेक लोग हैं, जिन्हें जीवन के अंतिम समय में परिवार, आर्थिक संसाधनों या सामाजिक सहयोग का सहारा नहीं मिल पाता।
ऐसे लोगों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना और उनकी मानवीय गरिमा बनाए रखना एक जिम्मेदार समाज की पहचान है।
इस प्रकार के सेवा कार्य यह भी दर्शाते हैं कि सामाजिक संस्थाएं जरूरतमंदों की सहायता के साथ-साथ बेसहारा दिवंगतों को सम्मानजनक अंतिम विदाई देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
मानवता की सेवा में नहीं होना चाहिए कोई भेदभाव
गुरु नानक सेवा फाउंडेशन की पहल का संदेश स्पष्ट है कि मानवता की सेवा में जाति, धर्म, आर्थिक स्थिति या सामाजिक पहचान के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
जीवन में प्रत्येक व्यक्ति सम्मान का अधिकारी है और मृत्यु के बाद भी उसकी गरिमा बनाए रखना समाज की नैतिक जिम्मेदारी है।
76 दिवंगत व्यक्तियों की अस्थियों को श्री कीरतपुर साहिब में प्रवाहित कर संस्था ने इसी भावना को व्यवहार में उतारने का प्रयास किया।
इस सेवा कार्य में शामिल संगत और सेवादारों का सामूहिक सहयोग भी सामाजिक एकता तथा निस्वार्थ सेवा की भावना को दर्शाता है।
76 अस्थि-विसर्जन के माध्यम से दिया करुणा और संवेदना का संदेश
गुरु नानक सेवा फाउंडेशन द्वारा किए गए इस कार्य का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है।
यह उन 76 दिवंगत व्यक्तियों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का प्रयास भी है, जिनकी अंतिम यात्रा में उनके अपने परिजन शामिल नहीं हो सके।
संस्था ने अंतिम संस्कार से लेकर अस्थि-विसर्जन तक की जिम्मेदारी निभाकर यह साबित करने का प्रयास किया कि समाज में करुणा और मानवीय संवेदना आज भी महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
ऐसी पहल जरूरतमंदों, बेसहारा व्यक्तियों और समाज के उपेक्षित वर्गों के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देती है।
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द का संदेश: मृत्यु के बाद भी प्रत्येक व्यक्ति सम्मान का अधिकारी
गुरु नानक सेवा फाउंडेशन की ओर से 76 लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराने और उनकी अस्थियों को श्री कीरतपुर साहिब में प्रवाहित करने की पहल मानवीय मूल्यों का प्रेरणादायक उदाहरण है।
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द का मानना है कि किसी व्यक्ति का इस संसार से चले जाना उसके सम्मान का अंत नहीं होना चाहिए। जिन दिवंगत व्यक्तियों का कोई अपना सामने नहीं आता, उनके लिए सम्मानजनक अंतिम संस्कार और धार्मिक परंपराओं के अनुसार अंतिम विदाई की व्यवस्था करना समाज की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
गुरु नानक सेवा फाउंडेशन और इस सेवा कार्य में सहयोग देने वाले सेवादारों की पहल यह संदेश देती है कि सच्ची मानवता वही है, जो बिना किसी भेदभाव के जरूरतमंदों और बेसहारा लोगों के प्रति अपना कर्तव्य निभाए।
मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और प्रत्येक दिवंगत व्यक्ति को सम्मानजनक अंतिम विदाई मिलना उसकी गरिमा के प्रति समाज की जिम्मेदारी है।

