Chamoli News: आवारा कुत्तों का आतंक, 10 स्कूल 23 अगस्त तक बंद; बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई
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नारायणबगड़ इलाके में दो दिनों के भीतर कुत्तों के हमले में 8 लोग घायल हुए। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने 20 से 23 अगस्त तक 10 सरकारी और प्राइवेट स्कूल बंद रखने का फैसला किया है।
Chamoli News: उत्तराखंड के चमोली जिले के नारायणबगड़ इलाके में आवारा और हिंसक कुत्तों का आतंक बढ़ गया है। पिछले दो दिनों में कुत्तों के हमलों में स्कूली बच्चों समेत 8 लोगों के घायल होने के बाद प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नारायणबगड़ बाजार और आसपास के 10 सरकारी और प्राइवेट स्कूलों को 20 से 23 अगस्त तक बंद रखने का आदेश दिया गया है।
स्कूल बंद रहने के दौरान बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए ऑनलाइन क्लास के जरिए पढ़ाई जारी रखने की व्यवस्था की गई है।
दो दिनों में 8 लोगों पर हमला
स्थानीय लोगों के मुताबिक, नारायणबगड़ इलाके में पिछले दो दिनों से आवारा कुत्तों के हमले बढ़ गए हैं। मंगलवार को कुत्तों ने स्कूली बच्चों समेत चार लोगों को अपना शिकार बनाया था।
इसके बाद बुधवार को भी चार और लोगों पर कुत्तों ने हमला कर दिया। लगातार हो रही घटनाओं के कारण इलाके में दहशत का माहौल है। सबसे ज्यादा चिंता बच्चों की सुरक्षा को लेकर है, क्योंकि स्कूल आने-जाने के दौरान बच्चों को कुत्तों के हमले का खतरा बना हुआ है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से आवारा कुत्तों को पकड़ने और इस समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।
बच्चों की सुरक्षा के लिए 10 स्कूल बंद
लगातार हो रहे हमलों की जानकारी प्रशासन तक पहुंचने के बाद बच्चों की सुरक्षा को लेकर तत्काल फैसला लिया गया।
चमोली के जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य शिक्षा अधिकारी ने नारायणबगड़ बाजार और आसपास के 10 स्कूलों को चार दिन तक बंद रखने का आदेश दिया है। ये स्कूल 20 अगस्त से 23 अगस्त तक बंद रहेंगे।
नारायणबगड़ के खंड शिक्षा अधिकारी अनिल नाथ के मुताबिक, बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया गया है। छुट्टी के दौरान बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन माध्यम से जारी रखी जाएगी।
इस फैसले से अभिभावकों को भी कुछ राहत मिली है, क्योंकि उन्हें बच्चों के स्कूल जाने के दौरान आवारा कुत्तों के हमले की चिंता बनी हुई थी।
वन विभाग की QRT टीम को लगाया गया
आवारा और हिंसक कुत्तों को पकड़ने के लिए प्रशासन ने वन विभाग की क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) को मैदान में उतारा है।
टीम ने इलाके में घूम रहे आवारा कुत्तों को पकड़ने का अभियान शुरू कर दिया है। प्रशासन की कोशिश है कि स्कूलों और आबादी वाले इलाकों के आसपास मौजूद आक्रामक कुत्तों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए, ताकि लोगों को खतरे से बचाया जा सके।
इसके साथ ही इलाके में निगरानी भी बढ़ाई गई है।
पशुपालन विभाग कर रहा वैक्सीनेशन
कुत्तों को पकड़ने के साथ-साथ पशुपालन विभाग की ओर से रेबीज से बचाव के टीके भी लगाए जा रहे हैं।
कुत्तों के काटने की घटनाओं को देखते हुए वैक्सीनेशन को भी जरूरी कदम माना जा रहा है। अधिकारियों की कोशिश है कि आवारा कुत्तों के कारण लोगों में रेबीज जैसी गंभीर बीमारी का खतरा न बढ़े।
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल कुत्तों को पकड़ना ही पर्याप्त नहीं होगा। यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि इलाके में कुत्ते अचानक इतने आक्रामक क्यों हो गए हैं।
लोगों में डर का माहौल
लगातार दो दिनों में आठ लोगों पर हमले के बाद नारायणबगड़ इलाके के लोगों में डर का माहौल बना हुआ है।
सुबह और शाम के समय बच्चों के अलावा बुजुर्ग और अन्य लोग भी घर से बाहर निकलने में सावधानी बरत रहे हैं। स्कूल बंद होने के फैसले से बच्चों को फिलहाल राहत मिली है, लेकिन स्थानीय लोग चाहते हैं कि प्रशासन जल्द से जल्द समस्या का स्थायी समाधान करे।
लोगों का कहना है कि अगर समय रहते आवारा कुत्तों की समस्या पर कार्रवाई नहीं हुई तो आगे और लोगों के घायल होने का खतरा बना रहेगा।
प्रशासन के सामने स्थायी समाधान की चुनौती
प्रशासन की ओर से फिलहाल स्कूल बंद करने, कुत्तों को पकड़ने और वैक्सीनेशन जैसे कदम उठाए गए हैं। लेकिन स्थानीय लोगों की मांग है कि इलाके में आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए लंबे समय की योजना बनाई जाए।
इसके साथ ही कुत्तों के आक्रामक व्यवहार के कारणों की भी जांच की जानी चाहिए। प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने चुनौती यह है कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ आवारा पशुओं के प्रबंधन के लिए नियमों के तहत प्रभावी कार्रवाई की जाए।
स्कूल खुलने से पहले स्थिति की समीक्षा
20 से 23 अगस्त तक स्कूल बंद रखने का फैसला फिलहाल बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। इस दौरान वन विभाग की टीम कुत्तों को पकड़ने और पशुपालन विभाग वैक्सीनेशन का काम करेगा।
स्कूल दोबारा खोलने से पहले इलाके की स्थिति की समीक्षा की जा सकती है। अगर कुत्तों का आतंक कम होता है और बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्थिति सामान्य होती है, तो स्कूलों में नियमित पढ़ाई शुरू की जाएगी।
अभिभावकों ने भी बरतने की अपील
प्रशासन और स्थानीय स्तर पर लोगों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है। अभिभावकों को सलाह दी जा रही है कि वे बच्चों को अकेले सुनसान रास्तों से न भेजें और आवारा कुत्तों के झुंड के आसपास जाने से बचें।
अगर कोई कुत्ता आक्रामक व्यवहार करता है तो उसके पास जाने या उसे छेड़ने के बजाय तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी जा रही है।
रिपोर्टर; तेजिंदर सिंह, मुख्य संवाददता उत्तराखण्ड

