Punjab Government Employees Strike: 7 लाख कर्मचारी-पेंशनर हड़ताल पर, 18% DA और पुरानी पेंशन योजना समेत ये हैं मांगें
चंडीगढ़, 27 अगस्त 2026। पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं और उससे पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के सामने करीब 7 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की नाराजगी बड़ी चुनौती बनती नजर आ रही है। कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर 27 अगस्त को हड़ताल का ऐलान किया है।
कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल के चलते सरकारी कामकाज प्रभावित होने की आशंका है। कर्मचारियों ने ऐलान किया है कि 27 अगस्त को सिविल सचिवालय बंद रहेगा। इसके अलावा ओपीडी, सरकारी परिवहन सेवाओं और कई अन्य सरकारी सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।
सरकार ने बातचीत का दिया प्रस्ताव
हड़ताल के ऐलान के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने कर्मचारियों और उनके नेताओं के साथ बातचीत की पेशकश की है। सरकार का कहना है कि बातचीत के जरिए कर्मचारियों की मांगों को सुना जा सकता है और संबंधित मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है।
कर्मचारी संगठन साझा मुलाजिम मोर्चा के नेतृत्व में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर सरकार से कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।
पंजाब कांग्रेस ने किया हड़ताल का समर्थन
कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर पंजाब कांग्रेस ने भी समर्थन का ऐलान किया है। कांग्रेस ने भगवंत मान सरकार पर कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया है।
वहीं, पंजाब बीजेपी की ओर से भी सरकार पर निशाना साधा गया है। पंजाब बीजेपी अध्यक्ष ने कर्मचारियों की मांगों और सरकार के रवैये को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने न्यायिक आदेशों के बावजूद कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों के समाधान में देरी का आरोप लगाया।
कर्मचारियों की मुख्य मांगें क्या हैं?
पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की प्रमुख मांगों में लंबित 18 प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) की किश्तों का भुगतान और पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली शामिल है।
कर्मचारी संगठन लंबे समय से महंगाई भत्ते की लंबित किश्तों का भुगतान करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि महंगाई बढ़ने के बीच कर्मचारियों और पेंशनरों को उनका लंबित DA दिया जाना चाहिए।
इसके अलावा कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना की बहाली की भी मांग कर रहे हैं। यह मुद्दा पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के बीच लंबे समय से प्रमुख मांगों में शामिल रहा है।
चुनाव से पहले मान सरकार की बढ़ी चुनौती
पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में करीब 7 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़ा यह आंदोलन सरकार के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अगर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत से समाधान नहीं निकलता है तो हड़ताल का असर सरकारी सेवाओं पर पड़ सकता है। खासकर सिविल सचिवालय, स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े काम प्रभावित होने की संभावना जताई गई है।
अब सभी की नजर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर है। सरकार अगर कर्मचारियों की प्रमुख मांगों पर कोई ठोस रास्ता निकालती है तो आंदोलन को टालने की संभावना बन सकती है। वहीं, मांगों पर सहमति नहीं बनने की स्थिति में कर्मचारी आंदोलन आगे भी जारी रह सकता है।
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब

