CM उमर अब्दुल्ला को झटका, कांग्रेस ने सरकार में शामिल होने से किया इनकार, बोली- पहले बहाल हो पूर्ण राज्य का दर्जा
श्रीनगर/जम्मू: जम्मू-कश्मीर की राजनीति में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार को लेकर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) की ओर से कैबिनेट में शामिल होने के लिए दिए गए नए प्रस्ताव को कांग्रेस ने फिलहाल ठुकरा दिया है। जम्मू-कश्मीर कांग्रेस अध्यक्ष तारिक हामिद कर्रा ने साफ कर दिया है कि पार्टी केंद्र शासित प्रदेश की मौजूदा व्यवस्था में मंत्री पद स्वीकार नहीं करेगी। कांग्रेस ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल होने के बाद ही कैबिनेट में शामिल होने पर विचार किया जाएगा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब उमर अब्दुल्ला सरकार में कैबिनेट विस्तार और फेरबदल की चर्चा तेज है। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस को सरकार में शामिल होने का ताजा प्रस्ताव दिया था, लेकिन कांग्रेस ने अपने पुराने रुख को दोहराते हुए फिलहाल मंत्री पद लेने से इनकार कर दिया है।
कांग्रेस ने साफ किया अपना रुख
जम्मू-कश्मीर कांग्रेस प्रमुख तारिक हामिद कर्रा ने कहा कि पार्टी अपने उस राजनीतिक रुख से पीछे नहीं हटेगी, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे और संवैधानिक अधिकारों की बहाली की मांग की जा रही है।
कांग्रेस का कहना है कि मौजूदा केंद्र शासित प्रदेश की व्यवस्था में सरकार में शामिल होना उसके घोषित राजनीतिक रुख के विपरीत होगा। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह उमर अब्दुल्ला सरकार को बाहर से समर्थन जारी रख सकती है, लेकिन फिलहाल मंत्री पद स्वीकार नहीं करेगी।
उमर सरकार में कैबिनेट विस्तार की तैयारी
कांग्रेस के इस फैसले का असर उमर अब्दुल्ला सरकार के प्रस्तावित कैबिनेट विस्तार पर पड़ सकता है। नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार की ओर से कांग्रेस को दोबारा मंत्री पद का प्रस्ताव दिए जाने की खबरें सामने आई थीं।
जम्मू-कश्मीर में मंत्रिपरिषद की अधिकतम संख्या नौ हो सकती है। ऐसे में सरकार के पास कैबिनेट विस्तार के लिए सीमित जगह है और कांग्रेस को शामिल करने को लेकर पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक अटकलें चल रही थीं।
कांग्रेस के इनकार के बाद अब उमर अब्दुल्ला को कैबिनेट विस्तार के लिए दूसरे विकल्पों पर आगे बढ़ना होगा।
कांग्रेस और NC के रिश्तों में बढ़ी दूरी?
नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस ने 2024 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था। चुनाव के बाद उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में सरकार बनी, लेकिन कांग्रेस ने सरकार में मंत्री पद स्वीकार नहीं किया।
कांग्रेस लगातार कहती रही है कि जब तक जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस नहीं मिलता, वह सरकार में शामिल नहीं होगी। हालिया घटनाक्रम ने दोनों सहयोगी दलों के बीच राजनीतिक मतभेदों को फिर चर्चा में ला दिया है।
हालांकि कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकार को बाहर से समर्थन देने का उसका रुख बना हुआ है। यानी कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच गठबंधन पूरी तरह खत्म होने की स्थिति में नहीं है, लेकिन सत्ता में भागीदारी को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद कायम हैं।
पूर्ण राज्य का दर्जा बना बड़ा मुद्दा
कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस दोनों ही जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली की मांग करते रहे हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी कई मौकों पर कह चुके हैं कि उनकी सरकार और नेशनल कॉन्फ्रेंस राज्य का दर्जा बहाल होने तक इस मुद्दे पर अपना अभियान जारी रखेंगे।
उमर अब्दुल्ला ने अगस्त में भी कहा था कि राज्य का दर्जा बहाल कराने के प्रयास जारी रहेंगे। ऐसे में कांग्रेस का कैबिनेट में शामिल होने से इनकार इसी व्यापक राजनीतिक मुद्दे से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
उमर अब्दुल्ला के सामने क्या चुनौती?
कांग्रेस के फैसले के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सामने सरकार के कैबिनेट विस्तार को लेकर नई राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है। सरकार को अपने मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ सहयोगी दल कांग्रेस के साथ संबंध भी संभालने होंगे।
दूसरी ओर, कांग्रेस के लिए भी यह फैसला राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। पार्टी सरकार को समर्थन देते हुए सत्ता से बाहर रहने की रणनीति अपना रही है, ताकि पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग पर उसका दबाव बना रहे।
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
जम्मू-कश्मीर में 2019 के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया। राज्य को पुनर्गठित कर केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया और बाद में विधानसभा चुनाव के बाद निर्वाचित सरकार अस्तित्व में आई।
अब कांग्रेस का कहना है कि वह मौजूदा केंद्र शासित प्रदेश की व्यवस्था में मंत्री पद स्वीकार नहीं करेगी। पार्टी की मांग है कि पहले पूर्ण राज्य का दर्जा और लोगों के भूमि, रोजगार तथा अन्य संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर समाधान हो।
उमर सरकार को बाहर से समर्थन जारी रखेगी कांग्रेस
कांग्रेस के फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पार्टी ने सरकार के खिलाफ जाने का ऐलान नहीं किया है। कांग्रेस का कहना है कि वह उमर अब्दुल्ला सरकार को बाहर से समर्थन देती रहेगी।
इससे सरकार के कामकाज पर तत्काल कोई बड़ा संकट पैदा होता नजर नहीं आ रहा, लेकिन कैबिनेट में भागीदारी से कांग्रेस के इनकार ने गठबंधन के भीतर राजनीतिक दूरी जरूर उजागर कर दी है।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर उमर अब्दुल्ला सरकार के आगामी कैबिनेट विस्तार पर है। कांग्रेस के मंत्री पद स्वीकार नहीं करने के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस को मंत्रिमंडल के गठन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर अपने विकल्प तय करने होंगे।
साथ ही, जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा आने वाले दिनों में एक बार फिर केंद्र और जम्मू-कश्मीर की राजनीति के बीच प्रमुख मुद्दा बन सकता है।
निष्कर्ष
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार में शामिल होने के नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रस्ताव को कांग्रेस ने फिलहाल ठुकरा दिया है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल होने तक वह मंत्री पद स्वीकार नहीं करेगी, हालांकि सरकार को बाहर से समर्थन जारी रखने की बात कही गई है।
इस फैसले से उमर सरकार के प्रस्तावित कैबिनेट विस्तार की तस्वीर बदल गई है। अब देखना होगा कि सरकार कांग्रेस के बिना कैबिनेट विस्तार कैसे करती है और पूर्ण राज्य के मुद्दे पर आने वाले समय में केंद्र, NC और कांग्रेस के बीच राजनीतिक समीकरण किस दिशा में जाते हैं।
रिपोर्टर; जैस्मिन कौर, मुख्य संवाददता दिल्ली

