Mayawati on GDP Growth: 7.8% विकास दर पर मायावती का तंज, बोलीं- धनवान सरकार की गरीब जनता
नई दिल्ली: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती ने देश की GDP ग्रोथ के आंकड़ों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत GDP ग्रोथ के सरकारी दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल विकास दर के ऊंचे आंकड़े सामने रखना पर्याप्त नहीं है। सरकार को यह भी बताना चाहिए कि इस विकास का वास्तविक लाभ आम जनता को कितना मिला।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए आर्थिक विकास के आंकड़ों और आम लोगों की स्थिति के बीच अंतर को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विकास की असली हकदार देश की करोड़ों मेहनतकश जनता है और विकास के आंकड़ों को जमीन पर दिखाई देने वाली स्थिति के आधार पर भी परखा जाना चाहिए।
7.8% GDP ग्रोथ पर मायावती का सवाल
मायावती ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत GDP ग्रोथ का सरकारी दावा सामने आया है। उन्होंने इस आंकड़े को लेकर सरकार से सवाल किया कि इतनी ऊंची विकास दर का फायदा देश के आम लोगों को किस रूप में मिला।
उनका कहना है कि सरकार को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि आर्थिक विकास का लाभ किस वर्ग तक पहुंचा है। सिर्फ GDP के आंकड़ों में बढ़ोतरी को विकास का पूरा पैमाना नहीं माना जा सकता।
‘धनवान सरकार की गरीब जनता’ कहकर कसा तंज
GDP के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए मायावती ने ‘धनवान सरकार की गरीब जनता’ कहकर केंद्र सरकार पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि GDP ग्रोथ के आंकड़े अपनी जगह हैं, लेकिन देश के विकास की असली हकदार करोड़ों मेहनतकश जनता है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आर्थिक विकास का मूल्यांकन आम लोगों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर भी किया जाना चाहिए। अगर विकास दर बढ़ रही है, तो उसका असर लोगों की आय, रोजगार और जीवन स्तर में भी दिखाई देना चाहिए।
गरीबी और बेरोजगारी का भी उठाया मुद्दा
मायावती ने कहा कि विकास के आंकड़ों को जमीन की हकीकत से भी परखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, अगर देश की विकास दर बढ़ रही है, लेकिन बड़ी आबादी गरीबी और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से परेशान है, तो विकास के लाभ को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने सरकार से आम जनता की आर्थिक परेशानियों पर ध्यान देने और यह सुनिश्चित करने की मांग की कि विकास का फायदा समाज के कमजोर और मेहनतकश वर्ग तक पहुंचे।
मायावती के बयान में रोजगार, आय और गरीब वर्ग की स्थिति को आर्थिक विकास से जोड़कर देखने की बात कही गई। उन्होंने संकेत दिया कि विकास के आंकड़े तभी ज्यादा मायने रखते हैं, जब उनका सकारात्मक असर आम लोगों के जीवन में दिखाई दे।
आउटसोर्स कर्मचारियों के मुद्दे पर भी बोलीं मायावती
मायावती ने उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने आउटसोर्स कर्मचारियों से संबंधित राज्य सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखने की बात कही।
उन्होंने कहा कि रोजगार से जुड़े मामलों में कर्मचारियों की स्थिति और उनके भविष्य की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। आउटसोर्स व्यवस्था में काम करने वाले कर्मचारियों को भी स्थिरता और उचित अधिकार मिलने चाहिए।
विकास के साथ जनता का हित जरूरी
मायावती के मुताबिक, देश की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन विकास का अंतिम उद्देश्य आम जनता के जीवन में सुधार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्थिक आंकड़ों के साथ-साथ यह भी देखना जरूरी है कि गरीब, मजदूर और अन्य मेहनतकश वर्ग की स्थिति में कितना बदलाव आया है।
उनके बयान के बाद GDP ग्रोथ के आंकड़ों और उसके आम जनता तक पहुंचने वाले लाभ को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। मायावती ने अपने बयान के जरिए केंद्र सरकार से विकास के आंकड़ों के साथ उनकी जमीनी तस्वीर भी जनता के सामने रखने की मांग की है।
नोट: इस खबर में मायावती के बयान और राजनीतिक आरोपों को उनके द्वारा व्यक्त किए गए विचारों के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
रिपोर्टर; तेजिंदर सिंह, मुख्य संवाददता उत्तराखण्ड
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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