NIA Myanmar Drone Attack: म्यांमार में विमान पर ड्रोन हमले से जुड़े 7 विदेशी नागरिकों पर बड़ा दावा
नई दिल्ली: भारत के खिलाफ कथित साजिश के मामले में गिरफ्तार सात विदेशी नागरिकों को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दिल्ली की अदालत में बड़ा दावा किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन आरोपियों का संबंध पड़ोसी देश म्यांमार में एक नागरिक विमान पर हुए ड्रोन हमले से सामने आया है। आरोपियों में छह यूक्रेनी नागरिक और एक अमेरिकी नागरिक शामिल हैं। सभी फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं।
NIA ने अदालत में कहा कि केंद्र सरकार को ऐसी विश्वसनीय सूचना मिली थी, जिसमें कुछ यूक्रेनी और अमेरिकी नागरिकों के म्यांमार में एक नागरिक विमान पर हुए ड्रोन हमले में शामिल होने की जानकारी थी। एजेंसी का कहना है कि इस मामले की जांच में आरोपियों की गतिविधियों और उनके कथित नेटवर्क से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं।
ड्रोन वॉरफेयर की ट्रेनिंग देने का आरोप
NIA के मुताबिक, 14 यूक्रेनी नागरिक अलग-अलग तारीखों पर टूरिस्ट वीजा के जरिए भारत पहुंचे थे। इसके बाद वे गुवाहाटी पहुंचे और कथित तौर पर आवश्यक परमिट के बिना मिजोरम गए। जांच एजेंसी का आरोप है कि इनमें से कुछ लोग अवैध तरीके से म्यांमार में दाखिल हुए और वहां म्यांमार स्थित जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन वॉरफेयर, ड्रोन ऑपरेशन, ड्रोन असेंबली और जैमिंग टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग दी।
एजेंसी ने यह भी दावा किया कि गिरफ्तार सात विदेशी नागरिक पहले भी इसी तरह मिजोरम के रास्ते म्यांमार गए थे। NIA के अनुसार, उन्होंने दो अलग-अलग मौकों पर ट्रेनिंग दी और यूरोप से ड्रोन तथा उनके जरूरी पार्ट्स की बड़ी खेप भारत के रास्ते म्यांमार पहुंचाई।
भारतीय सुरक्षा को खतरा होने का दावा
NIA ने अदालत में दावा किया कि जिन जातीय सशस्त्र समूहों को कथित तौर पर ड्रोन और तकनीकी ट्रेनिंग दी गई, उनमें से कुछ पर भारत में सक्रिय प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों का समर्थन करने का आरोप है।
एजेंसी के अनुसार, ऐसे समूह हथियार, आतंकी गतिविधियों से जुड़े उपकरण और प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर भारतीय सुरक्षा हितों को प्रभावित कर सकते हैं। इसी आधार पर जांच एजेंसी मामले में व्यापक साजिश और संभावित नेटवर्क की जांच कर रही है।
इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से मिला डेटा जांच में अहम
NIA ने अदालत को बताया कि आरोपियों से जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से डेटा निकाला गया है। इस डेटा की जांच के दौरान कई तथ्य और सामग्री सामने आई, जिनका संबंध जांच के दायरे को आगे बढ़ाने से है।
जांच एजेंसी का कहना है कि डिजिटल सामग्री की जांच से आरोपियों की गतिविधियों, संपर्कों और कथित नेटवर्क के बारे में अतिरिक्त जानकारी हासिल करने में मदद मिल सकती है। इसी आधार पर NIA आगे की पूछताछ करना चाहती है।
दो आरोपियों से पूछताछ की कोर्ट से मिली अनुमति
दिल्ली की अदालत ने 31 अगस्त को NIA को दो आरोपियों से तिहाड़ जेल में पूछताछ की अनुमति दी। इनमें अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और यूक्रेनी नागरिक विक्टर कामिंस्की शामिल हैं। NIA का कहना है कि इन दोनों से पूछताछ के जरिए कथित बड़ी साजिश और म्यांमार में बैठे संभावित मास्टरमाइंड तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
अदालत ने कहा कि NIA मामले की जांच कर रही है और सामान्य तौर पर अदालतों को जांच में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। पूछताछ के दौरान यूक्रेनी आरोपी के लिए दुभाषिए की मदद लेने की बात भी सामने आई है।
मार्च में हुई थी विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी
NIA ने मार्च 2026 में सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। इनमें एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। एजेंसी ने आरोप लगाया था कि ये लोग भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में बिना जरूरी अनुमति के जाने और फिर म्यांमार में प्रवेश करने से जुड़े मामले में शामिल थे।
मामले की शुरुआती जांच में NIA ने कथित ड्रोन ट्रेनिंग और यूरोप से ड्रोन की खेप म्यांमार पहुंचाने की बात कही थी। अब म्यांमार में नागरिक विमान पर हुए ड्रोन हमले से कथित संबंध की जानकारी सामने आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है।
NIA की अर्जी में देरी पर कोर्ट की टिप्पणी
मामले में NIA की अर्जी देर से दाखिल किए जाने के पहलू पर अदालत ने भी टिप्पणी की। हालांकि अदालत ने जांच एजेंसी को आरोपियों से पूछताछ की अनुमति दी है और मामले की जांच आगे जारी है।
NIA का कहना है कि पूछताछ का उद्देश्य केवल आरोपियों की भूमिका स्पष्ट करना ही नहीं, बल्कि कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और पूरी साजिश की जानकारी हासिल करना भी है।
आगे क्या?
NIA अब इलेक्ट्रॉनिक डेटा, आरोपियों की कथित यात्राओं और म्यांमार में उनके संपर्कों की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है। एजेंसी का फोकस इस बात पर भी है कि कथित तौर पर ड्रोन और उसके पार्ट्स किस नेटवर्क के जरिए म्यांमार पहुंचे और ड्रोन ट्रेनिंग में किन लोगों की भूमिका थी।
फिलहाल मामले में सामने आए तथ्य NIA के जांच संबंधी दावे हैं और आरोपियों की भूमिका का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना बाकी है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और म्यांमार में ड्रोन हमले से इसके संबंध को लेकर और जानकारी सामने आने की संभावना है।
रिपोर्टर; तेजिंदर सिंह, मुख्य संवाददता उत्तराखण्ड
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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