सत्या निकेतन हादसा: 7 छात्रों की मौत पर AAP का BJP सरकार पर हमला
नई दिल्ली। दिल्ली के सत्या निकेतन इलाके में छात्रावास की पांच मंजिला इमारत ढहने की घटना के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। हादसे में सात लोगों की मौत हुई है। घटना ने राजधानी में छात्रों के लिए पीजी और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ भवनों की निगरानी और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता घनेंद्र भारद्वाज ने इस हादसे को लेकर दिल्ली की बीजेपी सरकार और बीजेपी शासित दिल्ली नगर निगम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार और MCD की कथित लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण मासूम छात्रों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
भारद्वाज ने दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि छात्रों की मौत के बाद पीड़ित परिवारों के साथ खड़े होने और शोक व्यक्त करने के बजाय मंत्री फोटो-शूट और सोशल मीडिया पर रील बनाने में व्यस्त हैं। हालांकि, ये आरोप आम आदमी पार्टी की ओर से लगाए गए हैं।
सत्या निकेतन में रविवार को एक पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई थी। यह इमारत निजी छात्रावास के तौर पर इस्तेमाल की जा रही थी और इसमें बड़ी संख्या में छात्र रहते थे। राहत एवं बचाव अभियान के दौरान कई लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया, जबकि बाद में मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई।
हादसे के बाद इमारत की संरचना, निर्माण और सुरक्षा मानकों को लेकर जांच शुरू हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, इमारत में कथित अनधिकृत निर्माण और बेसमेंट से जुड़े काम की भी जांच की जा रही है। MCD ने लापरवाही के आरोपों के बीच कई अधिकारियों को निलंबित किया है।
मामले में पुलिस ने इमारत के मालिक परिवार के सदस्यों सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इमारत में निर्माण और पीजी संचालन से जुड़े नियमों का पालन हुआ था या नहीं और हादसे के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है।
हादसे के बाद दिल्ली में छात्रों के लिए सुरक्षित आवास की कमी का मुद्दा भी सामने आया है। दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े संस्थानों में हॉस्टल की सीमित उपलब्धता के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थी निजी पीजी और हॉस्टल में रहने को मजबूर हैं। सत्या निकेतन हादसे के बाद छात्रों की सुरक्षा और निजी छात्रावासों के नियमन को लेकर बहस तेज हो गई है।
इसी बीच दिल्ली में छात्र आवासों की सुरक्षा और उपलब्धता को लेकर सरकार ने कदम उठाने की बात कही है। उपराज्यपाल द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति को छात्र आवासों की कमी, सुरक्षा प्रोटोकॉल, संरचनात्मक सुरक्षा और शिकायत व्यवस्था से जुड़े सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई है।
आम आदमी पार्टी ने हादसे की जिम्मेदारी तय करने, दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने तथा मृतकों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग उठाई है। अब निगाहें जांच रिपोर्ट और सरकार की आगे की कार्रवाई पर हैं।

