अमेठी में मतदाता सूची में बड़ी गड़बड़ी का आरोप: 200 जिंदा लोगों के नाम गायब, मृतकों के नाम बरकरार, चंदा जुटाकर हाईकोर्ट पहुंचे ग्रामीण
उपशीर्षक: पंचायत चुनाव से पहले अमेठी में मतदाता सूची को लेकर विवाद गहराया, बीएलओ सर्वे और बार-बार शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं होने का आरोप, ग्रामीणों ने न्यायालय से लगाई गुहार।
अमेठी, 27 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में पंचायत मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 200 जीवित मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गायब हैं, जबकि कई ऐसे लोगों के नाम अब भी दर्ज हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में कई बार शिकायत करने और बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) द्वारा सर्वे किए जाने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं किया गया।
मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों से परेशान ग्रामीणों ने आखिरकार चंदा जुटाकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले ने पंचायत चुनाव की तैयारियों और मतदाता सूची के सत्यापन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
40 वर्षों से मतदान करने वाले ग्रामीणों के नाम भी सूची से गायब
स्थानीय ग्रामीणों मोहम्मद अयाज खान, मोहम्मद रेयाज और हालिकुल निशा ने बताया कि वे पिछले करीब 40 वर्षों से लगातार मतदान करते आ रहे हैं। इसके बावजूद इस बार पंचायत मतदाता सूची में उनके नाम नहीं हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने सूची की जांच की तो बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम गायब मिले। दूसरी ओर कई मृत व्यक्तियों के नाम सूची में मौजूद होने की बात सामने आई।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि आखिर किस आधार पर जीवित लोगों के नाम हटाए गए और मृत व्यक्तियों के नाम सूची में कैसे बने रहे।
उनका आरोप है कि इस तरह की गड़बड़ियां न केवल चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को प्रभावित करती हैं, बल्कि पात्र नागरिकों को मतदान के अधिकार से भी वंचित कर सकती हैं।
बार-बार शिकायत के बाद भी नहीं हुआ समाधान
ग्रामीणों के मुताबिक, मतदाता सूची में गड़बड़ी सामने आने के बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों से शिकायत की थी। इसके बाद बीएलओ स्तर पर सर्वे भी कराया गया, लेकिन आरोप है कि सूची में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने प्रशासन से मांग की थी कि गांव में दोबारा सत्यापन कराया जाए और सभी पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल किए जाएं।
इसके साथ ही जिन व्यक्तियों की मृत्यु हो चुकी है, उनके नाम निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार हटाए जाएं।
हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं मिला।
चंदा जुटाकर हाईकोर्ट पहुंचे ग्रामीण
मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रशासनिक स्तर पर समाधान नहीं मिलने के बाद ग्रामीणों ने न्यायालय की शरण लेने का फैसला किया।
ग्रामीणों के अनुसार, आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण उन्होंने आपस में चंदा एकत्र किया और कानूनी प्रक्रिया शुरू की।
ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में दर्ज कराना है।
उन्होंने न्यायालय से मामले की निष्पक्ष जांच और मतदाता सूची में आवश्यक सुधार सुनिश्चित कराने की गुहार लगाई है।
हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद प्रशासनिक हलचल
मामला हाईकोर्ट तक पहुंचने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी गतिविधियां तेज होने की जानकारी सामने आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि न्यायालय में सुनवाई के बाद संबंधित अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया। हालांकि, मतदाता सूची में कितने नामों का सत्यापन किया गया और कितनी प्रविष्टियों में सुधार हुआ, इसकी पूरी आधिकारिक जानकारी स्पष्ट नहीं है।
ग्रामीणों की मांग है कि केवल औपचारिक जांच करने के बजाय वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जाए, ताकि किसी भी पात्र नागरिक का मतदान अधिकार प्रभावित न हो।
अपर जिलाधिकारी ने दी सफाई
मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर जिला प्रशासन का पक्ष भी सामने आया है।
अपर जिलाधिकारी स्तर पर मामले को लेकर स्पष्टीकरण दिए जाने की जानकारी है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में अधिकारी का पूरा बयान और जांच की अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है।
ऐसे में ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों को अभी जांच का विषय माना जाना चाहिए। यह भी स्पष्ट होना आवश्यक है कि संबंधित मतदाताओं के नाम किन परिस्थितियों में सूची से हटे और मृत व्यक्तियों के नाम दर्ज रहने की शिकायतों में कितनी सत्यता है।
पंचायत चुनाव से पहले मतदाता सूची की शुद्धता पर सवाल
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच अमेठी का यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पंचायत चुनाव में मतदाता सूची की भूमिका बेहद अहम होती है। इसी सूची के आधार पर यह निर्धारित होता है कि संबंधित ग्राम पंचायत क्षेत्र में कौन-कौन मतदान करने के लिए पात्र हैं।
यदि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची में नहीं है, तो वह मतदान के दिन अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर पाएगा। वहीं, मृत व्यक्तियों के नाम सूची में बने रहने से अभिलेखों की शुद्धता और सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।
हालांकि, किसी मृत व्यक्ति का नाम सूची में दर्ज होने मात्र से यह साबित नहीं होता कि उसके नाम पर फर्जी मतदान हुआ है।
बीएलओ की भूमिका और जिम्मेदारी पर उठे सवाल
मतदाता सूची के सत्यापन में बूथ लेवल अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
बीएलओ का काम निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदाताओं से संबंधित जानकारी जुटाना, नई प्रविष्टियों और संशोधन संबंधी विवरणों का सत्यापन करना तथा संबंधित निर्वाचन अधिकारियों तक जानकारी पहुंचाना होता है।
अमेठी के ग्रामीणों का आरोप है कि सर्वे के बावजूद बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची में नहीं जोड़े गए।
ऐसे में यह जांच का विषय है कि संबंधित मतदाताओं के नाम पहले से सूची में मौजूद थे या नहीं, नाम हटाए जाने की प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं और ग्रामीणों की शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई।
ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और मतदाता सूची में सामने आई कथित अनियमितताओं को दूर किया जाए।
उनका कहना है कि वर्षों से मतदान करते आ रहे नागरिकों के नाम अचानक सूची से गायब होना गंभीर चिंता का विषय है।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम सूची में नहीं हैं, उन्हें आवश्यक दस्तावेजों और सत्यापन के आधार पर शामिल किया जाए।
इसके अतिरिक्त मृत व्यक्तियों के नाम हटाने तथा गलत प्रविष्टियों को ठीक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
मतदाता सूची में नाम नहीं होने पर क्या करें?
पंचायत मतदाता सूची में नाम नहीं मिलने की स्थिति में संबंधित नागरिक राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा या आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
मतदाताओं को सबसे पहले संबंधित पंचायत की आधिकारिक मतदाता सूची में अपना नाम जांचना चाहिए। नाम नहीं होने या विवरण गलत मिलने पर निर्धारित अवधि में संबंधित निर्वाचन अधिकारी के समक्ष आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन किया जा सकता है।
मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया संबंधित चुनाव नियमों और अधिसूचित कार्यक्रम के अनुसार पूरी की जाती है।
अब न्यायालय और प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
अमेठी में पंचायत मतदाता सूची का विवाद अब न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
ग्रामीणों की शिकायतों ने यह सवाल खड़ा किया है कि मतदाता सूची के सत्यापन में आखिर किस स्तर पर चूक हुई और यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो उनकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
फिलहाल ग्रामीणों को उम्मीद है कि न्यायालय और प्रशासन की कार्रवाई से उनकी समस्याओं का समाधान होगा तथा सभी पात्र नागरिकों को मतदान का अवसर मिल सकेगा।
अमेठी का यह मामला केवल एक गांव या कुछ मतदाताओं के नामों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय लोकतंत्र में मतदाता सूची की शुद्धता, प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिकों के मतदान अधिकार से भी जुड़ा है। अब जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगा कि ग्रामीणों के आरोपों में कितनी सच्चाई है।

