दिल्ली हाईकोर्ट से महिला पत्रकार को फिलहाल राहत नहीं, ACP विवेक भगत पर कथित जातिसूचक टिप्पणी के मामले में जांच जारी
उपशीर्षक: जंतर-मंतर के पास एसीपी से कथित अभद्रता और जातिसूचक टिप्पणी का मामला, हाईकोर्ट ने जांच पर रोक लगाने से किया इनकार, दिल्ली पुलिस और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी।
नई दिल्ली, 27 अक्टूबर 2026। दिल्ली हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर के पास एक सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) के खिलाफ कथित जातिसूचक टिप्पणी करने के आरोप में दर्ज मामले में महिला पत्रकार को फिलहाल राहत देने से इनकार कर दिया है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने एफआईआर की जांच पर अंतरिम रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की। हालांकि, अदालत ने दिल्ली पुलिस और शिकायतकर्ता एसीपी विवेक भगत को नोटिस जारी कर मामले में जवाब मांगा है।
महिला पत्रकार ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए उसे रद्द करने की मांग की है। उनकी ओर से अदालत में दलील दी गई कि पुलिस अधिकारी की शिकायत पर दर्ज मामला दुर्भावनापूर्ण है और यह उनके द्वारा पहले की गई शिकायत के जवाब में बदले की कार्रवाई के रूप में दर्ज कराया गया है।
मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा की अदालत में हुई।
जंतर-मंतर के पास हुई घटना से जुड़ा है मामला
यह विवाद दिल्ली के जंतर-मंतर के पास हुई एक घटना से संबंधित है। आरोप है कि एक महिला पत्रकार ने वहां मौजूद सहायक पुलिस आयुक्त विवेक भगत के खिलाफ कथित रूप से जातिसूचक टिप्पणी की थी।
इस संबंध में एसीपी की शिकायत पर महिला पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
महिला पत्रकार ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने अदालत से एफआईआर रद्द करने और मामले की जांच पर रोक लगाने की मांग की।
हालांकि, अदालत ने इस चरण पर जांच रोकने का आदेश नहीं दिया।
जस्टिस मिनी पुष्कर्णा ने जारी किया नोटिस
मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा ने दिल्ली पुलिस और शिकायतकर्ता एसीपी विवेक भगत को नोटिस जारी किया।
अदालत ने संबंधित पक्षों से महिला पत्रकार की याचिका पर जवाब मांगा है।
महिला पत्रकार की ओर से अंतरिम राहत के रूप में जांच पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था, लेकिन अदालत ने फिलहाल ऐसा आदेश पारित नहीं किया।
इसका अर्थ है कि जांच पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगी है। हालांकि, एफआईआर रद्द करने की मुख्य याचिका पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है।
महिला पत्रकार के वकील ने एफआईआर को बताया बदले की कार्रवाई
सुनवाई के दौरान महिला पत्रकार की ओर से पेश वकील ने पुलिस अधिकारी की शिकायत पर दर्ज एफआईआर की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
वकील ने दलील दी कि यह एफआईआर दुर्भावनापूर्ण है और महिला पत्रकार को उनकी ओर से पहले की गई शिकायत के कारण निशाना बनाया गया है।
बचाव पक्ष का कहना था कि महिला पत्रकार ने संबंधित घटनाक्रम को लेकर पहले पुलिस से संपर्क किया था।
वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि मामले की परिस्थितियों को देखते हुए जांच पर अंतरिम रोक लगाई जाए।
हालांकि, अदालत ने इस स्तर पर जांच रोकने की मांग स्वीकार नहीं की।
3 अक्टूबर को शिकायत दर्ज कराने थाने गई थीं पत्रकार
महिला पत्रकार के वकील ने अदालत को बताया कि उनकी मुवक्किल 3 अक्टूबर को अपनी शिकायत दर्ज कराने पुलिस स्टेशन गई थीं।
बचाव पक्ष ने दावा किया कि महिला पत्रकार की शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई और बाद में उनके खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दी गई।
वकील ने इसी घटनाक्रम का हवाला देते हुए एसीपी की शिकायत पर दर्ज मामले को प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताया।
हालांकि, महिला पत्रकार के वकील की ओर से लगाए गए ये आरोप न्यायालय में प्रस्तुत दलीलों का हिस्सा हैं। इनकी सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
एफआईआर रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट पहुंचीं पत्रकार
महिला पत्रकार ने अपने खिलाफ दर्ज मामले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
याचिका में एफआईआर रद्द करने की मांग की गई है। इसके साथ ही अदालत से अनुरोध किया गया कि याचिका के अंतिम निस्तारण तक जांच की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
बचाव पक्ष का तर्क है कि एफआईआर दर्ज किए जाने के पीछे वास्तविक आपराधिक शिकायत के बजाय व्यक्तिगत विवाद और दुर्भावना की भूमिका है।
दूसरी ओर, शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच अभी जारी है।
अदालत ने जांच रोकने से क्यों किया इनकार?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत ने महिला पत्रकार को तत्काल अंतरिम राहत नहीं दी और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
हालांकि, जांच पर रोक लगाने से इनकार करने के विस्तृत कानूनी कारणों की पुष्टि लिखित न्यायिक आदेश से ही की जा सकती है।
कानूनी रूप से एफआईआर रद्द करने की याचिका और जांच पर अंतरिम रोक लगाने की मांग दो अलग विषय हैं।
अदालत किसी मामले में अंतरिम रोक देने से इनकार कर सकती है, जबकि मुख्य याचिका पर सुनवाई जारी रह सकती है।
इसलिए मौजूदा आदेश को महिला पत्रकार के खिलाफ आरोप सिद्ध होने या उनकी याचिका अंतिम रूप से खारिज होने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
जातिसूचक टिप्पणी के आरोपों की जांच का मामला
यह मामला एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ कथित जातिसूचक टिप्पणी से संबंधित है।
भारत में जाति के आधार पर अपमान और भेदभाव से जुड़े कुछ कृत्य कानून के तहत दंडनीय हो सकते हैं। हालांकि, किसी विशेष मामले में कौन-सी कानूनी धाराएं लागू होंगी, यह घटना की परिस्थितियों, शिकायत, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करता है।
यदि किसी मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधान लगाए जाते हैं, तो उन प्रावधानों की कानूनी शर्तों का परीक्षण भी आवश्यक होता है।
इस मामले में एफआईआर की सभी धाराओं का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए किसी विशिष्ट धारा के लागू होने का दावा करना उचित नहीं होगा।
पत्रकार की शिकायत और एसीपी की एफआईआर पर सवाल
इस विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू महिला पत्रकार की ओर से पहले शिकायत किए जाने का दावा है।
बचाव पक्ष के अनुसार, महिला पत्रकार ने पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया था, लेकिन उसके बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
ऐसी परिस्थितियों में जांच के दौरान यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों पक्षों के बीच विवाद की वास्तविक शुरुआत कैसे हुई, किस पक्ष ने कब शिकायत की और संबंधित शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई।
इसके अतिरिक्त घटनास्थल पर मौजूद व्यक्तियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्य भी जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
दिल्ली पुलिस और शिकायतकर्ता के जवाब पर रहेगी नजर
हाईकोर्ट की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद अब दिल्ली पुलिस और शिकायतकर्ता एसीपी विवेक भगत का जवाब महत्वपूर्ण होगा।
अदालत के समक्ष संबंधित पक्ष अपनी-अपनी दलीलें और दस्तावेज प्रस्तुत कर सकेंगे।
महिला पत्रकार की ओर से एफआईआर को दुर्भावनापूर्ण बताए जाने के दावे तथा शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों का परीक्षण आगे की सुनवाई में किया जाएगा।
फिलहाल अदालत ने जांच पर रोक नहीं लगाई है, इसलिए पुलिस कानूनी प्रक्रिया के अनुसार मामले की जांच आगे बढ़ा सकती है।
हाईकोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार
दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहा यह मामला अब आगे की न्यायिक सुनवाई पर निर्भर करेगा।
महिला पत्रकार ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती दी है, जबकि शिकायतकर्ता एसीपी विवेक भगत की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच जारी है।
अदालत के सामने मुख्य सवाल यह होगा कि एफआईआर को रद्द करने का कोई कानूनी आधार बनता है या नहीं।
फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला पत्रकार को जांच से अंतरिम राहत नहीं दी है। हालांकि, अदालत ने एफआईआर की वैधता पर अंतिम फैसला भी नहीं सुनाया है। अब दिल्ली पुलिस और शिकायतकर्ता का जवाब आने के बाद मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

