Amitabh Kant का बड़ा बयान, क्लीन टेक्नोलॉजी में चीन का दबदबा और भारत के लिए चुनौती
इंडिया टुडे के BRICS Roundtable में नीति आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कांत ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, क्लीन टेक्नोलॉजी और भारत की औद्योगिक क्षमता को लेकर महत्वपूर्ण बातें रखीं। उन्होंने कहा कि क्लीन टेक्नोलॉजी के लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों में चीन का दबदबा है और भारत को विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इन क्षेत्रों में अपनी क्षमता तेजी से बढ़ानी होगी।
अमिताभ कांत के मुताबिक, मौजूदा दौर में क्लीन टेक्नोलॉजी वैश्विक अर्थव्यवस्था और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा का अहम हिस्सा बन चुकी है। ऐसे में भारत के लिए इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना राष्ट्रीय हित से जुड़ा विषय है।
क्लीन टेक्नोलॉजी में चीन का दबदबा
अमिताभ कांत ने बताया कि दुनिया की क्लीन टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन में चीन की मजबूत पकड़ है। उनके अनुसार, दुनिया की करीब 95 प्रतिशत क्लीन बैटरियां और लगभग 85 प्रतिशत इलेक्ट्रिक व्हीकल्स चीन से जुड़े उत्पादन तंत्र पर निर्भर हैं।
उन्होंने कहा कि सोलर पैनल, बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन और अन्य स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों में चीन ने बड़े पैमाने पर औद्योगिक क्षमता विकसित की है। यह स्थिति भारत के सामने बड़ी चुनौती के साथ-साथ अवसर भी पैदा करती है।
भारत को तेजी से बढ़ानी होगी औद्योगिक क्षमता
अमिताभ कांत के अनुसार, ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को भविष्य में क्लीन टेक्नोलॉजी पर ज्यादा ध्यान देना होगा। इसके लिए केवल तकनीक का आयात करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि भारत को उत्पादन, रिसर्च और सप्लाई चेन में अपनी क्षमता मजबूत करनी होगी।
उन्होंने भारत में निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उनका मानना है कि नई तकनीकों के विकास और बड़े पैमाने पर उत्पादन में निजी कंपनियां और स्टार्टअप अहम भूमिका निभा सकते हैं।
निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए खुल रहे क्षेत्र
भारत में औद्योगिक वृद्धि को गति देने के लिए सरकार ने कई ऐसे क्षेत्रों को निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए खोलना शुरू किया है, जिन पर पहले सरकारी नियंत्रण अधिक था।
इसका उद्देश्य देश में निवेश बढ़ाना, नई तकनीकों को प्रोत्साहित करना और उत्पादन क्षमता को मजबूत करना है। क्लीन टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भागीदारी भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थिति दिला सकती है।
चीन से प्रतिस्पर्धा के लिए नई रणनीति जरूरी
अमिताभ कांत के बयान से यह संकेत मिलता है कि भारत को क्लीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में चीन से प्रतिस्पर्धा करने के लिए लंबी अवधि की रणनीति अपनानी होगी। इसमें मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ रिसर्च एंड डेवलपमेंट, स्किल्ड वर्कफोर्स और जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता पर भी ध्यान देना होगा।
भारत के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बैटरी स्टोरेज, सोलर एनर्जी और अन्य स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन बढ़ाना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।
विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़ा क्लीन टेक
भारत सरकार ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के तहत अर्थव्यवस्था और औद्योगिक क्षमता को मजबूत करने पर जोर दे रही है। ऐसे में क्लीन टेक्नोलॉजी आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।
अमिताभ कांत की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब दुनिया तेजी से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रही है और अमेरिका, चीन, यूरोप समेत कई देश क्लीन टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ा रहे हैं। भारत के लिए इस प्रतिस्पर्धा में अपनी जगह मजबूत करना आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
भारत के सामने चुनौती और अवसर
क्लीन टेक्नोलॉजी में चीन की मौजूदा बढ़त भारत के सामने बड़ी चुनौती है, लेकिन यही क्षेत्र देश के लिए बड़ा औद्योगिक अवसर भी बन सकता है। यदि भारत उत्पादन क्षमता, तकनीकी नवाचार और निजी निवेश को बढ़ावा देता है तो वह भविष्य की वैश्विक क्लीन टेक सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण भूमिका हासिल कर सकता है।
BRICS Roundtable में अमिताभ कांत की बातों ने इस बहस को फिर सामने ला दिया है कि भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए किन तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों पर प्राथमिकता से काम करना होगा।
रिपोर्टर;जसलीन कौर, मुख्य प्रबंधक
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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