Nepal Flood: बाढ़ में 500 छात्र और 31 शिक्षक लापता, स्कूलों को भारी नुकसान
नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के बाद हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं। बाढ़ और इसके बाद आई तबाही के कारण रसुवा और नुवाकोट जिलों के करीब 500 विद्यार्थियों के लापता होने की खबर सामने आई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, रसुवा में 285 और नुवाकोट में 224 विद्यार्थी लापता बताए गए हैं।
इसके अलावा 31 शिक्षकों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 17 शिक्षक रसुवा जिले से बताए जा रहे हैं। लापता शिक्षकों में से एक का शव बरामद किया जा चुका है। आपदा के कारण कई स्कूलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
39 विद्यार्थियों के माता-पिता दोनों से संपर्क नहीं
रसुवा जिले में स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है। यहां 39 ऐसे विद्यार्थी हैं, जिनके माता-पिता दोनों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इससे इन बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
बाढ़ के कारण स्कूल भवनों और शैक्षणिक ढांचे को नुकसान पहुंचने से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। प्रशासन और शिक्षा विभाग अब प्रभावित बच्चों को दोबारा शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
कई इलाकों में फिर शुरू हो रहे स्कूल
आपदा के बाद कुछ क्षेत्रों में स्कूलों को धीरे-धीरे दोबारा खोला जा रहा है। रसुवा के नौकुण्ड गांव में 27 अगस्त से स्कूल गतिविधियां शुरू की गईं। उत्तरगया में 9 सितंबर, कालिका में 7 सितंबर और आमाछोदिङ्मो में 9 सितंबर से स्कूल दोबारा शुरू किए जाने की जानकारी दी गई है।
हालांकि, पूरी तरह क्षतिग्रस्त स्कूलों में पढ़ाई शुरू करना अभी बड़ी चुनौती है।
क्षतिग्रस्त स्कूलों के बच्चों को दूसरे स्कूलों में भेजने की तैयारी
नेपाल के शिक्षा विभाग ने बताया है कि जो स्कूल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को आसपास के दूसरे स्कूलों में स्थानांतरित कर शिक्षा देने की तैयारी की जा रही है।
इसके लिए जरूरत पड़ने पर विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था भी की जाएगी। स्थानीय समुदायों के भवनों और प्रदेश सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली जमीन का इस्तेमाल अस्थायी शैक्षणिक व्यवस्था के लिए किया जा सकता है।
आवासीय स्कूल व्यवस्था पर भी विचार
शिक्षा मंत्रालय की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में आवासीय रूप से स्कूल चलाने के विकल्प पर भी काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाढ़ से घर, स्कूल या अन्य सुविधाएं प्रभावित होने के बावजूद विद्यार्थियों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित न हो।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ उनके लिए सुरक्षित और स्थायी शैक्षणिक माहौल तैयार करना है।
बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता
नेपाल के शिक्षा विभाग ने यह भी माना है कि प्राकृतिक आपदा के कारण विद्यार्थियों में डर, तनाव और अन्य मनो-सामाजिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए नियमित पढ़ाई शुरू करने से पहले बच्चों की मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्हें आवश्यक सहयोग और परामर्श देने की जरूरत बताई गई है।
बाढ़ में अपनों से बिछड़ने, घरों और स्कूलों को नुकसान पहुंचने तथा लंबे समय तक असुरक्षा के माहौल का बच्चों पर गहरा असर पड़ सकता है।
राहत और पुनर्वास की चुनौती
नेपाल सरकार और स्थानीय प्रशासन के सामने अब राहत के साथ-साथ पुनर्वास की बड़ी चुनौती है। लापता विद्यार्थियों और शिक्षकों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाना और बच्चों की शिक्षा को दोबारा पटरी पर लाना प्राथमिकता में शामिल है।
रसुवा और नुवाकोट में बाढ़ से प्रभावित शिक्षा व्यवस्था को सामान्य होने में समय लग सकता है। प्रशासन की कोशिश है कि क्षतिग्रस्त स्कूलों के विद्यार्थियों की पढ़ाई ज्यादा लंबे समय तक बाधित न हो और उन्हें सुरक्षित वातावरण में शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।
रिपोर्टर; जैस्मिन कौर, मुख्य संवाददता दिल्ली
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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