दीप सिंह लखनऊ मुख्य संवाददाता दैनिक रुस्तम-ए-हिंद
बागपत। उत्तर प्रदेश की सियासत में किसान हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की गन्ना बेल्ट में आने वाला बागपत खेती-किसानी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण जिला है। यहां बड़ी संख्या में परिवारों की आमदनी खेती और खासतौर पर गन्ने की फसल पर निर्भर है। ऐसे में किसानों के लिए बिजली, सिंचाई, खाद और गन्ने के भुगतान जैसे मुद्दे सीधे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और आय से जुड़े हैं।
बागपत में किसानों के बीच पहुंचकर जब खेती और सरकार की व्यवस्थाओं को लेकर बातचीत की गई तो किसानों ने अलग-अलग मुद्दों पर अपने अनुभव साझा किए। किसानों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उन्हें खाद की उपलब्धता, सिंचाई के लिए बिजली और खेतों तक पहुंच से जुड़ी व्यवस्थाओं में बदलाव महसूस हुआ है। हालांकि, गन्ने के भुगतान और अन्य कृषि संबंधी समस्याएं अभी भी किसानों की बातचीत का अहम हिस्सा बनी हुई हैं।
खेतों में गन्ना, परिवारों की उम्मीद
बागपत की पहचान पश्चिमी यूपी की गन्ना बेल्ट के तौर पर होती है। यहां खेतों में खड़ी गन्ने की फसल हजारों परिवारों की आय का महत्वपूर्ण आधार है। किसान के लिए फसल केवल खेत में खड़ी उपज नहीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, परिवार के खर्च और दूसरे जरूरी कामों से जुड़ी उम्मीद भी है।
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान किसानों से जब पूछा गया कि खेती के काम में उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, तो बिजली, पानी, खाद और गन्ने के भुगतान जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए।
खाद के लिए लंबी कतारों में कमी का दावा
किसानों के मुताबिक खेती के मौसम में खाद की उपलब्धता हमेशा बड़ी चिंता रहती है। किसानों का कहना है कि पहले खाद लेने के लिए लंबी कतारों में घंटों इंतजार करना पड़ता था। अब कुछ किसानों ने व्यवस्था में सुधार महसूस होने की बात कही है और बताया कि उन्हें पहले जैसी लंबी कतारों का सामना कम करना पड़ता है।
हालांकि, खाद को लेकर किसानों की चिंताएं पूरी तरह खत्म हो गई हैं, ऐसा कहना सही नहीं होगा। सितंबर में बागपत में किसानों ने खाद की उपलब्धता को लेकर अपनी शिकायतें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने भी रखी थीं। 23 सितंबर को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान किसानों ने खाद की किल्लत के साथ गन्ना भुगतान, नहरों में पानी और बिजली से जुड़े मुद्दे भी उठाए थे।
सिंचाई के लिए बिजली में बदलाव महसूस कर रहे किसान
खेती के लिए बिजली की उपलब्धता किसानों के लिए बेहद अहम है। खासतौर पर गन्ने जैसी फसल में सिंचाई की जरूरत लगातार बनी रहती है। बागपत के किसानों ने बातचीत में कहा कि सिंचाई के लिए बिजली की स्थिति में पहले के मुकाबले बदलाव महसूस हुआ है।
किसानों के अनुसार बिजली की उपलब्धता बेहतर होने से खेतों की सिंचाई करना आसान हुआ है। उनका कहना है कि पहले रात में खेतों पर जाकर सिंचाई करने को लेकर अधिक परेशानी होती थी, जबकि अब परिस्थितियों में कुछ सुधार महसूस होता है।
उत्तर प्रदेश सरकार के 2026-27 के बजट दस्तावेज के मुताबिक, 1 अप्रैल 2023 से किसानों को ट्यूबवेल के जरिए सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था लागू है।
गन्ने के भुगतान पर किसानों की नजर
बागपत के किसान जब अपनी आमदनी की बात करते हैं तो गन्ने का भुगतान सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बन जाता है। किसान चाहते हैं कि मिल में गन्ना पहुंचाने के बाद उसका भुगतान समय पर मिले, ताकि अगली फसल और घरेलू जरूरतों के लिए पैसे की व्यवस्था की जा सके।
ग्राउंड रिपोर्ट में जिन किसानों से बातचीत हुई, उनमें से कई ने मौजूदा व्यवस्था में गन्ने के भुगतान को लेकर पहले की तुलना में सुधार महसूस करने की बात कही। किसानों ने यह भी कहा कि गन्ने के दाम में बढ़ोतरी से उन्हें राहत मिली है।
राज्य सरकार के 2026-27 के बजट दस्तावेज में कहा गया है कि 2025-26 के पेराई सत्र के लिए गन्ने के मूल्य में 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। वहीं सितंबर 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 2025-26 पेराई सत्र के गन्ना मूल्य का 94.86 प्रतिशत भुगतान किया जा चुका था और 102 चीनी मिलों ने अपने पूरे बकाये का भुगतान कर दिया था। इस सूची में बागपत की सहकारी चीनी मिल भी शामिल थी।
कानून-व्यवस्था को भी खेती से जोड़कर देखते हैं किसान
बागपत के किसानों ने खेती के साथ कानून-व्यवस्था को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। किसानों का कहना है कि खेत कई बार गांव से दूर होते हैं और सिंचाई के लिए रात में भी वहां जाना पड़ता है। ऐसे में रात के समय खेत तक सुरक्षित पहुंचना उनके लिए अहम है।
ग्राउंड रिपोर्ट में कुछ किसानों ने बताया कि पहले रात में खेत पर जाने को लेकर डर रहता था, जबकि अब उन्हें परिस्थितियों में बदलाव महसूस होता है। किसानों के लिए कानून-व्यवस्था का मुद्दा सिर्फ अपराध के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि खेत पर बेफिक्र होकर पहुंचने और सिंचाई जैसे जरूरी काम करने से भी जुड़ा है।
किसानों की समस्याएं अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं
बागपत के किसानों की तस्वीर केवल एक पक्ष की नहीं है। जहां कुछ किसानों ने खाद, बिजली और भुगतान जैसी व्यवस्थाओं में सुधार की बात कही, वहीं जिले में किसानों की ओर से समस्याएं उठाए जाने का सिलसिला भी जारी है।
23 सितंबर को बागपत में किसानों ने खाद की किल्लत, गन्ना भुगतान में देरी, नहरों में पानी और बिजली बिल माफी समेत कई मांगें उठाई थीं। किसानों ने कार्यक्रम स्थल पर नारेबाजी भी की थी, जिसके बाद प्रशासन और पुलिस ने उनसे बातचीत की।
इसी तरह 18 सितंबर को बागपत सहकारी गन्ना विकास समिति की बैठक में भी गन्ना भुगतान को लेकर किसानों की ओर से मांग उठाई गई थी। वहां 14 दिन के भीतर भुगतान नहीं होने पर ब्याज सहित भुगतान की मांग की गई थी।
बागपत के किसानों की नजर अब आगे की व्यवस्था पर
बागपत में किसानों के लिए खेती से जुड़े मुद्दे सिर्फ चुनावी बहस तक सीमित नहीं हैं। खेत में बिजली कब मिलेगी, खाद आसानी से मिलेगी या नहीं, नहर में पानी पहुंचेगा या नहीं और गन्ने का भुगतान कितने समय में होगा—ये सवाल किसानों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट में किसानों ने अपने अनुभव के आधार पर मौजूदा व्यवस्थाओं में बदलाव की बात कही। साथ ही, खाद, गन्ना भुगतान, सिंचाई और अन्य कृषि संबंधी समस्याओं को लेकर उनकी मांगें भी सामने आती रही हैं। ऐसे में बागपत के किसान अब व्यवस्था में हुए बदलाव के साथ-साथ यह भी देख रहे हैं कि आने वाले समय में इन समस्याओं का समाधान कितना स्थायी होता है।
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब
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