Bihar Flood: 15 साल से रिंग डैम का इंतजार, 20 दिन से कोसी की बाढ़ में घिरा मदरौनी गांव
बिहार के भागलपुर जिले के नवगछिया इलाके में कोसी नदी की बाढ़ ने मदरौनी गांव के लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गांव में कई घर पानी से घिरे हुए हैं और बड़ी संख्या में परिवारों को छतों या सुरक्षित स्थानों पर समय बिताना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ उनके लिए हर साल आने वाली मुसीबत बन चुकी है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं मिला है।
बाढ़ ने रोक दी जिंदगी की रफ्तार
मदरौनी गांव और आसपास के इलाकों में कोसी का पानी फैलने के बाद सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। घरों में पानी भरने से लोगों के सामने रहने, खाने-पीने और आने-जाने की समस्या खड़ी हो गई है।
कई परिवार अपने घरों की छतों पर रहने को मजबूर हैं। गांव के लोगों के मुताबिक, बाढ़ के कारण रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी नाव पर निर्भर रहना पड़ रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए स्थिति और ज्यादा चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
मदरौनी में बाढ़ की स्थिति कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हालिया रिपोर्टों के मुताबिक बड़ी संख्या में घर जलमग्न हुए हैं और कुछ परिवारों ने रेलवे ट्रैक के आसपास भी शरण ली है। पशुओं के लिए चारे की समस्या भी सामने आई है।
15 साल से रिंग डैम का इंतजार
ग्रामीणों की सबसे बड़ी शिकायत सिर्फ मौजूदा बाढ़ से नहीं, बल्कि उस स्थायी व्यवस्था से है जिसका इंतजार लंबे समय से किया जा रहा है। उनका कहना है कि रिंग डैम की मांग करीब 15 साल से चली आ रही है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, रिंग डैम मजबूत होने से कोसी के पानी से गांव और आसपास के इलाकों को हर साल होने वाले नुकसान से काफी हद तक बचाया जा सकता है। लेकिन निर्माण और मरम्मत को लेकर लंबे समय से इंतजार जारी है।
मदरौनी में रिंग बांध की समस्या नई नहीं है। वर्ष 2022 की एक रिपोर्ट में भी बताया गया था कि इलाके में रिंग बांध के निर्माण में देरी के कारण करीब दो लाख की आबादी प्रभावित हो रही थी।
हर साल बाढ़, हर साल वही परेशानी
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ आने के बाद प्रशासन और सरकार की ओर से राहत और बचाव के प्रयास किए जाते हैं, लेकिन पानी उतरने के बाद स्थायी समाधान का मुद्दा पीछे छूट जाता है।
यही वजह है कि इस बार भी ग्रामीण राहत के साथ-साथ रिंग डैम के स्थायी निर्माण की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक बाढ़ से सुरक्षा के लिए मजबूत और स्थायी व्यवस्था नहीं होगी, तब तक हर मानसून में उन्हें इसी तरह की स्थिति का सामना करना पड़ेगा।
राहत सामग्री की तत्काल जरूरत
फिलहाल बाढ़ से घिरे परिवारों के सामने सबसे बड़ी जरूरत भोजन, पीने के पानी और सुरक्षित आवागमन की है। प्रभावित इलाकों में नावों के जरिए लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाने की जरूरत बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से राहत पहुंचाई जा रही है, लेकिन प्रभावित आबादी के हिसाब से लगातार राहत व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है। बच्चों, बुजुर्गों और पशुओं के लिए विशेष इंतजाम की भी मांग की जा रही है।
सवाल सिर्फ राहत का नहीं, स्थायी समाधान का
Bihar Flood की यह तस्वीर सिर्फ पानी में डूबे घरों की कहानी नहीं है। यह उन लोगों की परेशानी भी दिखाती है जो वर्षों से बाढ़ से बचाव के स्थायी इंतजाम का इंतजार कर रहे हैं।
मदरौनी के ग्रामीणों के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक तरफ उन्हें मौजूदा बाढ़ से सुरक्षित निकालने, भोजन और पेयजल उपलब्ध कराने की जरूरत है, तो दूसरी तरफ भविष्य की बाढ़ से बचने के लिए रिंग डैम जैसे स्थायी उपाय की आवश्यकता है।
अब ग्रामीणों की निगाह प्रशासन और सरकार पर है कि मौजूदा संकट के दौरान राहत कितनी तेजी से पहुंचती है और वर्षों से लंबित स्थायी समाधान की दिशा में कब ठोस कदम उठाया जाता है।
रिपोर्टर; तेजिंदर सिंह, मुख्य संवाददता उत्तराखण्ड
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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