महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि मराठा आरक्षण आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल की 13 में से 12 मांगों को राज्य सरकार ने स्वीकार कर लिया है। मुख्यमंत्री ने यह बयान 17 सितंबर को जरांगे पाटिल द्वारा 20 दिन पुरानी भूख हड़ताल खत्म किए जाने के बाद दिया। फडणवीस ने कहा कि सरकार स्वीकार की गई मांगों को पूरा करने के लिए आगे की प्रक्रिया करेगी, जबकि एक मांग से जुड़े कानूनी पहलुओं के बारे में जरांगे को जानकारी दी गई है।
20 दिन बाद खत्म हुआ अनशन
मनोज जरांगे पाटिल ने 17 सितंबर को महाराष्ट्र के बीड जिले के पाटोदा में अपनी 20 दिन पुरानी भूख हड़ताल खत्म कर दी। उन्होंने सरकार को अपनी मांगों पर कार्रवाई के लिए तीन महीने का समय दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि तय समय में मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को मुंबई तक ले जाया जा सकता है।
जरांगे पाटिल ने इससे पहले मराठा समुदाय को ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन शुरू किया था। उनकी प्रमुख मांगों में कुनबी प्रमाणपत्र से जुड़े प्रावधान और पुराने रिकॉर्ड के आधार पर प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया शामिल रही है।
किन मुद्दों पर बनी सहमति?
रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार और जरांगे पाटिल के बीच बातचीत में कुनबी प्रमाणपत्र, पुराने गजटियर रिकॉर्ड और उपलब्ध जाति रिकॉर्ड के आधार पर प्रमाणपत्र जारी करने जैसे मुद्दे शामिल रहे। सरकार की ओर से कुछ मांगों के क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने की बात कही गई है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जरांगे पाटिल ने करीब 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड के आधार पर पात्र लोगों को प्रमाणपत्र जारी करने, कुछ ऐतिहासिक गजटियर को लागू करने और जाति वैधता प्रमाणपत्र से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई की मांग रखी है।
एक मांग पर कानूनी अड़चन
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि 13 में से एक मांग को कानूनी कारणों से स्वीकार करना संभव नहीं था। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस संबंध में अपना पक्ष जरांगे पाटिल को समझाया है। फडणवीस के मुताबिक, सरकार और मराठा आरक्षण से जुड़ी कैबिनेट उपसमिति की ओर से किए गए वादों को पूरा करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
सरकार को मिला तीन महीने का समय
जरांगे पाटिल ने भूख हड़ताल स्थगित करते हुए सरकार को तीन महीने का समय दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अगर तय समय में मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तो मुंबई में आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी गई है।
इस घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र सरकार के सामने अब स्वीकार की गई मांगों के प्रशासनिक क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है। वहीं, मराठा आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर आगे की कार्रवाई सरकार के फैसलों और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि सरकार मराठा समुदाय से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है और स्वीकार की गई मांगों को पूरा करने की दिशा में काम किया जाएगा।
रिपोर्टर; गरिमा छाबड़ा, विशेष रिपोर्टर, विपणन प्रबंधक, जनसंपर्क प्रबंधक
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