हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना को लेकर कहा है कि राज्य के हितों की रक्षा करते हुए समझौता किया गया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, परियोजना से हिमाचल प्रदेश को करीब 1,500 करोड़ रुपये का लाभ मिल सकता है, जबकि इसके लिए राज्य को अतिरिक्त निवेश नहीं करना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने 17 सितंबर को हमीरपुर जिले के नादौन विधानसभा क्षेत्र के रेल में आयोजित जनसभा में यह बात कही। उन्होंने कहा कि किशाऊ परियोजना के संबंध में सरकार ने बातचीत के दौरान हिमाचल पर प्रस्तावित वित्तीय बोझ को स्वीकार नहीं किया।
हिमाचल को हर साल मिलेगी बिजली
किशाऊ परियोजना टोंस नदी पर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा के पास प्रस्तावित है। समझौते के तहत परियोजना से हिमाचल प्रदेश को करीब 1,000 मिलियन यूनिट बिजली प्रतिवर्ष मिलने की बात कही गई है। राज्य सरकार के अनुमान के अनुसार इसकी कीमत करीब 1,200 से 1,500 करोड़ रुपये सालाना हो सकती है।
15 सितंबर को छह राज्यों—हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली—के मुख्यमंत्रियों ने किशाऊ परियोजना के कार्यान्वयन के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। केंद्र सरकार के अनुसार परियोजना में लगभग 90 प्रतिशत वित्तीय भार केंद्र सरकार उठाएगी।
करीब 2,000 करोड़ रुपये के वित्तीय बोझ का मुद्दा
मुख्यमंत्री सुक्खू के अनुसार, परियोजना के पावर कंपोनेंट से जुड़े हिमाचल के अनुमानित 2,000 करोड़ रुपये के वित्तीय हिस्से को अन्य लाभार्थी राज्यों द्वारा वहन करने पर सहमति बनी है। इनमें दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा शामिल हैं। सुक्खू ने कहा कि सीमित वित्तीय संसाधनों को देखते हुए हिमाचल के लिए इस अतिरिक्त बोझ को स्वीकार करना उचित नहीं था।
उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने परियोजना में हिमाचल की ओर से करीब 800 करोड़ रुपये का योगदान स्वीकार किया था, लेकिन मौजूदा सरकार ने राज्य के वित्तीय हितों को देखते हुए इस जिम्मेदारी को आगे नहीं बढ़ाया।
422 मेगावाट की है किशाऊ परियोजना
किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना की प्रस्तावित क्षमता 422 मेगावाट है। इसे टोंस नदी पर बनाया जाना है, जो यमुना की प्रमुख सहायक नदियों में से एक है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 15,624 करोड़ रुपये बताई गई है।
केंद्र सरकार के अनुसार प्रस्तावित बांध की ऊंचाई करीब 232.6 मीटर होगी और इसमें लगभग 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी संग्रहित करने की क्षमता होगी। परियोजना से करीब 97,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई और 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ बिजली उत्पादन का लक्ष्य है।
राज्य के हितों की रक्षा का दावा
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि उनकी सरकार ने किशाऊ परियोजना के अलावा भी हिमाचल के जल और बिजली संसाधनों से जुड़े मामलों में राज्य के हितों को प्राथमिकता दी है। उन्होंने परियोजना को लेकर विपक्षी नेताओं से भी तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने की अपील की।
किशाऊ परियोजना को लेकर छह राज्यों और केंद्र के बीच हुआ समझौता उत्तर भारत में जल संसाधनों के साझा उपयोग से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परियोजना है। परियोजना के आगे बढ़ने के साथ हिमाचल को मिलने वाले बिजली लाभ और वित्तीय दायित्वों का वास्तविक असर निर्माण और संचालन के चरण में स्पष्ट होगा।
रिपोर्टर; गरिमा छाबड़ा, विशेष रिपोर्टर, विपणन प्रबंधक, जनसंपर्क प्रबंधक
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