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पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार को लेकर इन दिनों बिजली संकट, नशा विरोधी अभियान, पराली प्रबंधन और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां प्रमुख राजनीतिक मुद्दे बने हुए हैं।
पंजाब में बिजली की मांग 16,444 मेगावाट से ऊपर पहुंचने के बीच राज्य को आपूर्ति बनाए रखने में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ बिजली संयंत्रों में तकनीकी दिक्कतों के साथ कोयले के स्टॉक की कमी ने स्थिति को और मुश्किल बनाया है। ऐसे में सरकार के सामने बिजली उत्पादन और आपूर्ति को स्थिर रखने की चुनौती है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए उद्योग जगत से सहयोग मांगा है। 9 सितंबर को उन्होंने CII के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। सरकार का लक्ष्य फसल अवशेषों के टिकाऊ प्रबंधन के साथ-साथ प्रदूषण को कम करना है। इसके अलावा हॉर्टिकल्चर और कृषि क्षेत्र में तकनीक एवं विशेषज्ञता के इस्तेमाल को बढ़ाने की बात भी सामने आई है।
पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले नशा बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। बीजेपी ने 18 सितंबर से पूरे पंजाब में ‘नशा मुक्त पंजाब यात्राएं’ निकालने का ऐलान किया है। इन यात्राओं के जरिए बीजेपी AAP सरकार को नशे और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर घेरने की तैयारी में है।
पंजाब सरकार और केंद्र के बीच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति को लेकर भी मतभेद सामने आए हैं। भगवंत मान की अध्यक्षता वाली पंजाब कैबिनेट ने जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए कहा कि राज्य सरकार से अपेक्षित परामर्श नहीं किया गया। सरकार ने नियुक्ति और शपथ ग्रहण को रोकने की मांग की है।
आम आदमी पार्टी की नई 23 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को भी शामिल किया गया है। पंजाब AAP का प्रमुख शासित राज्य है और 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी की राष्ट्रीय संरचना में पंजाब की भूमिका पर भी राजनीतिक नजरें हैं।
पंजाब में विधानसभा चुनाव करीब आने के साथ AAP, कांग्रेस, बीजेपी और अकाली दल के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। नशा, कानून-व्यवस्था, बिजली, रोजगार और कृषि से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में चुनावी बहस के केंद्र में रह सकते हैं।
निष्कर्ष: CM Punjab भगवंत मान सरकार के सामने इस समय बिजली आपूर्ति, पराली प्रबंधन और नशे जैसे मुद्दों के साथ-साथ केंद्र के साथ राजनीतिक एवं प्रशासनिक मतभेद भी चुनौती बने हुए हैं। 2027 के चुनावों को देखते हुए पंजाब की राजनीति में आने वाले दिनों में और तेजी आने की संभावना है।
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब
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