उत्तराखंड में 13 ग्लेशियल झीलें संवेदनशील, CM धामी ने बढ़ाई निगरानी; आधुनिक सेंसर और अर्ली वार्निंग सिस्टम होंगे तैनात
देहरादून, 27 अगस्त 2026। नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ और ग्लेशियर से जुड़ी आपदा के बाद उत्तराखंड सरकार भी सतर्क हो गई है। राज्य में 13 ग्लेशियल झीलों को संवेदनशील श्रेणी में चिह्नित किया गया है। संभावित खतरे को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन झीलों की नियमित और वैज्ञानिक निगरानी के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने राज्य आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन को संवेदनशील ग्लेशियल झीलों का व्यापक सर्वेक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही संवेदनशील इलाकों में अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने और जरूरत के अनुसार उनकी संख्या बढ़ाने को कहा गया है।
नेपाल की आपदा के बाद उत्तराखंड में बढ़ी सतर्कता
नेपाल में ग्लेशियर से जुड़ी आपदा के बाद हिमालयी क्षेत्रों में संभावित बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने भी संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में ग्लेशियल झीलों, नदियों के जलस्तर, संवेदनशील स्थानों, अर्ली वार्निंग सिस्टम, संचार व्यवस्था और आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव की तैयारियों की समीक्षा की गई।
जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि अपने-अपने जिलों में संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की नियमित निगरानी करें। किसी भी तरह की असामान्य गतिविधि सामने आने पर उसकी सूचना तत्काल उच्च अधिकारियों को देने के लिए भी कहा गया है।
13 ग्लेशियल झीलें संवेदनशील श्रेणी में
राज्य आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार, उत्तराखंड में कुल 13 ग्लेशियल झीलों को संवेदनशील के तौर पर चिन्हित किया गया है। इनमें से चार झीलों का सर्वेक्षण पहले ही पूरा किया जा चुका है।
बाकी संवेदनशील झीलों का सर्वेक्षण भी चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। वैज्ञानिक अध्ययन के दौरान झीलों की मौजूदा स्थिति, पानी का स्तर, आकार में होने वाले बदलाव, आसपास के भूभाग और संभावित खतरे वाले क्षेत्रों का आकलन किया जाएगा।
सरस्वती ताल और केदारताल का जल्द होगा सर्वे
सरकार ने संवेदनशील झीलों के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए विशेषज्ञ टीमों को मैदान में उतारने की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक, चमोली जिले की सरस्वती ताल और उत्तरकाशी जिले की केदारताल का सर्वेक्षण करने के लिए जल्द ही विशेषज्ञ दल भेजा जाएगा।
सर्वे के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि इन झीलों में पानी का स्तर कितना है, उनके आकार में हाल के समय में कोई बदलाव हुआ है या नहीं और आसपास का भूभाग संभावित आपदा की स्थिति में कितना संवेदनशील है।
आधुनिक सेंसर और अर्ली वार्निंग सिस्टम से होगी निगरानी
मुख्यमंत्री धामी ने संवेदनशील ग्लेशियल झीलों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया है। अधिकारियों को आधुनिक सेंसर, जलस्तर मापने वाले उपकरण और संचार प्रणालियां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इन तकनीकी प्रणालियों का उद्देश्य झीलों के जलस्तर या अन्य परिस्थितियों में होने वाले असामान्य बदलाव की जानकारी समय रहते हासिल करना है। संभावित खतरे की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों तक जल्द चेतावनी पहुंचाने की व्यवस्था भी मजबूत की जाएगी।
संभावित खतरे वाले इलाकों की भी होगी पहचान
सरकार केवल ग्लेशियल झीलों की निगरानी तक सीमित नहीं रहना चाहती। झीलों के आसपास और नीचे आने वाले क्षेत्रों में भी संभावित जोखिम का आकलन किया जाएगा।
आपदा की स्थिति में किन इलाकों को सबसे पहले खाली कराना पड़ सकता है, लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए कौन से रास्ते इस्तेमाल किए जा सकते हैं और स्थानीय स्तर पर राहत एवं बचाव के लिए कौन से संसाधन उपलब्ध हैं—इन सभी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है।
सुरक्षित निकासी और संचार व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश
CM पुष्कर सिंह धामी ने संभावित आपदा की स्थिति में सुरक्षित निकासी मार्ग, संचार नेटवर्क और स्थानीय चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने पर भी जोर दिया है।
सरकार का उद्देश्य यह है कि यदि किसी ग्लेशियल झील में अचानक जलस्तर बढ़ता है या किसी अन्य तरह का खतरा पैदा होता है, तो प्रशासन के पास लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए पर्याप्त समय और संसाधन उपलब्ध हों।
इसके अलावा जिलों में राहत एवं बचाव की तैयारियों को भी मजबूत किया जा रहा है।
जिलाधिकारियों को लगातार निगरानी के निर्देश
आपदा प्रबंधन विभाग की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में जोखिम वाले स्थानों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों से कहा गया है कि किसी भी असामान्य गतिविधि, जलस्तर में अचानक बदलाव या संभावित खतरे के संकेत मिलने पर तत्काल उच्च स्तर पर सूचना दी जाए। इससे जरूरत पड़ने पर स्थानीय प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
पहाड़ी क्षेत्रों में क्यों जरूरी है सतर्कता?
उत्तराखंड का बड़ा हिस्सा हिमालयी क्षेत्र में आता है और यहां कई ग्लेशियर, हिमनद झीलें और ऊंचाई वाले संवेदनशील क्षेत्र मौजूद हैं। ग्लेशियल झीलों में पानी का स्तर बढ़ने या प्राकृतिक संरचना में बदलाव होने पर नीचे के इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।
ऐसे में समय रहते खतरे की पहचान और स्थानीय स्तर पर चेतावनी जारी करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी वजह से सरकार वैज्ञानिक सर्वेक्षण और आधुनिक निगरानी प्रणालियों पर जोर दे रही है।
CM धामी का आपदा प्रबंधन पर फोकस
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संभावित आपदाओं से निपटने में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। सरकार का फोकस केवल आपदा आने के बाद राहत पहुंचाने के बजाय पहले से जोखिम की पहचान और समय रहते चेतावनी देने की व्यवस्था मजबूत करने पर है।
13 संवेदनशील ग्लेशियल झीलों का सर्वेक्षण, आधुनिक सेंसर की स्थापना, अर्ली वार्निंग सिस्टम, सुरक्षित निकासी मार्ग और संचार व्यवस्था को मजबूत करना इसी तैयारी का हिस्सा है।
सरकार की तैयारी का उद्देश्य क्या है?
उत्तराखंड सरकार की मौजूदा तैयारी का मुख्य उद्देश्य संभावित ग्लेशियल झील से जुड़ी आपदा के खतरे को समय रहते पहचानना और उससे प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में नुकसान को कम करना है।
चार झीलों का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, जबकि बाकी झीलों का वैज्ञानिक अध्ययन चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। सरस्वती ताल और केदारताल के सर्वे के लिए विशेषज्ञों की टीम जल्द भेजी जाएगी।
इस पूरी प्रक्रिया के जरिए सरकार संवेदनशील क्षेत्रों में बेहतर निगरानी, समय पर चेतावनी और तेज राहत-बचाव व्यवस्था सुनिश्चित करना चाहती है।
फिलहाल उत्तराखंड सरकार नेपाल में हुई हालिया आपदा के बाद हिमालयी क्षेत्रों में किसी भी संभावित खतरे को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है। मुख्यमंत्री धामी के निर्देशों के बाद राज्य में ग्लेशियल झीलों और जोखिम वाले क्षेत्रों की निगरानी को और मजबूत करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
रिपोर्टर; सतविंदर, कौर मुख्य संवाददाता हरियाणा

