हिमाचल में CM सुक्खू का बड़ा ऐलान, माइनिंग के लिए बनेगा अलग विभाग, नई ड्रेजिंग पॉलिसी आएगी
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य में माइनिंग और नदी ड्रेजिंग को लेकर बड़ा ऐलान किया है। सरकार अब माइनिंग से जुड़ी सभी गतिविधियों को एक व्यवस्था के तहत लाने के लिए अलग माइनिंग विभाग बनाने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही नदियों से जमा गाद, रेत, बजरी और मलबा हटाने के लिए नई ड्रेजिंग पॉलिसी भी तैयार की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने यह जानकारी हिमाचल प्रदेश विधानसभा में दी। सरकार का मानना है कि माइनिंग और ड्रेजिंग व्यवस्था को व्यवस्थित करने से राज्य की आय बढ़ाई जा सकती है और हिमाचल को आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिल सकती है।
माइनिंग के लिए बनेगा अलग विभाग
CM सुक्खू ने विधानसभा में कहा कि वर्तमान में ड्रेजिंग का काम हिमाचल प्रदेश वन निगम के माध्यम से किया जा रहा है। प्रस्तावित अलग विभाग के बनने के बाद माइनिंग से जुड़ी गतिविधियों को एक ही व्यवस्था के तहत लाने की कोशिश होगी।
मुख्यमंत्री के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में माइनिंग क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। सरकार का अनुमान है कि इस क्षेत्र को व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जाए तो राज्य को ₹3,000 करोड़ तक का राजस्व प्राप्त हो सकता है।
नई ड्रेजिंग पॉलिसी लाएगी सरकार
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने भी विधानसभा में बताया कि ड्रेजिंग और माइनिंग अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। इन्हें ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार एक नई ड्रेजिंग पॉलिसी तैयार करेगी।
इस नीति का उद्देश्य नदियों और जलाशयों में लंबे समय से जमा गाद, रेत, बजरी और अन्य सामग्री को व्यवस्थित तरीके से हटाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। सरकार इसके जरिए राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ नदी तल में जमा सामग्री से जुड़ी समस्याओं को भी कम करना चाहती है।
ब्यास नदी की ड्रेजिंग को लेकर सवाल
मुख्यमंत्री का यह बयान बीजेपी विधायक सुरेंद्र शौरी की ओर से ब्यास नदी और उसकी सहायक नदियों की ड्रेजिंग को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में आया।
CM सुक्खू ने बताया कि नदियों में जमा सामग्री को हटाने के लिए पहले भी प्रयास किए गए हैं, लेकिन ड्रेजिंग के बाद निकाली गई सामग्री के इस्तेमाल और माइनिंग अनुमति से जुड़े नियमों के कारण कई तरह की दिक्कतें सामने आईं।
सरकार अब इन प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने की कोशिश कर रही है।
2023 की आपदा के बाद बढ़ी जरूरत
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2023 की आपदा के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नदियों में जमा सामग्री को हटाने के लिए ड्रेजिंग की जरूरत पर जोर दिया था।
इसके बाद उद्योग विभाग की ओर से ड्रेजिंग की अनुमति दी गई, लेकिन ड्रेजिंग से निकलने वाली सामग्री को निकालने और उसका इस्तेमाल करने के लिए जरूरी माइनिंग अनुमति हासिल करने में परेशानी हुई।
सरकार का कहना है कि नियमों और विभागीय प्रक्रियाओं के बीच तालमेल की कमी के कारण ड्रेजिंग की प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
तीन हजार करोड़ रुपये तक राजस्व का अनुमान
हिमाचल सरकार माइनिंग और ड्रेजिंग को राजस्व बढ़ाने के एक महत्वपूर्ण माध्यम के तौर पर देख रही है। CM सुक्खू ने विधानसभा में कहा कि हिमाचल में इस क्षेत्र से ₹3,000 करोड़ तक राजस्व प्राप्त करने की क्षमता है।
उन्होंने उत्तराखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सीमित संख्या में बड़ी नदियां होने के बावजूद माइनिंग से करीब ₹300-400 करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है। हिमाचल में इससे कहीं अधिक संभावनाएं मौजूद हैं।
324 माइनिंग साइट में सिर्फ कुछ को मिली वन मंजूरी
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने विधानसभा में बताया कि हिमाचल प्रदेश में करीब 324 माइनिंग साइट चिन्हित की गई हैं, लेकिन इनमें से केवल पांच या छह साइट को ही वन मंजूरी मिल पाई है।
उन्होंने बताया कि कुल्लू में 44 साइट की नीलामी की गई थी, लेकिन कई जगह वन विभाग के अधिकारियों ने वन मंजूरी नहीं होने के कारण सामग्री निकालने की अनुमति नहीं दी।
वन मंजूरी से जुड़ी समस्या को दूर करने के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर भी चर्चा की जा रही है।
ड्रेजिंग से निकली सामग्री के इस्तेमाल पर भी पेंच
द्रेजिंग के बाद निकलने वाली रेत, बजरी और अन्य सामग्री के इस्तेमाल को लेकर भी कई नियम लागू हैं। सरकार के सामने चुनौती यह है कि एक तरफ नदियों से जमा सामग्री हटानी है, वहीं दूसरी तरफ उस सामग्री के परिवहन, बिक्री और नीलामी से जुड़े नियमों का पालन भी करना है।
उद्योग मंत्री के अनुसार अदालतों के फैसलों के तहत ड्रेजिंग से निकली सामग्री की नीलामी की जा सकती है, लेकिन उसे सीधे बेचने की अनुमति नहीं है। यही वजह है कि सरकार एक स्पष्ट ड्रेजिंग नीति बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
केंद्र के साथ नियमों में बदलाव पर चर्चा
CM सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ड्रेजिंग और माइनिंग को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार के साथ जरूरी नियामकीय बदलावों को लेकर चर्चा कर रही है।
सरकार की कोशिश है कि पर्यावरण और वन संबंधी नियमों का पालन करते हुए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे नदियों में जमा सामग्री को वैज्ञानिक तरीके से हटाया जा सके और उससे राज्य को राजस्व भी प्राप्त हो।
बाढ़ और नदी तल की समस्या से भी जुड़ा मामला
हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में नदियों के तल में बड़ी मात्रा में गाद, रेत और मलबा जमा होना प्रशासन के लिए चुनौती बन सकता है। भारी बारिश और मानसून के दौरान नदियों का जलस्तर बढ़ने पर नदी तल में जमा सामग्री बाढ़ और कटाव से जुड़ी समस्याओं को प्रभावित कर सकती है।
ऐसे में सरकार की नई ड्रेजिंग नीति को केवल राजस्व बढ़ाने के नजरिए से नहीं, बल्कि नदी प्रबंधन और आपदा जोखिम को कम करने के प्रयास के तौर पर भी देखा जा रहा है।
सरकार का लक्ष्य आर्थिक आत्मनिर्भरता
CM सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में माइनिंग क्षेत्र की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करके राज्य की आय बढ़ाई जा सकती है। अलग विभाग बनाने का उद्देश्य माइनिंग से जुड़े काम को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाना है।
सरकार का दावा है कि अगर जरूरी मंजूरियों और प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया जाता है तो माइनिंग और ड्रेजिंग राज्य के लिए महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत बन सकते हैं।
निष्कर्ष
हिमाचल प्रदेश सरकार ने माइनिंग और नदी ड्रेजिंग को लेकर बड़ा रोडमैप सामने रखा है। CM सुक्खू के मुताबिक माइनिंग के लिए अलग विभाग बनाने और नई ड्रेजिंग पॉलिसी लागू करने से राज्य को हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है।
अब सरकार की चुनौती वन और पर्यावरण मंजूरियों, माइनिंग परमिशन तथा केंद्र से जुड़े नियमों को लेकर बनी अड़चनों को दूर करने की होगी। यदि प्रस्तावित व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो इससे हिमाचल में नदी प्रबंधन के साथ-साथ राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है।
रिपोर्टर; सतविंदर, कौर मुख्य संवाददाता हरियाणा

