CM उमर अब्दुल्ला का बड़ा प्लान, जम्मू-कश्मीर में मजबूत होगी हेल्थ व्यवस्था; गांवों तक पहुंचेगी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा
CM उमर अब्दुल्ला का बड़ा प्लान, जम्मू-कश्मीर में मजबूत होगी हेल्थ व्यवस्था; गांवों तक पहुंचेगी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा
श्रीनगर, 28 अगस्त 2026। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत करने का रोडमैप सामने रखा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अत्याधुनिक क्वाटरनरी हेल्थकेयर विकसित करने के साथ-साथ प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना भी जरूरी है। उनका कहना है कि केवल बड़े और सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों का विस्तार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य सुविधाओं को गांवों और दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्रों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाना होगा।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC) में आयोजित Quaternary Healthcare & Research Summit: 4th J&K Medical Conference-2026 के समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। सम्मेलन में अत्याधुनिक चिकित्सा, स्वास्थ्य अनुसंधान, विशेषज्ञ सेवाओं और जम्मू-कश्मीर में क्वाटरनरी हेल्थकेयर को विकसित करने से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।
प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना भी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कई मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें सामान्य बीमारी या सर्जरी के लिए भी बड़े रेफरल अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। यदि स्थानीय स्तर पर पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों तो ऐसे मरीजों का इलाज नजदीकी अस्पतालों में ही किया जा सकता है।
इससे बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव कम होगा और गंभीर मामलों के इलाज के लिए विशेषज्ञ संस्थानों की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा।
बड़े अस्पतालों का दबाव कम करने की कोशिश
मुख्यमंत्री ने कहा कि SKIMS जैसे संस्थानों की भूमिका मुख्य रूप से गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज में होनी चाहिए। लेकिन प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर पर सुविधाओं की कमी के कारण कई सामान्य मामलों में भी मरीज बड़े अस्पतालों तक पहुंच जाते हैं।
सरकार का उद्देश्य ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करना है जिसमें मरीज को उसकी बीमारी और जरूरत के अनुसार पहले नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर उपचार मिल सके। जरूरत पड़ने पर ही मरीज को जिला अस्पताल या बड़े रेफरल संस्थान में भेजा जाए।
इस तरह की रेफरल व्यवस्था से न केवल मरीजों को सुविधा मिलेगी, बल्कि बड़े चिकित्सा संस्थानों में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा।
ग्रामीण और दूरदराज इलाकों पर विशेष ध्यान
जम्मू-कश्मीर के कई इलाके भौगोलिक रूप से कठिन और पहाड़ी हैं। ऐसे क्षेत्रों में लोगों के लिए बड़े अस्पतालों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण होता है। मुख्यमंत्री ने इसी समस्या को देखते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं को ग्रामीण और दूरदराज इलाकों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
सरकार के सामने चुनौती है कि इन क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को पर्याप्त डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, दवाइयां और जरूरी मेडिकल उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।
यदि स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र मजबूत होते हैं तो ग्रामीण आबादी को छोटी-बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए शहरों की ओर जाने की जरूरत कम होगी।
जम्मू-कश्मीर के डॉक्टरों को वापस लाने की कोशिश
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर से मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने के बाद देश और विदेश में काम कर रहे डॉक्टरों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।
उन्होंने ‘रिवर्स ब्रेन ड्रेन’ की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि यदि प्रदेश में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं, बेहतर संस्थान और शोध के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो बाहर काम कर रहे विशेषज्ञ डॉक्टरों को जम्मू-कश्मीर वापस लाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री का मानना है कि जम्मू-कश्मीर के प्रशिक्षित डॉक्टरों और विशेषज्ञों का अनुभव प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बाहर जाने की जरूरत कम हो
सरकार का एक बड़ा उद्देश्य यह भी है कि जम्मू-कश्मीर के मरीजों को गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख कम करना पड़े।
इसके लिए अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक, विशेषज्ञ चिकित्सक, आधुनिक उपकरण और बेहतर अस्पताल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने चिकित्सा क्षेत्र में रिसर्च, इनोवेशन और लगातार सीखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि मेडिकल साइंस तेजी से बदल रहा है और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े डॉक्टरों एवं कर्मचारियों को नई तकनीक और उपचार पद्धतियों से लगातार अपडेट रहना होगा।
SKIMS में हुआ मेडिकल कॉन्फ्रेंस
4th J&K Medical Conference-2026 का आयोजन SKIMS, Soura की ओर से किया गया। सम्मेलन में देश के विभिन्न प्रमुख चिकित्सा संस्थानों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया।
सम्मेलन में NITI Aayog, AIIMS New Delhi, PGIMER Chandigarh, AIIMS Jammu और AIIMS Awantipora सहित विभिन्न संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों की भागीदारी रही।
इस दौरान अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा अनुसंधान, विशेषज्ञ उपचार और जम्मू-कश्मीर में क्वाटरनरी हेल्थकेयर को विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
सम्मेलन की सिफारिशों को लागू करने पर जोर
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मेडिकल कॉन्फ्रेंस और विशेषज्ञ बैठकों का उद्देश्य केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इन कार्यक्रमों में सामने आने वाले सुझावों को व्यावहारिक योजनाओं में बदलना जरूरी है।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों से ऐसी योजनाएं तैयार करने को कहा जिनका सीधा फायदा जम्मू-कश्मीर के आम नागरिकों को मिल सके।
मुख्यमंत्री के अनुसार, स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार का वास्तविक मूल्यांकन तभी होगा जब इसका लाभ आम लोगों को उनके नजदीकी क्षेत्रों में मिलने लगे।
चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा
जम्मू-कश्मीर में आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को मजबूत करना भी जरूरी है। सरकार मेडिकल संस्थानों में बेहतर शिक्षा, प्रशिक्षण और रिसर्च के अवसर बढ़ाने पर जोर दे रही है।
आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के विकास में रिसर्च की अहम भूमिका होती है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर के मेडिकल संस्थानों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एंबुलेंस और उपकरण भी उपलब्ध कराए गए
जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
इसी दिशा में इस वर्ष मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विभिन्न जिलों के लिए सात एंबुलेंस और स्वास्थ्य उपकरण रवाना किए थे। ये एंबुलेंस जम्मू-कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की CSR पहल के तहत उपलब्ध कराई गई थीं।
इनका उद्देश्य विशेष रूप से दूरदराज क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना और जरूरतमंद मरीजों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।
MBBS इंटर्न की स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग
इसी बीच जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य और मेडिकल शिक्षा क्षेत्र में MBBS इंटर्न के स्टाइपेंड का मुद्दा भी चर्चा में है।
प्रदेश के MBBS इंटर्न ने मौजूदा ₹12,300 मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹30,000 किए जाने की मांग की है। इंटर्न का कहना है कि अस्पतालों में उनकी जिम्मेदारियों और काम के दबाव को देखते हुए मौजूदा स्टाइपेंड पर्याप्त नहीं है।
इंटर्न की ओर से 31 अगस्त से विरोध प्रदर्शन की घोषणा किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। कई रेजिडेंट डॉक्टर संगठनों ने उनकी मांगों का समर्थन किया है।
यह मुद्दा आने वाले दिनों में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रमुख विषयों में शामिल हो सकता है।
सरकार के सामने कई बड़ी चुनौतियां
जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए सरकार के सामने कई चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी चुनौती दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों तथा मेडिकल स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
इसके अलावा आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता, अस्पतालों का विस्तार, दवाइयों की नियमित आपूर्ति, मेडिकल रिसर्च को बढ़ावा देना और विशेषज्ञ चिकित्सकों को प्रदेश में बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
क्वाटरनरी हेल्थकेयर विकसित करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ मानव संसाधन की जरूरत होगी। ऐसे में सरकार को स्वास्थ्य बजट और इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना होगा।
क्या है क्वाटरनरी हेल्थकेयर?
क्वाटरनरी हेल्थकेयर को स्वास्थ्य सेवाओं के अत्यधिक विशेषज्ञता वाले स्तर के रूप में समझा जाता है। इसमें जटिल और दुर्लभ बीमारियों के लिए अत्याधुनिक उपचार, विशेषज्ञ चिकित्सा, उन्नत तकनीक और मेडिकल रिसर्च शामिल होते हैं।
जम्मू-कश्मीर में इस स्तर की चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार होने से गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत कम हो सकती है।
हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के स्वास्थ्य संबंधी विजन में जम्मू-कश्मीर के लिए दोहरी रणनीति दिखाई देती है। एक तरफ सरकार अत्याधुनिक क्वाटरनरी हेल्थकेयर और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ावा देना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करके गांवों और दूरदराज क्षेत्रों तक बेहतर चिकित्सा सुविधा पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार का लक्ष्य है कि बड़े अस्पतालों पर अनावश्यक मरीजों का दबाव कम हो, लोगों को उनके नजदीकी क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को जम्मू-कश्मीर से बाहर जाने की जरूरत कम पड़े।
अगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के स्तर पर पर्याप्त डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ, दवाइयां और उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं तथा विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया जाता है, तो प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जन-केंद्रित बनाया जा सकता है।

