कांग्रेस चुनाव आयोग विरोध: 6 अक्टूबर को EC का घेराव, 8 अक्टूबर तक देशभर में प्रदर्शन की तैयारी
नई दिल्ली। चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। इसी कड़ी में विपक्षी सांसद 6 अक्टूबर को दिल्ली में चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च करेंगे। कांग्रेस ने 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ और अन्य विरोध कार्यक्रमों की योजना बनाई है।
कांग्रेस का कहना है कि उसका मकसद चुनाव आयोग और सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़क से लेकर संसद तक राजनीतिक दबाव बनाना है। पार्टी विपक्षी दलों को भी इस अभियान में साथ लाने की कोशिश कर रही है। 30 सितंबर को हुई INDIA ब्लॉक की बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों के चुनाव आयोग तक मार्च की घोषणा की थी।
6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च
कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के सांसद 6 अक्टूबर को संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकालेंगे। इस प्रदर्शन में दोनों सदनों के विपक्षी सांसदों के शामिल होने की योजना है। विपक्ष का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। साथ ही SIR प्रक्रिया को वापस लेने और चुनाव में बैलेट पेपर से मतदान की मांग को अपने आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल किया है।
8 अक्टूबर तक जारी रहेगा आंदोलन
कांग्रेस ने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में आंदोलन चलाने का फैसला किया है। पार्टी का जोर जिला स्तर तक संगठन को सक्रिय करने और स्थानीय कार्यकर्ताओं को आंदोलन से जोड़ने पर है।
कांग्रेस की रणनीति सिर्फ दिल्ली तक सीमित रहने की नहीं है। पार्टी का लक्ष्य चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को देश के अलग-अलग हिस्सों में उठाकर इसे व्यापक राजनीतिक आंदोलन का रूप देना है। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में कांग्रेस पहले ही चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर चुकी है।
विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश
कांग्रेस इस आंदोलन में INDIA ब्लॉक के ज्यादा से ज्यादा दलों को साथ लाने की कोशिश कर रही है। विपक्षी दलों के बीच चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर संयुक्त रणनीति बनाने को लेकर लगातार बैठकें हो रही हैं।
30 सितंबर की बैठक में विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के खिलाफ साझा कार्यक्रम तय किया था। इसके तहत जिला स्तर पर प्रदर्शन, चुनाव आयोग तक मार्च और आगे बड़े जन आंदोलन की योजना बनाई गई है।
कांग्रेस की तीन प्रमुख मांगें
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 5 अक्टूबर को पार्टी की तीन प्रमुख मांगों को दोहराया। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR को रद्द करना और चुनाव में बैलेट पेपर से मतदान कराना शामिल है। कांग्रेस का कहना है कि ये उसकी ‘नॉन-नेगोशिएबल’ मांगें हैं।
विपक्ष का आरोप है कि SIR के जरिए मतदाता सूची में बदलाव से वास्तविक मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों में किसी तरह के संस्थागत मतभेद के आरोपों को खारिज किया है और प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों को सर्वसम्मत बताया है।
राष्ट्रपति से भी मिलने की तैयारी
कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के नेता अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का समय मांगने की तैयारी में हैं। विपक्षी दल चुनाव आयोग से जुड़े अपने आरोपों और मांगों को राष्ट्रपति के सामने रखने की योजना बना रहे हैं।
इसके अलावा विपक्ष ने आने वाले समय में देशभर में कई बड़ी रैलियां करने की भी योजना बनाई है। कांग्रेस का कहना है कि इन कार्यक्रमों के जरिए लोगों को मतदाता अधिकार और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों के बारे में बताया जाएगा।
दिल्ली में बढ़ा प्रदर्शन का सिलसिला
चुनाव आयोग के खिलाफ दिल्ली में पहले से ही विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। 5 अक्टूबर को भी राजधानी में विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी। पुलिस के मुताबिक कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
दिल्ली में INDIA ब्लॉक की स्थानीय इकाइयों ने भी SIR के खिलाफ संयुक्त प्रदर्शन की घोषणा की है। कांग्रेस, CPI, CPI(M), RJD, NCP और RSP समेत कई दल इस अभियान में शामिल हैं।
नवंबर में बड़ी रैली की तैयारी
कांग्रेस ने नवंबर में भी बड़े आंदोलन की तैयारी की है। INDIA ब्लॉक की ओर से 1 नवंबर को दिल्ली में बड़े ‘सेव डेमोक्रेसी’ कार्यक्रम की घोषणा की गई है। विपक्षी दल इस मंच से चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को उठाने की तैयारी कर रहे हैं।
कुल मिलाकर चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का आंदोलन अब संसद से सड़क तक फैलता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस जहां संगठनात्मक स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर रही है, वहीं INDIA ब्लॉक के सहयोगी दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश भी तेज हो गई है। 6 अक्टूबर का चुनाव आयोग तक मार्च इस आंदोलन का अहम चरण माना जा रहा है।


