एटा फर्जी मेडिकल कॉलेज का पर्दाफाश, 5 गिरफ्तार; प्रिंसिपल ने रची खुद के अपहरण की साजिश
एटा: उत्तर प्रदेश के एटा जिले में पुलिस ने एक बड़े शिक्षा फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। मारहरा थाना क्षेत्र में कथित तौर पर ‘बीएस मेडिकल कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी’ के नाम से फर्जी संस्थान चलाकर छात्रों को मेडिकल और पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिला देने, फीस वसूलने और फर्जी डिग्री-मार्कशीट देने का मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक यह गतिविधि वर्ष 2022 से चल रही थी और अब तक छात्रों से दो करोड़ रुपये से अधिक की रकम ठगे जाने की बात सामने आई है। मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
खुद के अपहरण की झूठी कहानी से खुला राज
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा एक कथित अपहरण की जांच के दौरान हुआ। पुलिस के मुताबिक 16 सितंबर को रामसेवक नाम के व्यक्ति ने पुलिस को सूचना दी कि उसके भाई सतेंद्र कुमार का अपहरण कर लिया गया है और उसकी रिहाई के बदले फिरौती मांगी जा रही है।
सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल लोकेशन की मदद से सतेंद्र कुमार को आगरा से सकुशल बरामद कर लिया।
पूछताछ के दौरान पुलिस को अपहरण की कहानी संदिग्ध लगी। जांच में पुलिस के अनुसार सामने आया कि सतेंद्र ने खुद ही अपने अपहरण की साजिश रची थी। आरोप है कि छात्रों और उनके परिजनों से ली गई रकम वापस करने के बढ़ते दबाव के बीच उसने खुद को अपहृत दिखाने की योजना बनाई थी।
फर्जी मेडिकल कॉलेज में चल रहे थे कई कोर्स
पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो कथित फर्जी मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी का पूरा नेटवर्क सामने आया। पुलिस के मुताबिक वर्ष 2022 से संस्थान के नाम पर अलग-अलग मेडिकल और पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों में छात्रों को प्रवेश दिया जा रहा था।
इनमें डी-फार्मा, बी-फार्मा, बीएससी नर्सिंग, जीएनएम, एएनएम, डीएमएलटी, बीएमएलटी और अन्य पाठ्यक्रम शामिल होने की बात सामने आई है। छात्रों से फीस लेने के बाद उन्हें डिग्री और मार्कशीट उपलब्ध कराने का भरोसा दिया जाता था।
पुलिस को जांच के दौरान फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज भी मिले। इनमें छात्रों के आई कार्ड, आवेदन फॉर्म, फीस रसीदें, अटेंडेंस शीट, परीक्षा पुस्तिकाएं, प्रश्नपत्र, मार्कशीट, मुहर और लेटर पैड शामिल हैं। इसके अलावा लैपटॉप और फर्जी चेक भी बरामद किए गए हैं।
चाय बेचने वाले के नाम पर चल रहा था संस्थान
जांच में एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। पुलिस के मुताबिक कथित मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी को जिस व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड दिखाया गया था, वह भगवान दास है और वह चाय बेचने का काम करता है।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि भगवान दास के नाम और पहचान का इस्तेमाल किस तरह किया गया और फर्जी संस्थान के संचालन में उसकी वास्तविक भूमिका क्या थी।
पांच आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में सतेंद्र कुमार, गौरव अग्रवाल, भगवान दास, नरेंद्र उर्फ पप्पू और मोहम्मद शरीफ कुरैशी को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक आरोपियों से पूछताछ कर फर्जी कॉलेज और यूनिवर्सिटी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। कुछ रिपोर्टों में गौरव अग्रवाल को सेवानिवृत्त सीएमओ का बेटा बताया गया है।
छात्रों से करोड़ों रुपये लेने का आरोप
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार फर्जी संस्थान में छात्रों को अलग-अलग पाठ्यक्रमों में दाखिला देने के नाम पर फीस ली जाती थी। उन्हें मान्य डिग्री और मार्कशीट देने का भरोसा दिया जाता था।
पुलिस के मुताबिक इस पूरे फर्जीवाड़े में अब तक दो करोड़ रुपये से अधिक की रकम लिए जाने की जानकारी सामने आई है। कुछ छात्रों को बाद में अपने दस्तावेजों के फर्जी होने की जानकारी हुई और उन्होंने फीस वापस करने की मांग शुरू कर दी थी। इसी दबाव के बीच कथित तौर पर सतेंद्र ने अपने अपहरण की कहानी रची।
पुलिस ने बरामद किए फर्जी दस्तावेज
तफ्तीश के दौरान पुलिस ने कथित फर्जी कॉलेज से बड़ी संख्या में दस्तावेज और अन्य सामग्री बरामद की है। इसमें फर्जी मार्कशीट, आई कार्ड, प्रवेश फॉर्म, फीस रसीदें, हाजिरी शीट, परीक्षा पुस्तिकाएं और जाली प्रश्नपत्र शामिल हैं।
इसके अलावा फर्जी मुहर लगे लेटर पैड और यूनिवर्सिटी कोड वाली प्रचार सामग्री भी बरामद होने की जानकारी पुलिस ने दी है। इन दस्तावेजों के आधार पर पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कितने छात्रों को फर्जी दस्तावेज दिए गए और कितने लोगों से रकम वसूली गई।
आगे की जांच में खुलेगा पूरा नेटवर्क
पुलिस ने सभी पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी के संचालन में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
साथ ही पुलिस छात्रों से जुड़े रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन, बरामद दस्तावेजों और आरोपियों के संपर्कों की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद फर्जी संस्थान के जरिए हुए कथित फर्जीवाड़े की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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