ग्वालियर सड़क गुणवत्ता पर हाईकोर्ट सख्त, कई सैंपल फेल, मरम्मत के दस्तावेजों पर भी उठे सवाल
ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में सड़कों की गुणवत्ता का मामला अब हाईकोर्ट में गंभीर जांच के दौर में पहुंच गया है। शहर की सड़कों के निर्माण और मरम्मत को लेकर चल रही सुनवाई में 18 सितंबर को जांच रिपोर्ट और नगर निगम से जुड़े दस्तावेज अदालत के सामने रखे गए। जांच में सड़क निर्माण के लिए लिए गए कई नमूनों में निर्धारित तकनीकी मानकों की कमी सामने आई है।
जांच में 1-A, 2-A, 3-A, 4-A, 5-A, 6-A, 7-A और 8-A समेत कई सैंपल की गुणवत्ता पर सवाल उठे। कुछ नमूनों में बिटुमिन कंटेंट निर्धारित मानक के मुताबिक नहीं मिला, जबकि कुछ जगह घनत्व और बाइंडर कंटेंट की कमी सामने आई। सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की ग्रेडिंग को लेकर भी खामियां दर्ज की गईं।
कई नमूनों में बिटुमिन कंटेंट कम मिला
सड़क की मजबूती के लिए बिटुमिन और अन्य निर्माण सामग्री का सही अनुपात बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जांच रिपोर्ट में कई नमूनों में बिटुमिन कंटेंट कम पाए जाने की बात सामने आई। इसके अलावा कुछ नमूनों में घनत्व और बाइंडर कंटेंट भी निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे।
जांच में सामने आई इन कमियों के बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता और इस्तेमाल की गई सामग्री को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े दस्तावेजों और रिपोर्ट को गंभीरता से लिया है।
ग्वालियर में सड़कों की गुणवत्ता को लेकर पहले भी हाईकोर्ट में सुनवाई हो चुकी है। सड़कें धंसने और कम समय में खराब होने की शिकायतों के बाद कोर्ट के निर्देश पर तकनीकी जांच कराई गई थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर सड़क के अलग-अलग हिस्सों से नमूने लिए गए और उनकी प्रयोगशाला में जांच कराई गई।
टेस्ट रिपोर्ट की तारीखों पर भी सवाल
मामले में सबसे अहम सवाल सड़क के नमूने लेने और उनकी टेस्ट रिपोर्ट तैयार होने की तारीखों को लेकर उठा है। नगर निगम के दस्तावेजों और DPR के मुताबिक, DBM और BC के सैंपल 10 जुलाई 2024 को लिए गए थे। इनकी टेस्ट रिपोर्ट अगले ही दिन यानी 11 जुलाई 2024 को तैयार होने की बात सामने आई।
कोर्ट में इन तारीखों और जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए। सुनवाई के दौरान यह जानने की कोशिश की गई कि नमूने लेने, उन्हें प्रयोगशाला भेजने और उनकी जांच की पूरी प्रक्रिया किस तरह पूरी हुई थी।
अदालत ने संबंधित अधिकारियों से इस पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट करने के लिए जवाब मांगा है।
गड्ढों को मलबे से भरने पर भी सवाल
सुनवाई के दौरान सड़क मरम्मत की प्रक्रिया को लेकर भी नगर निगम से जवाब मांगा गया। हाईकोर्ट ने नगर निगम कमिश्नर से पूछा कि जब टेंडर की तकनीकी शर्तों में सड़क की खराब सामग्री और मलबा हटाने का प्रावधान है, तो गड्ढों को मलबे से भरकर उसके ऊपर बिटुमिन की परत डालने की प्रक्रिया क्यों अपनाई गई।
कोर्ट का सवाल सीधे सड़क की मरम्मत में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और निर्धारित प्रक्रिया से जुड़ा है। अगर खराब सड़क सामग्री या मलबा हटाने के बजाय उसी का इस्तेमाल गड्ढे भरने में किया जाता है, तो इससे सड़क की मजबूती और उसकी उम्र पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
इसी वजह से हाईकोर्ट ने नगर निगम से इस संबंध में विस्तृत जवाब मांगा है।
पहले भी सड़कों की जांच करा चुका है हाईकोर्ट
ग्वालियर की सड़कों की खराब गुणवत्ता का मामला लंबे समय से अदालत के सामने है। सड़कें धंसने और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद हाईकोर्ट ने स्वतंत्र तकनीकी जांच के निर्देश दिए थे।
जांच के दौरान शहर की कई सड़कों का निरीक्षण किया गया। इसके अलावा सड़क की अलग-अलग परतों और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को जांचने के लिए नमूने भी लिए गए। इससे पहले हाईकोर्ट के निर्देश पर जांच टीम ने नेशनल हाईवे के हिस्से से भी सड़क की परतें खुदवाकर डामर, गिट्टी और बेस मटेरियल के नमूने लिए थे।
अधिकारियों से मांगा गया जवाब
सड़क निर्माण और मरम्मत से जुड़े दस्तावेजों में सामने आई विसंगतियों के बाद अब नगर निगम के अधिकारियों की जवाबदेही पर भी नजर है। हाईकोर्ट ने नगर निगम कमिश्नर से उन परिस्थितियों को स्पष्ट करने को कहा है, जिनके तहत सड़क मरम्मत का काम कराया गया।
कोर्ट यह भी देख रहा है कि टेंडर और DPR में निर्धारित तकनीकी शर्तों का जमीन पर कितना पालन हुआ। इसके साथ ही नमूनों की जांच और टेस्ट रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है।
सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल
ग्वालियर की सड़कों के नमूनों में तकनीकी कमियां सामने आने के बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर बहस और तेज हो गई है। कोर्ट में पेश रिपोर्ट और दस्तावेजों से यह स्पष्ट है कि मामले में सिर्फ सड़क की ऊपरी सतह ही नहीं, बल्कि निर्माण सामग्री, मिश्रण, घनत्व, बाइंडर और मरम्मत की पूरी प्रक्रिया की जांच की जा रही है।
अब नगर निगम कमिश्नर के जवाब और आगे पेश होने वाली रिपोर्ट पर अदालत की सुनवाई केंद्रित रहेगी। मामले में कोर्ट के निर्देशों के बाद यह तय होगा कि सड़क निर्माण और मरम्मत में सामने आई कमियों के लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर बनती है और आगे क्या कार्रवाई की जाती है।
ग्वालियर में सड़क गुणवत्ता की जांच का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाईकोर्ट की निगरानी में तकनीकी नमूनों की जांच और सरकारी दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है। अदालत के सामने रखे गए सैंपल और रिपोर्ट अब सड़क निर्माण में तय मानकों के पालन की वास्तविक स्थिति को समझने का आधार बनेंगे।
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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