3 घंटे का सफर 11 घंटे में… कैंची धाम ट्रैफिक जाम से सिसकती जिंदगी और बेबस पहाड़
उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कैंची धाम में बढ़ती श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भीड़ अब स्थानीय लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। वीकेंड और लंबे अवकाश के दौरान हल्द्वानी से पहाड़ की ओर जाने वाले रास्ते पर वाहनों का दबाव इतना बढ़ रहा है कि सामान्य तौर पर 2-3 घंटे में पूरा होने वाला सफर 11-12 घंटे तक खिंच रहा है। इसका सीधा असर मरीजों, एंबुलेंस, बुजुर्गों, छात्रों और रोजमर्रा के काम से यात्रा करने वाले लोगों पर पड़ रहा है।
भीमताल से कैंची धाम तक वाहनों की लंबी कतार
बीते दिनों हल्द्वानी से पहाड़ की ओर जाने वाले मार्ग पर भीमताल, भवाली, निगलाट और कैंची धाम तक वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। दूसरी तरफ पहाड़ से मैदान की ओर आने वाले यात्री भी कई घंटे जाम में फंसे रहे। काठगोदाम-ज्योलीकोट से नैनीताल जाने वाले मार्ग पर भी वाहनों का भारी दबाव देखने को मिला।
रिपोर्ट के मुताबिक, तीन दिन के लंबे वीकेंड के दौरान स्थिति और बिगड़ गई। हल्द्वानी से अल्मोड़ा पहुंचने में जहां सामान्य तौर पर करीब तीन घंटे लगते हैं, वहीं कई यात्रियों को आठ घंटे तक जाम में फंसा रहना पड़ा।
पहाड़ के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित
कैंची धाम का रास्ता सिर्फ पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण नहीं है। कुमाऊं के अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, रानीखेत, धारचूला समेत कई इलाकों के लिए हल्द्वानी से जुड़ने वाला यह प्रमुख मार्ग है।
पहाड़ों में रोजमर्रा की जरूरत का सामान, सब्जियां, दूध, दवाइयां और अन्य जरूरी सामग्री भी इसी रास्ते से पहुंचती है। ऐसे में लंबे समय तक लगने वाला जाम केवल यात्रियों की परेशानी नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय जनजीवन और आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित होती है।
सबसे गंभीर चिंता मरीजों और एंबुलेंस को लेकर है। जाम में स्वास्थ्य संबंधी जरूरत वाले लोगों, बुजुर्गों और छात्रों को भी घंटों फंसे रहना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति अब कभी-कभार होने वाली समस्या नहीं रह गई है, बल्कि लगातार बढ़ती चुनौती बन चुकी है।
पर्यटन से फायदा, लेकिन ओवरटूरिज्म बना चुनौती
कैंची धाम की लोकप्रियता पिछले कुछ समय में तेजी से बढ़ी है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा नीब करौली महाराज के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। इससे क्षेत्र में पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है, लेकिन वाहनों और लोगों की बढ़ती संख्या ने सड़क की क्षमता पर भारी दबाव डाल दिया है।
आम दिनों की तुलना में वीकेंड और छुट्टियों के दौरान स्थिति सबसे ज्यादा खराब होती है। स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि जाम का असर उनके व्यापार पर भी पड़ रहा है। कई यात्री लंबे जाम से बचने के लिए वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने लगे हैं, जिससे मुख्य पर्यटन मार्ग पर स्थित छोटे कारोबार भी प्रभावित हो रहे हैं।
सड़क किनारे निर्माण और पर्यावरण पर भी सवाल
कैंची धाम और आसपास के इलाकों में बढ़ता निर्माण भी चिंता का विषय बताया जा रहा है। रिपोर्ट में कैंची से गरमपानी की ओर जाने वाले हाईवे के पास कोसी नदी के आसपास बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य का उल्लेख किया गया है।
पहाड़ी क्षेत्र भौगोलिक और पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में बढ़ते निर्माण, वाहनों के दबाव और सीमित सड़क क्षमता के बीच भविष्य में यातायात के साथ पर्यावरणीय चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं।
बाईपास की जरूरत पर जोर
कैंची धाम मार्ग पर बढ़ते यातायात के दबाव को कम करने के लिए भवाली सैनिटोरियम क्षेत्र से बाईपास की योजना पर लंबे समय से चर्चा होती रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, बाईपास का काम शुरू तो किया गया था, लेकिन इसके पूरा होने में देरी से वैकल्पिक यातायात व्यवस्था का लाभ पूरी तरह नहीं मिल पाया है।
जून 2026 में रातीघाट के पास शिप्रा नदी पर बैली ब्रिज के निर्माण के बाद बाईपास से जुड़े यातायात समाधान की उम्मीद भी जगी थी, हालांकि मार्ग के बड़े हिस्से के पूरी तरह सुगम न होने की बात सामने आई थी।
प्रशासन ने लागू किया ट्रैफिक प्लान
भारी भीड़ को देखते हुए नैनीताल पुलिस ने यातायात व्यवस्था के लिए विशेष प्लान लागू किया। रिपोर्टों के मुताबिक, कैंची धाम जाने वाले श्रद्धालुओं के निजी वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थलों पर रोककर वहां से शटल सेवा के जरिए धाम तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई। भीमताल, भवाली और सैनिटोरियम से शटल सेवाएं संचालित की गईं।
इसके अलावा यातायात के दबाव को कम करने के लिए वन-वे व्यवस्था और कुछ समय के लिए पहाड़ की ओर जाने वाले वाहनों को नियंत्रित करने का फैसला भी लिया गया। पुलिस ने यात्रियों से यात्रा की योजना पहले से बनाने और निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की अपील की।
होली के लंबे वीकेंड पर भी बिगड़े थे हालात
कैंची धाम में जाम की समस्या नई नहीं है। इस साल होली के लंबे वीकेंड के दौरान भी भीमताल से कैंची धाम तक वाहनों की लंबी कतारें लगी थीं। रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को सुबह से शाम तक यातायात बेहद धीमा रहा और कई घंटों तक वाहन रेंगते रहे।
अब स्थानीय लोगों की मांग है कि सिर्फ वीकेंड पर अस्थायी ट्रैफिक व्यवस्था करने के बजाय स्थायी समाधान तैयार किया जाए। इसके लिए वैकल्पिक मार्ग, पर्याप्त पार्किंग, बेहतर यातायात प्रबंधन और पहाड़ी क्षेत्र की क्षमता के मुताबिक पर्यटन नीति पर काम करने की जरूरत बताई जा रही है।
कैंची धाम की बढ़ती लोकप्रियता जहां उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन के लिए अच्छी खबर है, वहीं लगातार बढ़ता ट्रैफिक यह सवाल भी खड़ा कर रहा है कि आखिर पहाड़ की सड़कें और स्थानीय व्यवस्था कितने दबाव तक इस भीड़ को संभाल सकती हैं। समय रहते ठोस और दीर्घकालिक व्यवस्था नहीं बनाई गई तो आने वाले समय में समस्या और गंभीर हो सकती है।
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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