रामपुर तिराहा कांड के शहीदों को सतपाल महाराज ने दी श्रद्धांजलि, बोले- बलिदानों से बना उत्तराखंड
दीप सिंह, लखनऊ मुख्य संवाददाता, दैनिक रुस्तम-ए-हिंद
देहरादून, 1 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने रामपुर तिराहा कांड के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। उन्होंने कहा कि रामपुर तिराहा कांड के शहीद आज भी उत्तराखंड के हिमालय, गंगा-यमुना और प्रदेश के गांव-गांव में अपनी स्मृतियों के रूप में जीवित हैं।
सतपाल महाराज ने कहा कि 2 अक्टूबर 1994, गांधी जयंती के दिन निहत्थे उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी अलग राज्य की मांग को लेकर दिल्ली कूच कर रहे थे। मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर आंदोलनकारियों को रोका गया और गोलीबारी की घटना हुई। उन्होंने रामपुर तिराहा कांड को उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास का बेहद दर्दनाक अध्याय बताया।
आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान को किया याद
सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी केवल अपने लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सम्मान, स्वाभिमान और अस्मिता के लिए संघर्ष कर रहे थे। उनके अनुसार उत्तराखंड राज्य का गठन आंदोलनकारियों के लंबे संघर्ष और 42 से अधिक शहादतों के बाद हुआ।
उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के लिए जिन लोगों ने अपना जीवन समर्पित किया, उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। रामपुर तिराहा कांड के शहीद उत्तराखंड की सामूहिक स्मृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनके बलिदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है।
राज्य आंदोलनकारियों के कल्याण पर सरकार का जोर
सतपाल महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार राज्य आंदोलनकारियों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि चिन्हित राज्य आंदोलनकारियों के बच्चों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन में वृद्धि किए जाने का भी उल्लेख किया। महाराज ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों और उनके परिवारों के हितों से जुड़े विषयों पर सरकार लगातार काम कर रही है।
नई पीढ़ी को पढ़ाया जाएगा उत्तराखंड आंदोलन का इतिहास
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि रामपुर तिराहा कांड और उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से स्कूलों के पाठ्यक्रम में राज्य आंदोलन के शहीदों की वीरगाथाओं को स्थान देने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को यह जानकारी होनी चाहिए कि उत्तराखंड राज्य कितने संघर्ष और बलिदान के बाद अस्तित्व में आया। राज्य आंदोलन के इतिहास को पाठ्यक्रम में शामिल करने से युवा पीढ़ी को आंदोलनकारियों के संघर्ष और उनके योगदान को समझने का अवसर मिलेगा।
शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनाने की बात
सतपाल महाराज ने कहा कि राज्य आंदोलन के शहीदों ने जिस समृद्ध, स्वावलंबी और पलायन-मुक्त उत्तराखंड की कल्पना की थी, सरकार उसी दिशा में काम करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को पर्यटन और आध्यात्मिक क्षेत्र में विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को विकास से जोड़कर रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
बलिदान को याद रखना सामूहिक जिम्मेदारी
सतपाल महाराज ने कहा कि राज्य निर्माण आंदोलन के शहीदों के सपनों को साकार करना और उनके बलिदान को हमेशा याद रखना प्रदेशवासियों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि रामपुर तिराहा कांड की स्मृति उत्तराखंड के राज्य आंदोलन के संघर्ष को याद दिलाती रहेगी।
उन्होंने कहा कि जिन आंदोलनकारियों ने उत्तराखंड राज्य के लिए संघर्ष किया, उनके योगदान को सम्मान देना और नई पीढ़ी को उनके इतिहास से परिचित कराना जरूरी है।
नोट: रामपुर तिराहा कांड से संबंधित ऐतिहासिक घटनाओं और शहीदों की संख्या के संबंध में विभिन्न स्रोतों में आंकड़ों एवं विवरण में अंतर मिल सकता है। इस खबर में प्रस्तुत राजनीतिक और सरकारी योजनाओं से संबंधित बातें सतपाल महाराज के बयान के अनुसार दी गई हैं।
रिपोर्टर; सतविंदर, कौर मुख्य संवाददाता हरियाणा
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
सत्य, न्याय और राष्ट्रहित की निर्भीक आवाज़
Rustam-E-Hind Hindi Daily Newspaper
https://l1nq.com/zvf3zgb
सब्स्क्राइब करें।


