खेत तालाब योजना से बुंदेलखंड के बांदा में बदली खेती की तस्वीर, किसानों की आमदनी में हुआ इजाफा
बांदा: कभी बुंदेलखंड में पानी की किल्लत इतनी गंभीर होती थी कि पीने के पानी की व्यवस्था के लिए ट्रेन तक भेजनी पड़ती थी। लेकिन अब जल संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों और खेत तालाब योजना जैसी पहल से इलाके के कई किसानों को सिंचाई के लिए स्थानीय स्तर पर पानी उपलब्ध होने लगा है। बांदा के मटौंध इलाके में खेतों में बनाए गए तालाब खेती के लिए बड़ा सहारा बन रहे हैं।
खेत में तालाब बना सिंचाई का साधन
उत्तर प्रदेश सरकार की खेत तालाब योजना के तहत किसान अपने खेत में तालाब बनवा सकते हैं। इन तालाबों में बारिश के पानी को जमा किया जाता है और जरूरत के समय इसी पानी का इस्तेमाल फसलों की सिंचाई के लिए किया जाता है।
इस व्यवस्था से किसानों को बारिश पर पूरी तरह निर्भर रहने की जरूरत कम होती है। खेत में पानी उपलब्ध रहने से फसल की सिंचाई समय पर की जा सकती है और सूखे या कम बारिश की स्थिति में भी खेती को बचाने में मदद मिलती है।
आवेदन के बाद मिलता है योजना का लाभ
खेत तालाब योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को उत्तर प्रदेश कृषि पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होता है। पात्रता और स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद खेत में तालाब निर्माण कराया जाता है।
योजना का उद्देश्य बारिश के पानी को खेतों में ही संरक्षित करना और सिंचाई के लिए जल की उपलब्धता बढ़ाना है। इससे जल संरक्षण के साथ-साथ किसानों की खेती की लागत और उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद रहती है।
बांदा में बड़ी संख्या में किसानों को फायदा
भूमि संरक्षण अधिकारी अभयराज के मुताबिक, खेत तालाब योजना से किसानों को सिंचाई के लिए पानी का अपना इंतजाम करने में मदद मिली है। इस साल बांदा जिले में 255 किसानों को योजना से जोड़ने की जानकारी सामने आई है।
खेतों में बने तालाबों में बारिश का पानी जमा होने के बाद किसान उसे जरूरत के मुताबिक फसलों में इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे खरीफ के साथ-साथ दूसरी फसलों की सिंचाई में भी सुविधा मिल रही है।
बुंदेलखंड में पानी की समस्या से मुकाबले की कोशिश
बुंदेलखंड लंबे समय से पानी की कमी और अनियमित बारिश जैसी समस्याओं से जूझता रहा है। ऐसे में खेत स्तर पर वर्षा जल को रोकना और उसका उपयोग करना किसानों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
खेत तालाब योजना इसी सोच पर आधारित है कि बारिश के पानी को बह जाने देने के बजाय उसे स्थानीय स्तर पर संरक्षित किया जाए। इससे भूजल और सिंचाई दोनों पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
किसानों की आय बढ़ाने में मदद
सिंचाई की सुविधा बेहतर होने से किसानों को फसल उत्पादन बढ़ाने और खेती के क्षेत्र में विविधता लाने का अवसर मिलता है। पर्याप्त पानी उपलब्ध होने पर किसान ऐसी फसलों की ओर भी बढ़ सकते हैं जिनके लिए नियमित सिंचाई की जरूरत होती है।
बांदा के मटौंध क्षेत्र में खेत तालाबों ने इसी बदलाव की तस्वीर पेश की है। पानी की उपलब्धता बढ़ने से खेती पर निर्भर किसानों को मौसम की अनिश्चितता से निपटने में मदद मिल रही है और उनकी आय में सुधार की संभावना बढ़ी है।
जल संरक्षण के साथ खेती को मजबूती
खेत तालाब योजना सिर्फ सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका बड़ा उद्देश्य बारिश के पानी का संरक्षण भी है। बुंदेलखंड जैसे जल संकट वाले क्षेत्र में खेत-खेत पानी रोकने की व्यवस्था लंबे समय में खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद कर सकती है।
बांदा में इस योजना से जुड़े किसानों का अनुभव यह बताता है कि अगर बारिश के पानी को सही तरीके से संरक्षित किया जाए तो वही पानी खेती के लिए महत्वपूर्ण संसाधन बन सकता है। आने वाले समय में ऐसी योजनाओं का विस्तार बुंदेलखंड के दूसरे इलाकों के किसानों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।
रिपोर्टर; सतविंदर, कौर मुख्य संवाददाता हरियाणा
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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