खुले खाद्य तेल कारोबारियों को महाराष्ट्र सरकार की राहत, FDA कार्रवाई एक साल के लिए टली
महाराष्ट्र में खुले खाद्य तेल का कारोबार करने वाले व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है। महाराष्ट्र सरकार ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) आयुक्त तुकाराम मुंढे के उस फैसले में बदलाव कर दिया है, जिसके तहत खुले और बिना पैकिंग वाले खाद्य तेल की बिक्री के खिलाफ कार्रवाई की जानी थी। सरकार के फैसले के बाद कारोबारियों को फिलहाल एक साल का समय मिल गया है।
सरकार ने इस मामले में नियमों को लागू करने से पहले स्थिति का अध्ययन करने और कारोबारियों से जुड़े पहलुओं पर विचार करने का फैसला किया है। इसके लिए दो समितियां गठित की जाएंगी। इन समितियों की सिफारिशों के आधार पर आगे की कार्रवाई और नियमों को लागू करने की दिशा तय की जाएगी।
FDA आयुक्त ने की थी खुले तेल से बचने की अपील
दरअसल, पिछले महीने FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने आम लोगों से खुले या बिना पैकिंग वाले खाद्य तेल की खरीदारी नहीं करने की अपील की थी। उनका कहना था कि खुले में बिकने वाला खाद्य तेल स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित हो सकता है।
उन्होंने खाद्य तेल की गुणवत्ता और मिलावट को लेकर भी चिंता जताई थी। खुले तेल की बिक्री में पैकेजिंग, लेबलिंग और गुणवत्ता से जुड़ी जानकारी उपभोक्ताओं को स्पष्ट रूप से नहीं मिल पाती। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए तेल की गुणवत्ता और उसकी वास्तविक स्थिति का पता लगाना मुश्किल हो सकता है।
FDA की ओर से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर जांच और कार्रवाई की जाती है। इसी कड़ी में खुले खाद्य तेल के कारोबार पर भी सख्ती की तैयारी की गई थी।
सरकार ने क्यों बदला फैसला?
सरकार के इस फैसले के बाद अब कारोबारियों को तत्काल कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। खुले खाद्य तेल के कारोबार से जुड़े व्यापारियों को अपनी व्यवस्था में बदलाव करने के लिए एक साल का अतिरिक्त समय मिलेगा।
इस फैसले का असर खासतौर पर उन छोटे और स्थानीय कारोबारियों पर पड़ सकता है, जो लंबे समय से खुले तेल की बिक्री करते आ रहे हैं। सरकार ने नियमों को लागू करने से पहले इसके व्यावहारिक प्रभावों को समझने का रास्ता चुना है।
बदलाव को लागू कराने और पूरे मामले का अध्ययन करने के लिए दो समितियां बनाई जाएंगी। इन समितियों के जरिए संबंधित पक्षों की स्थिति, कारोबार पर पड़ने वाले प्रभाव और खाद्य सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर विचार किया जा सकता है।
तुकाराम मुंढे की कार्रवाई से चर्चा में आया था मामला
FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे अपने सख्त प्रशासनिक रुख और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में कार्रवाई के लिए चर्चा में रहे हैं। खुले खाद्य तेल को लेकर उनकी अपील के बाद यह मुद्दा खासा चर्चा में आया था।
उन्होंने उपभोक्ताओं को पैकिंग वाले खाद्य तेल को प्राथमिकता देने की सलाह दी थी। उनका जोर इस बात पर था कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।
इसी दौरान FDA की ओर से खुले और बिना पैकिंग वाले खाद्य तेल की बिक्री को लेकर कार्रवाई की तैयारी की गई थी। हालांकि, अब महाराष्ट्र सरकार ने इस फैसले में बदलाव करते हुए कारोबारियों को एक साल की राहत दे दी है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या मायने हैं?
सरकार के इस फैसले से कारोबारियों को राहत जरूर मिली है, लेकिन उपभोक्ताओं के लिए खाद्य तेल की गुणवत्ता का सवाल महत्वपूर्ण बना हुआ है। खुले तेल में मिलावट या उसकी गुणवत्ता से जुड़ी जानकारी स्पष्ट नहीं होने की स्थिति में ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
खरीदारी करते समय उपभोक्ताओं को तेल की पैकिंग, लेबल, निर्माण और अन्य जरूरी जानकारी की जांच करनी चाहिए। किसी भी खाद्य उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जा सकती है।
एक साल बाद क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक साल की राहत अवधि समाप्त होने के बाद सरकार क्या फैसला लेगी। दो समितियों की रिपोर्ट और सिफारिशों के आधार पर आगे की नीति तय की जा सकती है।
अगर समितियां खुले खाद्य तेल की बिक्री पर सख्ती की सिफारिश करती हैं, तो भविष्य में कारोबारियों के लिए नए नियम लागू किए जा सकते हैं। वहीं, कारोबारियों की व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार किसी वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार कर सकती है।
फिलहाल महाराष्ट्र में खुले खाद्य तेल के कारोबारियों को FDA की कार्रवाई से एक साल की राहत मिल गई है। सरकार द्वारा गठित की जाने वाली दोनों समितियों की भूमिका अब इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण होगी।
रिपोर्टर; जसलीन कौर, मुख्य प्रबंधक

